महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) ने राज्य भर के 8212 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को जनवरी-मार्च तिमाही की अनिवार्य प्रोग्रेस रिपोर्ट (Quarterly Progress Report - QPR) न अपलोड करने के लिए शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं। यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।महाराष्ट्र में कुल 33,029 चल रहे रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में से 8,000 से ज्यादा डिफॉल्ट हो गए। ये रिपोर्ट्स फ्लैट्स की बिक्री संख्या, खर्च, निर्माण प्रगति और प्लान में किसी भी बदलाव की जानकारी देती हैं। इनकी अनुपलब्धता होमबायर्स को प्रोजेक्ट की सच्ची स्थिति जानने से वंचित करती है।महारेरा ने दी 60 दिनों की मोहलतडेवलपर्स को लंबित रिपोर्ट जमा करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। अगर इस अवधि में रिपोर्ट नहीं अपलोड की गई तो महारेरा सख्त कार्रवाई करेगा, जिसमें शामिल हैं:
प्रोजेक्ट बैंक अकाउंट्स फ्रीज करना
रजिस्ट्रेशन सस्पेंड या रद्द करना
विज्ञापन और मार्केटिंग पर रोक
सेल एग्रीमेंट रजिस्टर करने पर प्रतिबंध
₹50,000 तक का जुर्माना
महारेरा चेयरमैन मनोज सौनिक ने कहा, “डेवलपर्स को डिस्क्लोजर नॉर्म्स का पालन करना चाहिए। बार-बार फॉलो-अप के बावजूद रिपोर्ट न अपडेट करने पर हम रजिस्ट्रेशन रद्द करने या सस्पेंड करने में नहीं हिचकिचाएंगे।”क्षेत्रवार डिफॉल्ट प्रोजेक्ट्स की संख्या
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) + कोकण: 4,644 (सबसे ज्यादा)
ठाणे: 1,475
मुंबई सबअर्बन: 1,263
रायगढ़: 842
पालघर: 612
मुंबई सिटी: 267
पुणे रीजन: 2,311 (पुणे जिले में अकेले 1,957)
खानदेश: 511
विदर्भ: 483
मराठवाड़ा: 238
अन्य: दादरा और नगर हवेली (18), दमन (7)
क्यों जरूरी हैं ये रिपोर्ट्स?
RERA कानून के तहत ये रिपोर्ट्स अनिवार्य हैं। इनसे होमबायर्स प्रोजेक्ट की प्रगति, फाइनेंशियल हेल्थ और टाइमलाइन ट्रैक कर सकते हैं। महारेरा का कहना है कि सख्ती से अनुपालन बढ़ाने और खरीदारों का विश्वास बहाल करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
HousingSocietySolutions की सलाह:
होमबायर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश से पहले MahaRERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट की QPR, रजिस्ट्रेशन स्टेटस और कंप्लायंस चेक जरूर करें। डेवलपर्स के लिए भी यह चेतावनी है कि अनुपालन न करने की कीमत अब बहुत भारी पड़ सकती है।
यह कार्रवाई रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो खासकर मुंबई और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहा है।
















