मंगलवार, 5 मई 2026

MahaRera की बड़ी कार्रवाई: Mumbai और आसपास के 8212 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को शो-कॉज नोटिस, Homebuyers की जानकारी छिपाने पर चेतावनी, HousingSocietySolutions की सलाह



महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) ने राज्य भर के 8212 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को जनवरी-मार्च तिमाही की अनिवार्य प्रोग्रेस रिपोर्ट (Quarterly Progress Report - QPR) न अपलोड करने के लिए शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं। यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।महाराष्ट्र में कुल 33,029 चल रहे रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में से 8,000 से ज्यादा डिफॉल्ट हो गए। ये रिपोर्ट्स फ्लैट्स की बिक्री संख्या, खर्च, निर्माण प्रगति और प्लान में किसी भी बदलाव की जानकारी देती हैं। इनकी अनुपलब्धता होमबायर्स को प्रोजेक्ट की सच्ची स्थिति जानने से वंचित करती है।महारेरा ने दी 60 दिनों की मोहलतडेवलपर्स को लंबित रिपोर्ट जमा करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। अगर इस अवधि में रिपोर्ट नहीं अपलोड की गई तो महारेरा सख्त कार्रवाई करेगा, जिसमें शामिल हैं:

प्रोजेक्ट बैंक अकाउंट्स फ्रीज करना

रजिस्ट्रेशन सस्पेंड या रद्द करना

विज्ञापन और मार्केटिंग पर रोक

सेल एग्रीमेंट रजिस्टर करने पर प्रतिबंध

₹50,000 तक का जुर्माना

महारेरा चेयरमैन मनोज सौनिक ने कहा, “डेवलपर्स को डिस्क्लोजर नॉर्म्स का पालन करना चाहिए। बार-बार फॉलो-अप के बावजूद रिपोर्ट न अपडेट करने पर हम रजिस्ट्रेशन रद्द करने या सस्पेंड करने में नहीं हिचकिचाएंगे।”क्षेत्रवार डिफॉल्ट प्रोजेक्ट्स की संख्या

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) + कोकण: 4,644 (सबसे ज्यादा)

ठाणे: 1,475

मुंबई सबअर्बन: 1,263

रायगढ़: 842

पालघर: 612

मुंबई सिटी: 267

पुणे रीजन: 2,311 (पुणे जिले में अकेले 1,957)

खानदेश: 511

विदर्भ: 483

मराठवाड़ा: 238

अन्य: दादरा और नगर हवेली (18), दमन (7)


क्यों जरूरी हैं ये रिपोर्ट्स?

RERA कानून के तहत ये रिपोर्ट्स अनिवार्य हैं। इनसे होमबायर्स प्रोजेक्ट की प्रगति, फाइनेंशियल हेल्थ और टाइमलाइन ट्रैक कर सकते हैं। महारेरा का कहना है कि सख्ती से अनुपालन बढ़ाने और खरीदारों का विश्वास बहाल करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

HousingSocietySolutions की सलाह:

होमबायर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश से पहले MahaRERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट की QPR, रजिस्ट्रेशन स्टेटस और कंप्लायंस चेक जरूर करें। डेवलपर्स के लिए भी यह चेतावनी है कि अनुपालन न करने की कीमत अब बहुत भारी पड़ सकती है।

यह कार्रवाई रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो खासकर मुंबई और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहा है।


सोमवार, 4 मई 2026

Housing Society में रहने वालों के लिए हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों को ही खाली जमीन पर अधिकार, बिल्डरों का खेल खत्म

  

हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों के लिए राहत भरी खबर है। महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कहा है कि सोसाइटी के सदस्यों को सिर्फ बिल्डिंग पर ही नहीं, बल्कि पूरे लेआउट की खाली जमीन (vacant land), ओपन स्पेस, पार्किंग एरिया और रिक्रिएशनल ग्राउंड पर भी अधिकार है। बिल्डर केवल बिल्डिंग का हिस्सा देकर बाकी मूल्यवान जमीन पर कब्जा नहीं रख सकते।

मामला क्या था?भयंदर (Bhayander) की एक कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी ने डिस्ट्रिक्ट डिप्टी रजिस्ट्रार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। रजिस्ट्रार ने सोसाइटी को केवल बिल्डिंग के नीचे की जमीन का कन्वेयेंस देने का आदेश दिया था, जबकि बाकी खाली जमीन और सुविधाओं को बाहर रख दिया गया था।

Justice Amit Borkar की सिंगल बेंच ने इस आदेश को रद्द कर दिया और सोसाइटी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने Maharashtra Ownership of Flats Act (MOFA) का हवाला देते हुए कहा कि कानून का मकसद घर खरीदने वालों के हितों की रक्षा करना है।कोर्ट के मुख्य 관찰 (Key Highlights):Deemed Conveyance केवल बिल्डिंग तक सीमित नहीं है। इसमें पार्किंग, इंटरनल रोड्स, ओपन स्पेस और रिक्रिएशनल एरिया भी शामिल हैं।

बिल्डर पूरे लेआउट का कन्वेयेंस करने के लिए बाध्य हैं।

बड़े लेआउट में कई सोसाइटी होने पर सभी को ओपन स्पेस पर proportionate rights मिलेंगे।

कोर्ट ने अधिकारियों को 8 हफ्तों के अंदर संशोधित Deemed Conveyance Certificate जारी करने का निर्देश दिया।

सोसाइटीज के लिए क्यों है यह फैसला गेम-चेंजर?

कई बिल्डर पुरानी ट्रिक अपनाते थे — बिल्डिंग बेच देते थे और आस-पास की खाली जमीन, पार्किंग या गार्डन को अपने पास रखकर बाद में कमर्शियल फायदा उठाते थे। इस फैसले के बाद ऐसी प्रैक्टिस पर लगाम लगेगी।यह फैसला पूरे महाराष्ट्र की हजारों हाउसिंग सोसाइटीज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर तेजी से शहरीकरण हो रहे इलाकों (पुणे, मुंबई, थाने, नवी मुंबई आदि) में। अब फ्लैट खरीदारों को सिर्फ दीवारों का मालिक नहीं, बल्कि पूरे कॉम्प्लेक्स का सच्चा मालिक माना जाएगा।

HousingSocietySolutions सलाह:अगर आपकी सोसाइटी अभी भी Deemed Conveyance के लिए संघर्ष कर रही है तो इस हाईकोर्ट फैसले का हवाला देते हुए आवेदन करें।

ओपन स्पेस, पार्किंग और Amenities पर बिल्डर का कोई दावा हो तो तुरंत चैलेंज करें।

सोसाइटी के सभी सदस्य एकजुट रहें — यूनिटी ही सबसे बड़ी ताकत है।

नोट: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। कानूनी सलाह के लिए किसी वकील या विशेषज्ञ से संपर्क करें।




MahaRera की बड़ी कार्रवाई: Mumbai और आसपास के 8212 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को शो-कॉज नोटिस, Homebuyers की जानकारी छिपाने पर चेतावनी, HousingSocietySolutions की सलाह

महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) ने राज्य भर के 8212 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को जनवरी-मार्च तिमाही की अनिवार्य प्रोग्रेस रिपो...