शुक्रवार, 8 मई 2026

महाराष्ट्र कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी फ्लैट ओनर्स और सीनियर सिटीजन के लिए जरूरी खबर: अब ₹100 में विल रजिस्ट्रेशन, कैसे उठाएं फायदा HousingSocietySolutions, Estate Planning Maharashtra, Will

महाराष्ट्र सरकार ने विल रजिस्ट्रेशन को ₹100 तक सीमित कर दिया है। अब किसी भी 517 सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में कहीं भी रजिस्टर कर सकते हैं। हाउसिंग सोसाइटी के फ्लैट मालिकों, सीनियर सिटीजन और रिटायर्ड लोगों के लिए जरूरी जानकारी।

महाराष्ट्र में ₹100 में विल रजिस्ट्रेशन:

 हाउसिंग सोसाइटी सदस्यों के लिए बड़ी राहत

हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए अच्छी खबर है। महाराष्ट्र सरकार ने विल (Will) रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को बहुत आसान और सस्ता बना दिया है। अब राज्य के किसी भी 517 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में ₹100 की नॉमिनल फीस देकर विल रजिस्टर कर सकते हैं। पहले क्षेत्रीय सीमा की वजह से परेशानी होती थी, अब वह भी खत्म हो गई है।

HousingSocietySolutions के पाठकों के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि सोसाइटी के फ्लैट/शेयर्स के ट्रांसफर में उत्तराधिकार विवाद सबसे ज्यादा होते हैं।

महाराष्ट्र सरकार का नया नियम क्या है?

किसी भी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में विल रजिस्ट्रेशन संभव।

फीस सिर्फ ₹100 (कोई स्टांप ड्यूटी नहीं)।

विल को 4 महीने की समय सीमा से छूट (अन्य दस्तावेजों के विपरीत)।

सील्ड विल की सुविधा भी उपलब्ध – गोपनीयता के लिए।

रजिस्ट्रेशन जीवनकाल में कभी भी कर सकते हैं।

यह सुविधा Section 18 of the Registration Act, 1908 के तहत पहले से वैकल्पिक थी, लेकिन अब इसे और आसान बना दिया गया है।

हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों को क्यों तुरंत एक्शन लेना चाहिए?कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में फ्लैट का शेयर, फ्लैट नंबर और संबंधित एसेट्स का उत्तराधिकार बिना साफ विल के बहुत जटिल हो जाता है।

 विशेष रूप से फायदेमंद इनके लिए:

सीनियर सिटीजन और रिटायर्ड व्यक्ति जिनके पास स्व-अर्जित फ्लैट है।

मुम्बई, पुणे, ठाणे, नागपुर आदि शहरों की सोसाइटियों के सदस्य।

दूसरी शादी वाले या ब्लेंडेड फैमिली वाले लोग।

विशेष जरूरत वाले आश्रित (डिपेंडेंट) को संपत्ति देने वाले।

NRI सदस्य जो भारत आकर आसानी से रजिस्टर कर सकते हैं।

वकीलों के अनुसार, रजिस्टर्ड विल से उत्तराधिकार विवाद बहुत कम होते हैं और सोसाइटी में नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

विल कैसे बनाएं? –

 जरूरी टिप्स (Housing Society Members के लिए)स्पष्ट विवरण दें – “मेरा फ्लैट बेटे को” न लिखें। पूरा फ्लैट नंबर, सोसाइटी का नाम, पता, शेयर सर्टिफिकेट नंबर आदि लिखें।

दो स्वतंत्र गवाह (जो लाभार्थी न हों)।

एक्जीक्यूटर (वसीयत को अमल में लाने वाला) नामित करें, साथ में अल्टरनेट भी।

हर पेज पर हस्ताक्षर।

पुरानी विल को रद्द करने का स्पष्ट उल्लेख।

जीवन के बड़े बदलाव (शादी, तलाक, नया बच्चा) के बाद विल अपडेट करें।

सलाह: 

वकील या कानूनी विशेषज्ञ की मदद लें ताकि विल मजबूत और विवाद-मुक्त बने।सील्ड विल क्या है?आप विल को सील्ड कवर में डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार के पास जमा कर सकते हैं। ₹100 फीस में जमा और निकासी दोनों संभव। मृत्यु के बाद आवेदन पर खोला जा सकता है। यह गोपनीयता चाहने वालों के लिए अच्छा विकल्प है।

विल रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है? (भले ही कानूनी रूप से अनिवार्य न हो)रजिस्टर्ड विल की प्रामाणिकता ज्यादा मानी जाती है।

कोर्ट में आसानी से साबित होता है।

परिवार में झगड़े कम होते हैं।

सोसाइटी में शेयर ट्रांसफर सुगम।

नोट: 

अनरजिस्टर्ड विल भी वैध है, लेकिन रजिस्टर्ड विल ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।निष्कर्ष: अब देरी न करेंमहाराष्ट्र सरकार की यह पहल एस्टेट प्लानिंग को आम नागरिकों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम है। हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों के लिए यह सोने पर सुहागा है। ₹100 और थोड़ी सी मेहनत से आप अपने परिवार को भविष्य के झगड़ों से बचा सकते हैं।

HousingSocietySolutions की सलाह: 

आज ही अपने वकील से संपर्क करें और विल तैयार करवाएं। सीनियर सिटीजन जल्द से जल्द इस सुविधा का लाभ लें।

कीवर्ड्स: महाराष्ट्र विल रजिस्ट्रेशन, ₹100 विल, हाउसिंग सोसाइटी उत्तराधिकार, सीनियर सिटीजन वसीयत, कोऑपरेटिव सोसाइटी फ्लैट ट्रांसफर, 




मंगलवार, 5 मई 2026

MahaRera की बड़ी कार्रवाई: Mumbai और आसपास के 8212 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को शो-कॉज नोटिस, Homebuyers की जानकारी छिपाने पर चेतावनी, HousingSocietySolutions की सलाह



महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) ने राज्य भर के 8212 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को जनवरी-मार्च तिमाही की अनिवार्य प्रोग्रेस रिपोर्ट (Quarterly Progress Report - QPR) न अपलोड करने के लिए शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं। यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।महाराष्ट्र में कुल 33,029 चल रहे रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में से 8,000 से ज्यादा डिफॉल्ट हो गए। ये रिपोर्ट्स फ्लैट्स की बिक्री संख्या, खर्च, निर्माण प्रगति और प्लान में किसी भी बदलाव की जानकारी देती हैं। इनकी अनुपलब्धता होमबायर्स को प्रोजेक्ट की सच्ची स्थिति जानने से वंचित करती है।महारेरा ने दी 60 दिनों की मोहलतडेवलपर्स को लंबित रिपोर्ट जमा करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। अगर इस अवधि में रिपोर्ट नहीं अपलोड की गई तो महारेरा सख्त कार्रवाई करेगा, जिसमें शामिल हैं:

प्रोजेक्ट बैंक अकाउंट्स फ्रीज करना

रजिस्ट्रेशन सस्पेंड या रद्द करना

विज्ञापन और मार्केटिंग पर रोक

सेल एग्रीमेंट रजिस्टर करने पर प्रतिबंध

₹50,000 तक का जुर्माना

महारेरा चेयरमैन मनोज सौनिक ने कहा, “डेवलपर्स को डिस्क्लोजर नॉर्म्स का पालन करना चाहिए। बार-बार फॉलो-अप के बावजूद रिपोर्ट न अपडेट करने पर हम रजिस्ट्रेशन रद्द करने या सस्पेंड करने में नहीं हिचकिचाएंगे।”क्षेत्रवार डिफॉल्ट प्रोजेक्ट्स की संख्या

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) + कोकण: 4,644 (सबसे ज्यादा)

ठाणे: 1,475

मुंबई सबअर्बन: 1,263

रायगढ़: 842

पालघर: 612

मुंबई सिटी: 267

पुणे रीजन: 2,311 (पुणे जिले में अकेले 1,957)

खानदेश: 511

विदर्भ: 483

मराठवाड़ा: 238

अन्य: दादरा और नगर हवेली (18), दमन (7)


क्यों जरूरी हैं ये रिपोर्ट्स?

RERA कानून के तहत ये रिपोर्ट्स अनिवार्य हैं। इनसे होमबायर्स प्रोजेक्ट की प्रगति, फाइनेंशियल हेल्थ और टाइमलाइन ट्रैक कर सकते हैं। महारेरा का कहना है कि सख्ती से अनुपालन बढ़ाने और खरीदारों का विश्वास बहाल करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

HousingSocietySolutions की सलाह:

होमबायर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश से पहले MahaRERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट की QPR, रजिस्ट्रेशन स्टेटस और कंप्लायंस चेक जरूर करें। डेवलपर्स के लिए भी यह चेतावनी है कि अनुपालन न करने की कीमत अब बहुत भारी पड़ सकती है।

यह कार्रवाई रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो खासकर मुंबई और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहा है।


सोमवार, 4 मई 2026

Housing Society में रहने वालों के लिए हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों को ही खाली जमीन पर अधिकार, बिल्डरों का खेल खत्म

  

हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों के लिए राहत भरी खबर है। महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कहा है कि सोसाइटी के सदस्यों को सिर्फ बिल्डिंग पर ही नहीं, बल्कि पूरे लेआउट की खाली जमीन (vacant land), ओपन स्पेस, पार्किंग एरिया और रिक्रिएशनल ग्राउंड पर भी अधिकार है। बिल्डर केवल बिल्डिंग का हिस्सा देकर बाकी मूल्यवान जमीन पर कब्जा नहीं रख सकते।

मामला क्या था?भयंदर (Bhayander) की एक कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी ने डिस्ट्रिक्ट डिप्टी रजिस्ट्रार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। रजिस्ट्रार ने सोसाइटी को केवल बिल्डिंग के नीचे की जमीन का कन्वेयेंस देने का आदेश दिया था, जबकि बाकी खाली जमीन और सुविधाओं को बाहर रख दिया गया था।

Justice Amit Borkar की सिंगल बेंच ने इस आदेश को रद्द कर दिया और सोसाइटी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने Maharashtra Ownership of Flats Act (MOFA) का हवाला देते हुए कहा कि कानून का मकसद घर खरीदने वालों के हितों की रक्षा करना है।कोर्ट के मुख्य 관찰 (Key Highlights):Deemed Conveyance केवल बिल्डिंग तक सीमित नहीं है। इसमें पार्किंग, इंटरनल रोड्स, ओपन स्पेस और रिक्रिएशनल एरिया भी शामिल हैं।

बिल्डर पूरे लेआउट का कन्वेयेंस करने के लिए बाध्य हैं।

बड़े लेआउट में कई सोसाइटी होने पर सभी को ओपन स्पेस पर proportionate rights मिलेंगे।

कोर्ट ने अधिकारियों को 8 हफ्तों के अंदर संशोधित Deemed Conveyance Certificate जारी करने का निर्देश दिया।

सोसाइटीज के लिए क्यों है यह फैसला गेम-चेंजर?

कई बिल्डर पुरानी ट्रिक अपनाते थे — बिल्डिंग बेच देते थे और आस-पास की खाली जमीन, पार्किंग या गार्डन को अपने पास रखकर बाद में कमर्शियल फायदा उठाते थे। इस फैसले के बाद ऐसी प्रैक्टिस पर लगाम लगेगी।यह फैसला पूरे महाराष्ट्र की हजारों हाउसिंग सोसाइटीज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर तेजी से शहरीकरण हो रहे इलाकों (पुणे, मुंबई, थाने, नवी मुंबई आदि) में। अब फ्लैट खरीदारों को सिर्फ दीवारों का मालिक नहीं, बल्कि पूरे कॉम्प्लेक्स का सच्चा मालिक माना जाएगा।

HousingSocietySolutions सलाह:अगर आपकी सोसाइटी अभी भी Deemed Conveyance के लिए संघर्ष कर रही है तो इस हाईकोर्ट फैसले का हवाला देते हुए आवेदन करें।

ओपन स्पेस, पार्किंग और Amenities पर बिल्डर का कोई दावा हो तो तुरंत चैलेंज करें।

सोसाइटी के सभी सदस्य एकजुट रहें — यूनिटी ही सबसे बड़ी ताकत है।

नोट: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। कानूनी सलाह के लिए किसी वकील या विशेषज्ञ से संपर्क करें।




सोमवार, 27 अप्रैल 2026

ज़हर खाता पीता है इंडिया...

 ज़हर खाता पीता है इंडिया... 

दिल्ली

फर्जी Sensodyne टूथपेस्ट फैक्ट्री: 1,800 भरे हुए ट्यूब, 10,000 खाली ट्यूब, 1,200 पैक किए गए यूनिट और 130 किलो कच्चा माल जब्त।

फर्जी Eno सैशे: 1 लाख जब्त।

फर्जी Nescafé सैशे: 50,000 जब्त।

अयोध्या

फर्जी Fortune तेल के 500 कार्टन जब्त। घटिया क्वालिटी का तेल ब्रांडेड कंटेनर में रिपैक करके बेचा जा रहा था।

हरियाणा

260 फर्जी Mounjaro ड्रग पेन जब्त। डायबिटीज की जरूरी दवा का नकली वर्जन।

मेरठ

अवैध यूनिट से 2,800 किलो केमिकल पनीर जब्त।

सूरत

2,000 किलो फर्जी घी जब्त, जिसकी कीमत लगभग 14 लाख रुपये है। यह फैक्ट्री पिछले दो साल से चल रही थी।


हैदराबाद

200 किलो आर्टिफिशियल तरीके से पकाए गए आम जब्त। एक फल व्यापारी गिरफ्तार।

ये सारी घटनाएँ पिछले 1 महीने में हुई हैं......


शनिवार, 25 अप्रैल 2026

बेंगलुरु में अब ऑनलाइन डाउनलोड करें e-Khata | 13 लाख प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स बिना ऑफिस गए मिलेंगे

बेंगलुरु के प्रॉपर्टी ओनर्स के लिए अच्छी खबर! अब SAS Property Tax ID से e-Khata ऑनलाइन डाउनलोड करें। 13 लाख e-Khata तुरंत उपलब्ध। 

स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस, लिंक और फायदे जानें।

बेंगलुरु में e-Khata अब घर बैठे डाउनलोड करें – 13 लाख प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स ऑनलाइन उपलब्धबेंगलुरु के प्रॉपर्टी मालिकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। Greater Bengaluru Authority (GBA) ने अब e-Khata को पूरी तरह ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत लगभग 13 लाख प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स तुरंत डाउनलोड किए जा सकते हैं।इससे पहले प्रॉपर्टी ओनर्स को e-Khata निकालने या करेक्ट कराने के लिए BBMP या अन्य सिटी कॉर्पोरेशन के ऑफिस बार-बार जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय और परेशानी होती थी। अब यह प्रक्रिया काफी सरल और तेज हो गई है।

e-Khata क्या है?

e-Khata प्रॉपर्टी का डिजिटल रिकॉर्ड है, जिसमें प्रॉपर्टी का पूरा विवरण, मालिक का नाम, टैक्स डिटेल्स और अन्य जरूरी जानकारी होती है। यह पारंपरिक खाता (Khata) का इलेक्ट्रॉनिक वर्जन है। बेंगलुरु में प्रॉपर्टी बेचने-खरीदने, लोन लेने, नाम ट्रांसफर या किसी भी सरकारी काम के लिए e-Khata बहुत जरूरी दस्तावेज माना जाता है।

कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?

यह नई सुविधा Greater Bengaluru Area के अंतर्गत आने वाले सभी पाँच बेंगलुरु सिटी कॉर्पोरेशन्स (BBMP के पुनर्गठित क्षेत्र) में लागू की गई है।e-Khata ऑनलाइन डाउनलोड कैसे करें? (Step-by-Step Guide)ऑफिशियल पोर्टल पर जाएँ

https://BBMPeAasthi.karnataka.gov.in पर विजिट करें।

मोबाइल नंबर से लॉगिन करें

अपना मोबाइल नंबर डालें और OTP से वेरिफाई करें।

SAS Application Property Tax ID डालें

अपने प्रॉपर्टी का SAS Property Tax ID एंटर करें। (यह ID आपको प्रॉपर्टी टैक्स रसीद या पुराने दस्तावेजों में मिल जाएगी)।

डिटेल्स वेरिफाई करें और Download करें।

पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। कोई ऑफिस जाने या मध्यस्थों की जरूरत नहीं पड़ेगी।इस नई सुविधा के मुख्य फायदेसमय की बचत — ऑफिस जाने, लाइन लगाने और बार-बार फॉलो-अप करने की जरूरत खत्म।

रेड टेप कम — मध्यस्थों (middlemen) और अनावश्यक देरी से मुक्ति।

तुरंत उपलब्धता — 13 लाख e-Khata अब तुरंत डाउनलोड हो सकते हैं।

पारदर्शिता — प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स डिजिटल होने से गड़बड़ियों की संभावना कम।

सुविधा — 24×7 घर बैठे या कहीं भी मोबाइल/कंप्यूटर से एक्सेस।

Greater Bengaluru Authority के चीफ कमिश्नर IAS M. Maheshwar Rao ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि डिप्टी चीफ मिनिस्टर DK Shivakumar के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की गई है ताकि नागरिकों को आसानी हो और अनावश्यक कागजी कार्यवाही कम हो।ध्यान देने योग्य बातेंआपके प्रॉपर्टी का SAS Property Tax ID सही होना चाहिए।

अगर आपका e-Khata अभी ड्राफ्ट स्टेज में है या कुछ पेंडिंग काम बाकी है, तो पहले उसे पूरा करवाएँ।

हेल्पलाइन नंबर: GBA e-Khata हेल्पलाइन – 9480683695 (जरूरत पड़ने पर संपर्क करें)।

HousingSocietySolutions की सलाह

प्रॉपर्टी ओनर्स को सलाह है कि जितनी जल्दी हो सके अपना e-Khata डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें। भविष्य में प्रॉपर्टी से जुड़े किसी भी काम (बिक्री, लोन, उत्तराधिकार आदि) में यह दस्तावेज बहुत काम आएगा। अगर आप सोसाइटी मैनेजमेंट या प्रॉपर्टी मैनेजमेंट से जुड़े हैं, तो अपने रेसिडेंट्स को इस सुविधा के बारे में जागरूक करें।

क्या आपका e-Khata अभी डाउनलोड हो गया? अपना अनुभव कमेंट में जरूर शेयर करें।




सोमवार, 13 अप्रैल 2026

कल्याण बिरला वान्या सोसाइटी में रखरखाव शुल्क दुरुपयोग का आरोप: निवासियों का शांतिपूर्ण सत्याग्रह, CA ऑडिट की मांग

कल्याण की बिरला वान्या सोसाइटी में रखरखाव शुल्क के कथित दुरुपयोग पर निवासियों का शांत प्रदर्शन – पारदर्शिता की मांगमुंबई/कल्याण, 13 अप्रैल 2026 – ठाणे जिले के कल्याण पश्चिम में खड़कपाड़ा स्थित बिरला वान्या हाउसिंग प्रोजेक्ट के निवासियों ने 11 अप्रैल 2026 को सोसाइटी परिसर में शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया। उन्होंने डेवलपर द्वारा रखरखाव शुल्क (मेंटेनेंस चार्जेस) के कथित दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।निवासियों का मुख्य आरोप है कि 24 महीने का एडवांस मेंटेनेंस जमा कराया गया था, लेकिन वह धन मात्र 14 महीनों में ही खत्म हो गया। इस दौरान न तो चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा प्रमाणित ऑडिट रिपोर्ट दी गई और न ही खर्चों का विस्तृत ब्यौरा साझा किया गया।

निवासियों की मांगें

रखरखाव फंड का CA सर्टिफाइड ऑडिट कराया जाए

सभी खर्चों का पूर्ण ब्रेकअप दिया जाए

पारदर्शिता सुनिश्चित होने तक आगे कोई अतिरिक्त चार्ज न लगाया जाए

एक निवासी (नाम गोपनीय) ने कहा,  “हम भुगतान करने से इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह जानना हमारा अधिकार है कि हमारा पैसा कहाँ खर्च हो रहा है।”

डेवलपर का जवाब

बिरला वान्या के नेशनल सेल्स हेड अंकित अग्रवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निवासियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था, जिसे अब वापस ले लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि  “शनिवार को सभी सदस्यों के साथ बैठक कर मुद्दे का समाधान किया जाएगा।”

आगे की कार्रवाई

निवासियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) का रुख करेंगे।

कानूनी पक्ष (RERA नियम)

बिल्डर को रखरखाव फंड का CA प्रमाणित स्टेटमेंट देना अनिवार्य है।

मेंटेनेंस फंड को बिल्डर के अन्य बिजनेस अकाउंट में नहीं मिलाया जा सकता।

सोसाइटी का गठन निर्धारित समयसीमा में करना जरूरी है।

यह घटना मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में बिल्डरों और होमबायर्स के बीच बढ़ते विवादों की एक और मिसाल है, जहाँ रखरखाव शुल्क, फंड के उपयोग और पारदर्शिता को लेकर अक्सर शिकायतें आती रहती हैं।

निवासियों के लिए सलाह (हाउसिंग सोसाइटी सॉल्यूशंस के नजरिए से):

हमेशा लिखित में शिकायत दर्ज करें, पुलिस को पूर्व सूचना दें (जैसा इन निवासियों ने किया), और RERA या सहकारी विभाग से मदद लें। सोसाइटी गठन के बाद मेंटेनेंस फंड का ऑडिट सालाना अनिवार्य रूप से करवाएं।

स्रोत: मिड-डे न्यूज (13 अप्रैल 2026)

टैग्स: कल्याण हाउसिंग सोसाइटी, रखरखाव शुल्क दुरुपयोग, बिरला वान्या कल्याण, RERA नियम, मेंटेनेंस ऑडिट


रविवार, 12 अप्रैल 2026

UP RERA नए नियम: संपत्ति ट्रांसफर अब सिर्फ ₹1000 में, अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट पर भी शिकायत - होमबायर्स के लिए बड़ी राहत | Housing Society Solutions

UP-Rera के नए नियमों से प्रॉपर्टी ट्रांसफर आसान और सस्ता हो गया है। फैमिली में ट्रांसफर पर ₹1000, नॉन-फैमिली पर ₹25,000 तक फीस। अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट पर भी अब शिकायत दर्ज कराएं। पूरी डिटेल्स पढ़ें।



UP RERA नई नियम: संपत्ति ट्रांसफर अब सिर्फ ₹1000 में, अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट पर भी शिकायत - होमबायर्स के लिए बड़ी राहतउत्तर प्रदेश के होमबायर्स और प्रॉपर्टी ओनर्स के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP-RERA) ने हाल ही में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जो संपत्ति ट्रांसफर को आसान, सस्ता और पारदर्शी बनाते हैं। साथ ही, अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले खरीदारों को भी अब मजबूत कानूनी सुरक्षा मिल गई है।


ये संशोधन 25 मार्च 2026 से लागू हो चुके हैं।

1. अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स पर अब शिकायत दर्ज करा सकते हैंपहले रेरा रजिस्टर्ड नहीं होने वाले प्रोजेक्ट्स में खरीदारों की शिकायतें अटक जाती थीं। डेवलपर रेरा के दायरे से बाहर हो जाते थे। अब नया नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स के खिलाफ भी UP-RERA में शिकायत की जा सकती है।UP-RERA इस बात की जांच करेगा कि प्रोजेक्ट को रजिस्टर होना चाहिए था या नहीं।

अगर डेवलपर ने नियम तोड़ा तो उस पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई हो सकती है।

यह बदलाव उन खरीदारों के लिए बड़ी राहत है जो बिना रेरा रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट में फंस गए थे।

2. संपत्ति ट्रांसफर पर फीस की सीमा तयडेवलपर्स पहले मनमानी ट्रांसफर फीस वसूलते थे। अब UP-RERA ने दो स्पष्ट कैटेगरी में कैप लगा दी है:मृत्यु के बाद फैमिली मेंबर्स को ट्रांसफर:

अधिकतम प्रोसेसिंग फीस ₹1,000 ही ली जा सकेगी।

जरूरी दस्तावेज: डेथ सर्टिफिकेट, सक्सेशन सर्टिफिकेट, अन्य वारिसों का NOC।

नॉन-फैमिली मेंबर्स (बाहरी व्यक्ति) को ट्रांसफर:

अधिकतम प्रोसेसिंग फीस ₹25,000।

यह नियम विरासत, गिफ्ट या सेल दोनों मामलों में लागू होता है।

3. नया एग्रीमेंट बनाने की जरूरत खत्मट्रांसफर के समय अब नया Agreement for Sale बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पुराने एग्रीमेंट में ही एंडोर्समेंट (endorsement) कर अपडेट किया जाएगा। इससे समय, खर्चा और पेपरवर्क दोनों बचेंगे।इन बदलावों का होमबायर्स पर क्या असर?पैसे की बचत: पहले लाखों रुपये ट्रांसफर चार्ज में चले जाते थे, अब अधिकतम 25 हजार।

कानूनी सुरक्षा: अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट में भी आवाज उठा सकते हैं।

प्रक्रिया आसान: कम कागजी कार्रवाई, तेज प्रोसेस।

डेवलपर्स पर अंकुश: मनमानी फीस और रजिस्ट्रेशन से बचने की कोशिश अब मुश्किल।

नोट: ये नियम पूरे उत्तर प्रदेश में लागू हैं – नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद, गुरुग्राम बॉर्डर एरिया सहित सभी जगह।क्या करें अगर आपकी प्रॉपर्टी ट्रांसफर करनी है?जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।

बिल्डर/प्रोमोटर से लिखित में ₹1,000 या ₹25,000 फीस का अनुरोध करें।

अगर ज्यादा फीस मांगी जाए तो UP-RERA में शिकायत करें।

Housing Society Solutions की सलाह: 

हर होमबायर को RERA नियमों की जानकारी होनी चाहिए। प्रॉपर्टी खरीदते या ट्रांसफर करते समय हमेशा लिखित रिकॉर्ड रखें और जरूरत पड़ने पर अथॉरिटी से संपर्क करें।

Tags: UP RERA New Rules 2026, Property Transfer Charges UP, RERA Unregistered Project Complaint, Uttar Pradesh Real Estate, Homebuyers Rights, Property Succession RulesShare this post on your housing society WhatsApp groups and Facebook pages to spread awareness among other residents.

अगर आपके कोई सवाल हों या अपनी सोसाइटी/प्रोजेक्ट का कोई अनुभव शेयर करना चाहें तो कमेंट करें। हम आपकी मदद करेंगे! 

(स्रोत: LiveMint, Business Standard और आधिकारिक UP-RERA अपडेट्स के आधार पर)


शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

भाई-बहन संपत्ति बांटने से मना करे तो क्या करें? परिवार की संपत्ति में अपना हिस्सा पाने का पूरा कानूनी तरीका l beyourmoneymanager I Property I Partition Suit I

भाई या बहन परिवार की संपत्ति बांटने को तैयार नहीं? कानूनी नोटिस, मध्यस्थता और विभाजन मुकदमा (Partition Suit) के जरिए अपना हक कैसे हासिल करें। विस्तृत गाइड।परिवार की संपत्ति में अपना हिस्सा पाएं, भले ही भाई-बहन सहयोग न करें

भारतीय कानून स्पष्ट है — परिवार की संपत्ति में कोई एक व्यक्ति दूसरे के हक को हमेशा के लिए रोक नहीं सकता। अगर आपके भाई या बहन संपत्ति बांटने से इनकार कर रहे हैं, तो भी आप कानूनी रूप से अपना हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं। इस लेख में हम विस्तार से बताएंगे कि क्या कदम उठाएं, किन दस्तावेजों की जरूरत है और कोर्ट में क्या होता है।

1. कानून के अनुसार कोई एक भाई-बहन संपत्ति को बंधक नहीं बना सकता 

भारतीय कानून के तहत हर कानूनी वारिस (legal heir) को अपनी संपत्ति का हिस्सा पाने का अधिकार है। एक सह-मालिक (co-owner) अकेले पूरे परिवार को रोक नहीं सकता। आप अकेले भी कार्रवाई कर सकते हैं।

अदालत आपके हक की रक्षा करेगी।

कोई भी सह-मालिक बिना सबकी सहमति के पूरी संपत्ति नहीं बेच सकता।


2. सबसे पहले कानूनी नोटिस भेजें (Legal Notice)कोर्ट जाने से पहले यह सबसे महत्वपूर्ण और सस्ता कदम है। कैसे करें:अच्छे वकील की मदद से नोटिस तैयार करवाएं।

नोटिस में अपनी हिस्सेदारी, संपत्ति का पूरा विवरण और बंटवारे की मांग स्पष्ट लिखें।

15-30 दिनों का समय दें।

रजिस्टर्ड पोस्ट या स्पीड पोस्ट से भेजें और डिलीवरी का प्रमाण रखें।


अक्सर नोटिस मिलने के बाद ही विरोधी पक्ष समझौते के लिए तैयार हो जाता है।3. विभाजन मुकदमा (Partition Suit) दायर करेंअगर नोटिस का कोई जवाब न आए या सहयोग न मिले, तो सिविल कोर्ट में Partition Suit दायर कर सकते हैं। किसी भी सह-मालिक को दूसरे की अनुमति की जरूरत नहीं।


अदालत संपत्ति का बंटवारा करेगी।


दो संभावित परिणाम:भौतिक विभाजन (Physical Partition): संपत्ति को नाप-जोख कर अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है।

बिक्री का आदेश: अगर संपत्ति छोटी है या बांटना संभव नहीं, तो अदालत बिक्री का आदेश दे सकती है और पैसे बराबर बांटे जाते हैं।


जरूरी दस्तावेज:संपत्ति का टाइटल डीड

वारिस प्रमाण-पत्र (Heirship Certificate)

प्रॉपर्टी टैक्स रसीदें

पहचान प्रमाण (आधार, पैन आदि)


4. कोर्ट जाने से पहले मध्यस्थता (Mediation) का विकल्प आजमाएंकोर्ट की प्रक्रिया लंबी और महंगी होती है। इसलिए पहले Mediation जरूर ट्राई करें।Mediation के फायदे:कुछ हफ्तों में निपटारा

कम खर्च

गोपनीय प्रक्रिया

परिवार के रिश्ते बचते हैं


Partition Suit की तुलना में mediation बहुत बेहतर विकल्प है।


5. अवैध बिक्री रोकने के लिए इंजंक्शन (Injunction) लेंअगर आपको शक है कि भाई-बहन संपत्ति बेचने की कोशिश कर रहे हैं, तो तुरंत कोर्ट से Interim Injunction मांगें। इससे संपत्ति पर रोक लग जाती है।बिना सभी सह-मालिकों की सहमति के बिक्री अवैध मानी जाती है।

Partition Act 1893 के तहत आप बेचने वाले पक्ष की हिस्सेदारी भी बाजार मूल्य पर खरीद सकते हैं।


6. पूर्वज संपत्ति (Ancestral) vs स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired) समझेंAncestral Property: जन्म से अधिकार, 2005 के Hindu Succession Amendment के बाद बेटियां भी बराबर की हकदार। वसीयत से पूरी तरह छीन नहीं जा सकती।

Self-Acquired Property: मालिक अपनी मर्जी से वसीयत कर सकता है। अगर वसीयत नहीं तो Class I वारिसों (बेटा, बेटी, विधवा) में बराबर बंटती है।

एक बार विभाजन (Partition) हो जाने के बाद हर हिस्सा स्वतंत्र हो जाता है और मालिक उसे बेच या ट्रांसफर कर सकता है।

7. 5-स्टेप एक्शन प्लान – अभी शुरू करें सभी दस्तावेज इकट्ठा करें (टाइटल डीड, वारिस प्रमाण-पत्र, टैक्स रसीदें)।

वकील के जरिए कानूनी नोटिस भेजें।

मध्यस्थता (Mediation) का प्रयास करें।

अगर जरूरी हो तो Partition Suit दायर करें।

अवैध बिक्री का खतरा हो तो Injunction के लिए अर्जी दें।

महत्वपूर्ण सलाह:

प्रक्रिया शुरू करने में देरी न करें। जितनी देर होगी, मामला उतना जटिल हो सकता है। हमेशा अनुभवी प्रॉपर्टी वकील से सलाह लें क्योंकि हर केस के तथ्य अलग-अलग हो सकते हैं।

निष्कर्ष:

भारतीय कानून आपको अपने हक की पूरी सुरक्षा देता है। सही कदमों से आप बिना किसी के सहयोग के भी परिवार की संपत्ति में अपना उचित हिस्सा पा सकते हैं।

नोट: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। वास्तविक मामलों में पेशेवर कानूनी सलाह अवश्य लें।

सोमवार, 6 अप्रैल 2026

AC का पानी बिल्डिंग को खोखला कर रहा है? बचाव के आसान उपाय | Housing Society Solutions

हाउसिंग सोसाइटी की बिल्डिंग की दीवारें, पेंट और प्लास्टर AC के वेस्ट वॉटर से खराब हो रहे हैं? इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए देखिए यह वीडियो। इस वीडियो में जानिए:

• AC के condensate water से बिल्डिंग को कितना नुकसान होता है
• दीवारों, बालकनी और नीचे की मंजिलों पर पड़ने वाले असर
• सबसे प्रभावी Drainage Solution, PVC Pipe, Gutter & Slope Techniques
• सोसाइटी में लागू करने योग्य Low-Cost & Long-Lasting समाधान 
अगर आप Housing Society का Secretary, Chairman या घर मालिक हैं तो यह वीडियो आपके लिए बहुत जरूरी है।   वीडियो को Like करें, Share करें और चैनल को Subscribe जरूर करें ताकि Housing Society की हर समस्या का समाधान आपको मिलता रहे।
#HousingSocietySolutions Comment में बताएं आपकी सोसाइटी में AC water drainage की क्या समस्या है?





शनिवार, 4 अप्रैल 2026

मालिक की मौत के बाद संपत्ति को कानूनी लड़ाई से बचाएं: वारिसों को तुरंत उठाने चाहिए ये 7 जरूरी कदम | Property Inheritance Guide 2026


मालिक की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद से बचने के लिए वारिस क्या करें? वसीयत, म्यूटेशन, लीगल हेयर सर्टिफिकेट, पार्टिशन डीड सहित पूरी प्रक्रिया विस्तार से जानें। कानूनी विशेषज्ञों की सलाह।मालिक की मौत के बाद संपत्ति को कानूनी लड़ाई से बचाएं: वारिसों को तुरंत उठाने चाहिए ये जरूरी कदमभारत में संपत्ति विवाद सबसे ज्यादा लंबे चलने वाले केसों में शामिल हैं। 

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हजारों ऐसे मामले पेंडिंग हैं जो आसानी से टाले जा सकते थे, अगर वारिसों ने समय पर सही कदम उठाए होते। मालिक की मौत के बाद परिवार को तुरंत कुछ जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी चाहिए, ताकि संपत्ति विवाद की भेंट न चढ़े।यह लेख विशेष रूप से उन परिवारों के लिए है जिनके पास घर, प्लॉट, फ्लैट या कृषि भूमि है।


1. सबसे पहले चेक करें – क्या मृतक ने वसीयत (Will) छोड़ी है?अगर वसीयत है तो सबसे पहले उसे सुरक्षित रखें।

वसीयत को प्रोबेट (Probate) करवाना बेहतर है, भले ही कुछ राज्यों में अब यह वैकल्पिक हो गया हो। इससे कानूनी वैधता मजबूत होती है।

अगर वसीयत नहीं है (Intestate Death) तो हिंदू सक्सेशन एक्ट 1956, मुस्लिम पर्सनल लॉ या अन्य लागू कानून के अनुसार लीगल वारिस तय करें।


जरूरी: 

सभी वारिसों को शामिल करें। 

एक भी वारिस छूट गया तो भविष्य में सारे ट्रांजेक्शन अमान्य हो सकते हैं।


2. लीगल हेयर सर्टिफिकेट (Legal Heir Certificate) प्राप्त करें

तहसीलदार या SDM कार्यालय से लीगल हेयर सर्टिफिकेट निकलवाएं।

इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, आधार, जन्म प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज लगेंगे।

यह सर्टिफिकेट बैंक अकाउंट, बीमा, पेंशन और संपत्ति के नाम ट्रांसफर के लिए बहुत जरूरी है।


3. संपत्ति के रिकॉर्ड अपडेट करवाएं (Mutation + 7/12 Extract) म्यूटेशन (नामांतरण) करवाना बहुत महत्वपूर्ण है:

7/12 उतारा (ग्रामीण संपत्ति)

प्रॉपर्टी कार्ड / म्यूनिसिपल रिकॉर्ड (शहरी संपत्ति)

खाता-खतौनी, नामांतरण एंट्री


ध्यान दें: म्यूटेशन से टाइटल नहीं बदलता, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मान्यता मिलती है। बिना म्यूटेशन के आप संपत्ति बेच या गिरवी नहीं रख सकते।


4. संपत्ति की प्रकृति समझें (Self-acquired, Ancestral, Leasehold आदि)संपत्ति किस प्रकार की है, यह जानना बहुत जरूरी है:

संपत्ति का प्रकार

खास बातें

स्व-अर्जित (Self-acquired)

वसीयत से पूरी आजादी

Ancestral Property

कोपार्सनरी अधिकार, बंटवारा जटिल

Leasehold / CIDCO / MHADA

अथॉरिटी की अनुमति जरूरी

Freehold

आसान ट्रांसफर


एन्कम्ब्रेंस चेक करें: लोन, चार्ज, लिटिगेशन है या नहीं, यह पता करें।


5. परिवार में लिखित समझौता जरूर करें

मौखिक समझौते कभी न करें।

रजिस्टर्ड पार्टिशन डीड, रिलीज डीड या फैमिली सेटलमेंट जरूर करवाएं।

सभी वारिसों की सहमति से बंटवारा करें और रजिस्टर्ड दस्तावेज बनवाएं।


6. मौत के बाद परिवार संपत्ति में रह सकता है या नहीं?

कोई विवाद न हो → परिवार आराम से रह सकता है।

वसीयत हो → वसीयतधारी मालिक बन जाता है, लेकिन कब्जा देने के लिए कोर्ट जाना पड़ सकता है।

टाइटल डिस्प्यूट → कोर्ट स्टेटस-क्वो बनाए रखता है। जब तक फैसला न हो, मौजूदा कब्जेदारों को आमतौर पर नहीं हटाया जाता।


7. जरूरी दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड रखें

मूल दस्तावेज (टाइटल डीड)

पिछले 30 साल के टैक्स रसीद

यूटिलिटी बिल (बिजली, पानी)

बैंक स्टेटमेंट, इंश्योरेंस आदि


ये दस्तावेज विवाद की स्थिति में सबसे मजबूत सबूत होते हैं।

निष्कर्ष और विशेषज्ञ सलाहसंपत्ति विवाद ज्यादातर दस्तावेजों की कमी, गलतफहमी और मौखिक व्यवस्था की वजह से होता है। समय रहते वसीयत बनवाएं, रिकॉर्ड अपडेट रखें और परिवार में पारदर्शिता बनाए रखें।समय पर म्यूटेशन और कानूनी अनुपालन से आप न सिर्फ समय, पैसे और रिश्तों की बचत कर सकते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी सुरक्षित संपत्ति सौंप सकते हैं।

कीवर्ड: मालिक की मौत के बाद संपत्ति, वारिस क्या करें, प्रॉपर्टी म्यूटेशन, लीगल हेयर सर्टिफिकेट, वसीयत प्रोबेट, संपत्ति बंटवारा, property inheritance after death in India।

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महाराष्ट्र सरकार ने विल रजिस्ट्रेशन को ₹100 तक सीमित कर दिया है। अब किसी भी 517 सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में कहीं भी रजिस्टर कर सकते हैं। हाउसिंग ...