शनिवार, 18 जुलाई 2026

हाउसिंग सोसाइटी के लिए महत्वपूर्ण खबर...बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अपार्टमेंट में बालकनी-टेरेस एनक्लोजर और फ्लैट रेनोवेशन पर महाराष्ट्र सरकार को गाइडलाइंस बनाने का आदेश | HousingSocietySolutions

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को अपार्टमेंट फ्लैट्स में बालकनी/टेरेस बंद करने, ग्रिल लगाने और आंतरिक बदलावों के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया। हाउसिंग सोसाइटी में रेनोवेशन नियम, NOC और कानूनी सलाह जानें।

बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्देश: अपार्टमेंट बालकनी-टेरेस एनक्लोजर और फ्लैट रेनोवेशन पर गाइडलाइंस जरूरी

नमस्ते हाउसिंग सोसाइटी सदस्यों और फ्लैट ओनर्स! 

अगर आपकी सोसाइटी में बालकनी को बंद करने, ग्रिल लगाने, शेड बनाने या फ्लैट के अंदर दीवारें हटाने-जोड़ने जैसे काम आम हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 17 जुलाई 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को अपार्टमेंट फ्लैट्स में बालकनी, टेरेस एनक्लोजर और आंतरिक बदलावों (internal alterations) के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने क्यों दिया यह आदेश?

फ्लैट ओनर्स अक्सर अपनी सुविधा के लिए:

बालकनी या टेरेस पर ग्रिल/शेड लगाते हैं

पार्टिशन वॉल्स बदलते या हटाते हैं

अन्य संरचनात्मक बदलाव करते हैं

ये बदलाव बिना किसी स्पष्ट नियम के हो रहे थे, जिससे सुरक्षा, बिल्डिंग स्ट्रक्चर और सोसाइटी के कॉमन एरिया पर असर पड़ता है। कोर्ट ने इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को परमिसिबल अल्टरेशन्स (स्वीकार्य बदलाव) के लिए गाइडलाइंस तैयार करने को कहा। जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने यह फैसला सुनाया।

हाउसिंग सोसाइटी के लिए क्या मायने रखता है?

बालकनी/टेरेस एनक्लोजर: कई लोग बालकनी को लिविंग रूम में शामिल करने या शेड लगाने के लिए करते हैं। अब स्पष्ट नियम आने के बाद बिना अनुमति के ऐसे काम रुक सकते हैं।

आंतरिक रेनोवेशन: लोड बेयरिंग वॉल हटाना, बाथरूम शिफ्ट करना या एक्सटर्नल वॉल बदलना आमतौर पर BMC/स्थानीय अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता।

सोसाइटी की भूमिका: सोसाइटी मैनेजमेंट को अब इन बदलावों के लिए लिखित NOC देना या रोकना आसान हो जाएगा।

नोट: छोटे-मोटे रिपेयर (जैसे टाइल्स बदलना, पेंटिंग, फॉल्स सीलिंग) आमतौर पर बिना मेजर परमिशन के हो सकते हैं, लेकिन स्ट्रक्चरल बदलावों के लिए हमेशा अनुमति लें।

फ्लैट ओनर्स को क्या करना चाहिए?

वर्तमान में**: कोई रेनोवेशन प्लान है तो पहले अपनी हाउसिंग सोसाइटी से लिखित अनुमति लें। जरूरत पड़ने पर BMC या स्थानीय नगरपालिका से अप्रूवल लें।

सुरक्षा का ध्यान**: बालकनी ग्रिल लगाते समय बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। ग्लास रेलिंग वाले मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतें।

कानूनी सलाह**: बड़े बदलावों से पहले आर्किटेक्ट/सिविल इंजीनियर और लीगल एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें ताकि बाद में डिस्प्यूट न हो।

सरकार की गाइडलाइंस का इंतजार**: कोर्ट के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार जल्द ही विस्तृत गाइडलाइंस जारी करेगी, जो पूरे राज्य के अपार्टमेंट्स पर लागू होंगी।

क्यों जरूरी हैं ये गाइडलाइंस?

बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल सेफ्टी बनी रहे

फायर सेफ्टी और वेंटिलेशन प्रभावित न हो

सोसाइटी में एक सदस्य के बदलाव से दूसरे को परेशानी न हो

अनधिकृत निर्माण पर अंकुश लगे

HousingSocietySolutions की सलाह: हर बदलाव से पहले सोसाइटी bye-laws, Model Bye-laws और स्थानीय डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशंस (DCR) चेक करें। पारदर्शिता रखें ताकि सोसाइटी का माहौल अच्छा रहे।

आपकी सोसाइटी में बालकनी या टेरेस रेनोवेशन से जुड़ी कोई समस्या है? कमेंट में बताएं। हम और ज्यादा उपयोगी जानकारी लेकर आएंगे।

अपडेट रहें – हम महाराष्ट्र सरकार की नई गाइडलाइंस आने पर तुरंत डिटेल्स शेयर करेंगे।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। कानूनी सलाह के लिए वकील या अथॉरिटी से संपर्क करें।


DDA ने आसान किए फ्लैट में बदलाव के नियम: EV चार्जर, सोलर पैनल, लॉफ्ट बिना परमिशन, जानें नई पॉलिसी के फायदे | HousingSocietySolutions

DDA फ्लैट अल्टरेशन नियम 2026: आसान अप्रूवल, क्या-क्या कर सकते हैं बिना अनुमति  

दिल्ली DDA हाउसिंग में बदलाव अब आसान, नई पॉलिसी से मिलेंगे बड़े फायदे  

DDA Eases Norms for Additions & Alterations: Rooftop Solar, EV Charging Points Allowed

DDA ने आसान किए फ्लैट में बदलाव के नियम: EV चार्जर, सोलर पैनल और कई सुविधाएं बिना परमिशन, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली: दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने अपने फ्लैटों में एडिशन और अल्टरेशन (Additions & Alterations) के नियमों को काफी सरल बना दिया है। नई पॉलिसी के तहत अब रेसिडेंट्स EV चार्जिंग पॉइंट, रूफटॉप सोलर पैनल, लॉफ्ट, एक्सेसिबिलिटी रैंप जैसी कई जरूरी सुविधाएं आसानी से लगा सकते हैं। यह बदलाव DDA हाउसिंग सोसाइटी के रेसिडेंट्स के लिए बड़ी राहत है।

नई नीति पहले से लागू हो चुकी है। DDA ने तीन श्रेणियों में कामों को बांटा है – बिना अनुमति वाले, इंटिमेशन वाले और अप्रूवल वाले। इससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो गई है।

बिना अनुमति के कर सकते हैं ये काम

DDA की नई पॉलिसी के अनुसार निम्नलिखित बदलाव बिना किसी पूर्व अनुमति के किए जा सकते हैं:


पार्किंग एरिया में EV चार्जिंग पॉइंट लगाना (केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार)

लॉफ्ट बनाना

अतिरिक्त PVC वॉटर टैंक लगाना

एक्सेसिबिलिटी रैंप (विकलांगों के लिए) बनाना

रूफटॉप वॉटर स्टोरेज को बदलना या बढ़ाना

विंडो को क्यूपबोर्ड में बदलना (निर्धारित शर्तों के साथ)

एग्जॉस्ट फैन या विंडो AC के लिए ओपनिंग बनाना

इंटिमेशन प्रक्रिया से किए जाने वाले काम

हल्के वजन वाले मटेरियल से टेम्पररी स्लोपिंग टेरेस कवर और ग्लेजिंग

अप्रूवल के साथ किए जा सकने वाले बड़े बदलाव

किचन, बाथरूम और टॉयलेट की लोकेशन बदलना

कॉमन स्टेयरकेस को टेरेस लेवल तक एक्सटेंड करना (मम्टी सहित)

कुछ सिंगल-स्टोरी और डुप्लेक्स फ्लैटों का रीकंस्ट्रक्शन

कोर्टयार्ड को फर्स्ट फ्लोर तक कवर करना

रियर कोर्टयार्ड में बाथरूम/टॉयलेट बनाना

रूफटॉप सोलर पैनल** लगाना (घरेलू उपयोग के लिए, MNRE गाइडलाइंस के अनुसार)

नोट: इन कामों के लिए रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से सर्टिफिकेशन जरूरी है।

पहले से किए गए अवैध बदलावों को रेगुलराइज करने का मौका

DDA ने पुराने अनऑथराइज्ड बदलावों को भी रेगुलराइज करने का प्रावधान रखा है, बशर्ते वे नई पॉलिसी की सीमा के अंदर हों। इससे कई रेसिडेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी।

सुरक्षा और समयबद्ध प्रक्रिया

30 दिनों के अंदर अप्रूवल या अस्वीकृति का फैसला आना चाहिए।

काम पूरा होने के बाद अथॉरिटी को इंटिमेट करना अनिवार्य।

3 साल में कंप्लीशन रिपोर्ट न देने पर परमिशन खत्म हो जाएगी।

पुरानी इमारतों (21 मार्च 2001 से पहले) में स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी हो सकता है।

DDA अधिकारी के अनुसार, नई पॉलिसी सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए रेसिडेंट्स को ज्यादा सुविधा देती है। EV चार्जिंग और सोलर पैनल जैसी आधुनिक जरूरतों को भी इसमें शामिल किया गया है।

HousingSocietySolutions सलाह:  

DDA फ्लैट ओनर्स को सलाह दी जाती है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले RWA से चर्चा करें और जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। संरचनात्मक सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें ताकि भविष्य में कोई समस्या न आए।



गुरुवार, 16 जुलाई 2026

महावितरण ने जारी किया हाउसिंग सोसाइटी कमेटी को नोटिस: बिजली मीटर की ऊंचाई बढ़ाएं, जानें नियम, समयसीमा और खर्च

महावितरण ने हाउसिंग सोसायटी में बिजली मीटर की ऊंचाई बढ़ाने के लिए नोटिस जारी किए हैं। पूरी जानकारी, नियम, अनुपालन की प्रक्रिया, जुर्माना और सोसाइटी के लिए टिप्स। HousingSocietySolutions पर पढ़ें।

महावितरण ने हाउसिंग सोसाइटी कमेटी को जारी किया नोटिस: बिजली मीटर की ऊंचाई क्यों बढ़ानी होगी?

महाराष्ट्र के लाखों हाउसिंग सोसायटी निवासियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट। महावितरण (MSEDCL) ने कई हाउसिंग सोसायटी कमेटियों को नोटिस जारी कर बिजली मीटर की ऊंचाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। यह कदम मीटर रीडिंग की आसानी, सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुपालन के लिए उठाया गया है।

महावितरण नोटिस का मुख्य कारण क्या है?

महावितरण के अनुसार, कई सोसायटियों में बिजली मीटर बहुत नीचे या ऊंचाई पर लगे हैं, जिससे:

मीटर रीडर को नियमित रीडिंग लेने में दिक्कत होती है।

बाढ़ या पानी भराव की स्थिति में मीटर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

विद्युत दुर्घटनाओं (जैसे शॉर्ट सर्किट या बच्चों द्वारा छेड़छाड़) का जोखिम रहता है।

MERC (महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग) के विद्युत पुरवठा संहिता नियमों का पालन सुनिश्चित करना।

मानक ऊंचाई: आमतौर पर मीटर का केंद्र भूमि से 4 फीट से 6 फीट (लगभग 1.2 से 1.8 मीटर) की ऊंचाई पर होना चाहिए। यह ऊंचाई मीटर रीडिंग, रखरखाव और सुरक्षा के लिए आदर्श मानी जाती है।

सोसाइटी कमेटी को क्या करना चाहिए?

नोटिस प्राप्त होते ही बैठक बुलाएं — सभी सदस्यों को सूचित करें।

मीटर की वर्तमान स्थिति जांचें — मीटर रूम या कॉमन एरिया में सभी मीटरों की ऊंचाई नोट करें।

अधिकृत इलेक्ट्रीशियन या महावितरण अधिकृत ठेकेदार से अनुमान प्राप्त करें।

समयसीमा का पालन करें — नोटिस में दी गई अवधि (आमतौर पर 15-30 दिन) में काम पूरा करें, अन्यथा जुर्माना या कनेक्शन संबंधी समस्या हो सकती है।

महावितरण कार्यालय में लिखित आवेदन दें और स्वीकृति लें।

खर्च कौन वहन करेगा?

सोसाइटी का सामान्य फंड** से खर्च किया जा सकता है, क्योंकि यह कॉमन सुविधा से संबंधित है।

व्यक्तिगत मीटर शिफ्टिंग के मामले में संबंधित फ्लैट ओनर से शेयरिंग हो सकती है।

महावितरण की तरफ से कोई सब्सिडी नहीं मिलती, लेकिन काम प्रमाणित एजेंसी से करवाने पर अतिरिक्त शुल्क बच सकता है।

अनुमानित खर्च: मीटर शिफ्टिंग, केबल एक्सटेंशन, ब्रैकेट/बॉक्स बदलाव आदि पर प्रति मीटर ₹2,000 से ₹5,000 तक लग सकता है (स्थान और जटिलता पर निर्भर)।

फायदे क्यों हैं?

सटीक बिलिंग और कम औसत बिल की समस्या।

मीटर की लंबी उम्र और कम खराबी।

सुरक्षा बढ़ना — बच्चों और पालतू जानवरों से बचाव।

भविष्य में स्मार्ट मीटर लगाने में आसानी।

सोसाइटी के लिए व्यावहारिक टिप्स (HousingSocietySolutions विशेष)

मीटर रूम को अपग्रेड करें** — अच्छी लाइटिंग, वेंटिलेशन और वॉटरप्रूफिंग करवाएं।

एक साथ सभी मीटर शिफ्ट करें** — अलग-अलग करने से अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।

दस्तावेज तैयार रखें** — नोटिस कॉपी, पुरानी बिल, सोसाइटी रजिस्ट्रेशन आदि।

रेजिडेंट्स को सूचित करें** — पारदर्शिता बनाए रखें ताकि कोई विवाद न हो।

महावितरण हेल्पलाइन 1912 या ऐप के जरिए स्टेटस चेक करें।

यह बदलाव एक बार की प्रक्रिया है जो लंबे समय तक सुविधा देगी। अगर आपकी सोसायटी को भी नोटिस मिला है तो तुरंत कार्रवाई करें।

क्या आपकी सोसायटी में भी मीटर ऊंचाई का मुद्दा है? कमेंट में बताएं अपना अनुभव। HousingSocietySolutions पर ऐसे ही उपयोगी आर्टिकल्स के लिए सब्सक्राइब करें और शेयर करें।

नोट: नियमों में बदलाव के लिए अपने क्षेत्रीय महावितरण कार्यालय से पुष्टि अवश्य करें। 


बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: हाउसिंग सोसाइटी को फ्लैट नीलामी खरीदार से पुराने मालिक का मेंटेनेंस बकाया वसूलने का अधिकार | 6 सप्ताह की मोहलत

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि हाउसिंग सोसाइटी नीलामी (ई-ऑक्शन) में फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति से पुराने मालिक का बकाया मेंटेनेंस वसूल सकती है। 6 सप्ताह में भुगतान न करने पर सदस्यता प्रभावित।HousingSocietySolutions पर पूरी डिटेल पढ़ें।


बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अब सोसाइटी पुराने मालिक का मेंटेनेंस बकाया फ्लैट नीलामी खरीदार से वसूल कर सकेगी

मुंबई। हाउसिंग सोसाइटियों के लिए राहत भरा फैसला आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ई-ऑक्शन (नीलामी) के जरिए फ्लैट खरीदने वाले नए खरीदार से पुराने मालिक का बकाया मेंटेनेंस चार्ज सोसाइटी वसूलने का हक रखती है।

Justice Sandeep Marne की एकल पीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नीलामी में फ्लैट खरीदने वाला व्यक्ति 6 सप्ताह के अंदर बिना ब्याज के पुराना बकाया मेंटेनेंस जमा कर देता है, तो उसे सोसाइटी की सदस्यता दी जा सकती है।

मामला क्या था?
खारघर स्थित एक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सोसाइटी ने पुराने फ्लैट मालिक के बकाया मेंटेनेंस की वसूली के लिए नीलामी खरीदार पर दावा किया।
कोर्ट ने पहले दिए गए कुछ आदेशों को रद्द करते हुए साफ किया कि सोसाइटी सदस्यता देते समय पुराने बकाये की वसूली का अधिकार सोसाइटी को है।

कोर्ट ने क्या कहा?

6 सप्ताह की मोहलत: नीलामी खरीदार को फ्लैट खरीदने की तारीख से 6 हफ्ते के अंदर पुराना बकाया (बिना ब्याज) जमा करना होगा।
बकाया न चुकाने पर: 6 सप्ताह बाद बकाया चुकाना पड़ेगा तो ब्याज सहित भुगतान करना होगा।
सदस्यता: बकाया क्लियर करने के बाद ही नए खरीदार को सोसाइटी की सदस्यता मिलेगी।
दोनों पक्षों की जानकारी: नीलामी के समय बैंक और खरीदार, दोनों को पुराने बकाये की जानकारी होनी चाहिए।

सोसाइटियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

कई सोसाइटियों में पुराने मालिक फ्लैट बेचकर या लोन डिफॉल्ट होने पर भाग जाते हैं और बकाया मेंटेनेंस सोसाइटी पर बोझ बन जाता है।
नीलामी प्रक्रिया में अब सोसाइटी अपना बकाया सुरक्षित कर सकती है।
यह फैसला Co-operative Housing Societies को मजबूत बनाता है और Maintenance Recovery की प्रक्रिया को आसान बनाएगा।

फ्लैट खरीदारों के लिए सलाह (HousingSocietySolutions Recommendation)

नीलामी से पहले** फ्लैट का पूरा मेंटेनेंस स्टेटस सोसाइटी से लिखित में जरूर लें।
नीलामी दस्तावेजों में बकाया राशि का स्पष्ट उल्लेख हो।
6 सप्ताह के अंदर बकाया क्लियर करें, अन्यथा ब्याज और कानूनी परेशानी बढ़ सकती है।
फ्लैट खरीदते समय No Dues Certificate और Society NOC लेना अनिवार्य है।

निष्कर्ष 
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला हाउसिंग सोसाइटियों को उनके हक की रक्षा करने में मजबूती देगा। साथ ही नए खरीदारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

आपकी सोसाइटी में भी मेंटेनेंस बकाया की समस्या है? कमेंट में बताएं या HousingSocietySolutions पर संपर्क करें। हम आपको कानूनी सलाह और रिकवरी प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं।


मंगलवार, 14 जुलाई 2026

वसई-विरार के घरों पर महंगाई का नया झटका, VVCMC ने दोगुना कर दिया पानी का टैक्स! सोसाइटीज क्या कर सकती हैं? HousingSocietySolutions

वसई विरार महानगरपालिका (VVCMC) ने 2026-27 बजट में पानी टैक्स दोगुना और प्रॉपर्टी टैक्स 15% बढ़ा दिया है। जानिए नई दरें, असर, कारण और सोसाइटीज के लिए क्या करें।

VVCMC ने दोगुना कर दिया पानी का टैक्स! वसई-विरार निवासियों पर महंगाई का नया बोझ

वसई-विरार शहर के लाखों निवासियों के लिए एक बुरी खबर आई है। वसई विरार सिटी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (VVCMC) ने अपने 2026-27 के बजट में पानी टैक्स को दोगुना कर दिया है। साथ ही प्रॉपर्टी टैक्स में भी 15% की बढ़ोतरी की गई है। यह फैसला राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए लिया गया है, लेकिन आम लोगों और हाउसिंग सोसाइटीज पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

क्यों बढ़ाया गया पानी का टैक्स?

VVCMC ने ₹4,208 करोड़ के बजट में इस बढ़ोतरी का ऐलान किया। मुख्य कारण:

बढ़ती आबादी और शहर के तेज विकास के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ना

पानी की सप्लाई, पाइपलाइन रखरखाव और नए प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत

राजस्व घाटे को पूरा करना

नगर निगम का कहना है कि बिना टैक्स बढ़ाए भी बजट तैयार किया गया था, लेकिन पानी टैक्स दोगुना करने से अतिरिक्त आय होगी।

निवासियों और सोसाइटीज पर क्या असर पड़ेगा?

मासिक पानी बिल** लगभग दोगुना हो सकता है, खासकर बड़े फ्लैट्स और हाई-राइज सोसाइटीज में।

प्रॉपर्टी टैक्स में 15% बढ़ोतरी से वार्षिक मेंटेनेंस चार्जेस भी प्रभावित होंगे।

वसई, विरार, नालासोपारा और आसपास के इलाकों में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों पर सबसे ज्यादा बोझ।

कई सोसाइटीज में पहले से ही पानी की समस्या है, अब महंगे बिल के साथ शिकायतें बढ़ने की आशंका।

निवासी इस फैसले से काफी नाराज हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग इसे "अनुचित और अत्यधिक" बता रहे हैं।

Housing Society Solutions: सोसाइटीज क्या कर सकती हैं?

पानी की बचत अभियान चलाएं – कम पानी वाले फिटिंग्स लगवाएं, लीकेज तुरंत ठीक करवाएं।

VVCMC से बातचीत – सोसाइटीज एसोसिएशन के जरिए प्रतिनिधिमंडल भेजकर राहत मांगें।

वाटर मीटर चेक करें – सही मीटरिंग से अनावश्यक बिलिंग रुक सकती है।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग और रिसाइक्लिंग सिस्टम अपनाएं – लंबे समय में बिल कम होंगे।

ऑनलाइन पेमेंट ट्रैक करें – VVCMC की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से बिल चेक करें और समय पर पेमेंट करके पेनाल्टी बचाएं।

कब से लागू होगी नई दरें?

बजट पास होने के बाद नई दरें जल्द ही लागू हो सकती हैं। सोसाइटीज को अपने रेजिडेंट्स को पहले से सूचित कर अतिरिक्त चार्जेस के लिए तैयार रहना चाहिए।

अंतिम सलाह

पानी एक जरूरी संसाधन है और इसका सही प्रबंधन जरूरी है, लेकिन बढ़ोतरी इतनी तेज होनी चाहिए कि आम आदमी पर बोझ न पड़े। VVCMC से अपील है कि बढ़े हुए टैक्स के बदले बेहतर पानी की सप्लाई और पारदर्शिता सुनिश्चित करें।

HousingSocietySolutions की टीम लगातार ऐसी खबरों पर नजर रखेगी जो हाउसिंग सोसाइटीज और निवासियों को प्रभावित करती हैं। अगर आपकी सोसाइटी में पानी टैक्स या प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी कोई समस्या है तो कमेंट में बताएं। 



शनिवार, 11 जुलाई 2026

MHADA 79A Amendment Passed: 13,000 पुरानी इमारतों का पुनर्विकास फिर शुरू, मुंबईवासियों को नई उम्मीद | HousingSocietySolutions

महाराष्ट्र विधानमंडल ने MHADA एक्ट में 79A संशोधन पास कर दिया। अब 13,000 से ज्यादा खतरनाक पुरानी इमारतों का पुनर्विकास तेज हो सकेगा। जानिए पूरी डिटेल, फायदे और आगे क्या होगा।

MHADA 79A Amendment Passed: मुंबई की 13,000 पुरानी इमारतों का पुनर्विकास फिर से पटरी पर, लाखों परिवारों को राहत

मुंबई की पुरानी और खस्ताहाल इमारतों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर आई है। महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद ने MHADA एक्ट में सेक्शन 79A के संशोधन वाले प्राइवेट मेंबर्स बिल को पास कर दिया है। यह संशोधन अब गवर्नर की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

इस संशोधन से बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को दूर करने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे 13,000 से ज्यादा पुरानी cess buildings का पुनर्विकास फिर शुरू हो सकेगा।

क्या है MHADA सेक्शन 79A?

2020 में लाए गए सेक्शन 79A और 79B का मकसद खतरनाक इमारतों का तेजी से पुनर्विकास सुनिश्चित करना था। अगर मालिक (landlord) पुरानी इमारत को redevelopment के लिए तैयार नहीं होते, तो 51% या उससे ज्यादा tenants की सहमति से MHADA खुद हस्तक्षेप कर redevelopment करवा सकता है।

यह प्रावधान 2017 के हुसैनी बिल्डिंग collapse (33 मौतें), 2019 के डोंगरी हादसे और 2020 के फोर्ट बिल्डिंग collapse जैसी घटनाओं के बाद लाया गया था।

समस्या क्या थी?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगभग एक साल पहले सेक्शन 79A के तहत जारी 935 नोटिसों पर रोक लगा दी थी।

कोर्ट ने "competent authority" को लेकर कानूनी खामी पाई थी।

नया संशोधन अब MHADA के अधिकृत अधिकारियों को सीधे पावर देने का प्रावधान करता है, जिससे यह कानूनी उलझन दूर हो जाएगी।

विधायक अजय चौधरी द्वारा पेश किया गया यह प्राइवेट मेंबर्स बिल अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं में राज्य सरकार की स्थिति मजबूत करेगा।

कितना बड़ा है मुद्दा?

मुंबई में 1940 से पहले बनी 13,000+ cess buildings हैं, जिनमें लाखों परिवार रहते हैं।

2021 से अगस्त 2025 तक 345 इमारतें पूरी या आंशिक रूप से ढह चुकी हैं (RTI डेटा)।

1970-2018 के बीच इमारत गिरने से 815 लोगों की जान गई।

एक्टिविस्ट जीतेंद्र Ghadge (The Young Whistleblowers Foundation) ने इसे "life-saving provision" बताया और कहा कि तकनीकी वजह से हजारों जिंदगियों को खतरे में नहीं डालना चाहिए।

आगे क्या होगा?

गवर्नर की मंजूरी के बाद कानून बनेगा।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद redevelopment प्रक्रिया तेज हो सकेगी।

tenants को 51% सहमति के साथ खुद redevelopment शुरू करने का अधिकार रहेगा।

यह संशोधन मुंबई के शहरी नवीनीकरण (urban renewal) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

HousingSocietySolutions की सलाह:  

सभी housing societies जो पुरानी इमारतों में हैं, अपने tenants और landlords के साथ चर्चा शुरू करें। MHADA के नए नियमों के बारे में अपडेट रहें। redevelopment से पहले structural audit जरूर करवाएं।

आपकी सोसाइटी भी पुरानी इमारत में है? कमेंट में बताएं।



Smart Meter Problem: महाराष्ट्र में बढ़े बिजली बिल: हीटवेव से बढ़ी खपत या स्मार्ट मीटर? देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान |HousingSocietySolutions

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि बिजली बिल बढ़ने की वजह स्मार्ट मीटर नहीं बल्कि भीषण गर्मी और बढ़ी हुई खपत है। हाउसिंग सोसाइटी निवासियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट।

महाराष्ट्र में बढ़े बिजली बिल: हीटवेव से बढ़ी खपत या स्मार्ट मीटर? देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान

पुणे/मुंबई: हजारों उपभोक्ताओं की शिकायतों के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में साफ कहा है कि स्मार्ट मीटर बिजली बिल बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में चली भीषण गर्मी (हीटवेव) की वजह से बिजली की खपत बढ़ी है, जिसके कारण बिल ज्यादा आए हैं।

सोसाइटी निवासियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले ज्यादातर परिवारों को इस समय भारी बिजली बिल का सामना करना पड़ रहा है। एसी, कूलर, फ्रिज और अन्य उपकरणों का लगातार इस्तेमाल बढ़ने से बिल दोगुना-तिगुना हो गया है। कई जगहों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उपभोक्ता इसे लेकर संदेह जता रहे थे।

सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया:  

“बढ़े हुए बिल की वजह बढ़ी हुई बिजली खपत है, न कि स्मार्ट मीटर।”

स्मार्ट मीटर पर विवाद क्यों?

कई सोसाइटियों में पुराने मीटर की जगह स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।

कुछ उपभोक्ताओं का दावा है कि मीटर बदलने के बाद बिल अचानक बहुत बढ़ गया।

वहीं सरकार का पक्ष है कि स्मार्ट मीटर ज्यादा सटीक माप करते हैं और चोरी रोकने में मदद करते हैं।

Housing Society Solutions: क्या करें निवासी?

बिल की जांच करें – अपने पिछले 6-12 महीनों के बिल और यूनिट खपत की तुलना करें। मौसम के अनुसार खपत बढ़ना स्वाभाविक है।

एनर्जी ऑडिट करवाएं – सोसाइटी स्तर पर बिजली बचत के उपाय अपनाएं (LED लाइट, इन्वर्टर AC, टाइमर आदि)।

स्मार्ट मीटर की शिकायत – अगर मीटर में गड़बड़ी लगे तो तुरंत बिजली कंपनी (MSEDCL) में शिकायत दर्ज करें।

सोसाइटी में सामूहिक चर्चा – मैनेजिंग कमिटी मीटिंग में इस मुद्दे को उठाएं और सामूहिक बचत के तरीके अपनाएं।

सरकारी योजनाओं का फायदा – सोलर पैनल, ऊर्जा संरक्षण योजनाओं के बारे में जानकारी लें।

निष्कर्ष:  

भीषण गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ना लाजमी है। स्मार्ट मीटर एक बेहतर टेक्नोलॉजी है, लेकिन सही उपयोग और जागरूकता के बिना बिल नियंत्रण में नहीं रहेंगे। हाउसिंग सोसाइटी के निवासियों को अब ऊर्जा संरक्षण पर खास ध्यान देना चाहिए।

अपनी सोसाइटी में बिजली बिल को लेकर क्या समस्या आ रही है? कमेंट में बताएं। HousingSocietySolutions आपके सभी सोसाइटी संबंधी मुद्दों का समाधान है।


गुरुवार, 9 जुलाई 2026

Housing Society Deemed Conveyance: हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों का अधिकार और MC की जिम्मेदारी | पूरी जानकारी

डीम्ड कन्वेयन्स: हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों का अधिकार और MC की जिम्मेदारी | पूरी जानकारी

आपकी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (CHS) सिर्फ फ्लैट्स की नहीं, बल्कि पूरी जमीन और बिल्डिंग की मालिक बन सकती है। डीम्ड कन्वेयन्स इसी का कानूनी तरीका है। कई सोसाइटियों में बिल्डर या लैंड ओनर कन्वेयन्स देने में देरी करते हैं, जिससे सदस्यों के अधिकार प्रभावित होते हैं। इस लेख में हम डीम्ड कन्वेयन्स क्या है, इसके फायदे, प्रक्रिया और सोसाइटी सदस्यों व मैनेजमेंट कमिटी (MC) की भूमिका विस्तार से जानेंगे।

डीम्ड कन्वेयन्स क्या है?

कन्वेयन्स वह दस्तावेज है जिसके जरिए लैंड और बिल्डिंग का स्वामित्व बिल्डर/लैंड ओनर से सोसाइटी के नाम ट्रांसफर होता है। जब बिल्डर या प्रमोटर MOFA एक्ट के तहत 4 महीने में कन्वेयन्स नहीं देते, तो सोसाइटी डीम्ड कन्वेयन्स के लिए DDR (District Deputy Registrar) के पास आवेदन कर सकती है। 

यह एकतरफा प्रक्रिया है जिसमें बिल्डर की सहमति की जरूरत नहीं पड़ती। DDR ऑर्डर पास करके सोसाइटी के नाम कन्वेयन्स रजिस्टर करवा सकता है।

मुख्य कानूनी आधार: Maharashtra Ownership Flats Act (MOFA) 1963 की धारा 11।

डीम्ड कन्वेयन्स क्यों जरूरी है? 10+ महत्वपूर्ण फायदे

जमीन और बिल्डिंग का कानूनी स्वामित्व — सोसाइटी का नाम 7/12 एक्सट्रैक्ट और प्रॉपर्टी कार्ड पर आ जाता है।

अतिरिक्त FSI का लाभ — डेवलपमेंट कंट्रोल रूल्स के अनुसार अतिरिक्त FSI सोसाइटी को मिलता है, बिल्डर को नहीं।

रिडेवलपमेंट आसान — बिना कन्वेयन्स के रिडेवलपमेंट संभव नहीं। सोसाइटी का नाम PR कार्ड पर होना जरूरी है।

सेल्फ रिडेवलपमेंट के लिए लोन — बैंक से आसानी से लोन मिल सकता है क्योंकि मॉर्टगेज की सुविधा होती है।

बिल्डर के साथ बेहतर नेगोशिएशन — कन्वेयन्स होने पर सोसाइटी की पोजीशन मजबूत होती है, ज्यादा कॉर्पस और एरिया मिल सकता है।

भविष्य की सुरक्षा — पुरानी बिल्डिंग में समस्या आने पर बिल्डर/ओनर मोटी रकम मांग सकते हैं (जैसे गीतांजलि या लक्ष्मी छाया केस)।

सदस्यों का सच्चा मालिकाना हक — आपने फ्लैट की कीमत में जमीन का बड़ा हिस्सा दिया है, इसलिए अधिकार मांगना आपका हक है।

अन्य लाभ — बैंक लोन, सरकारी योजनाओं का फायदा, और प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ना।

MOFA एक्ट के तहत बिल्डर की जिम्मेदारी

51% फ्लैट्स बिकने के बाद 4 महीने के अंदर सोसाइटी को कन्वेयन्स देना अनिवार्य है।

अगर नहीं देते तो सदस्य और सोसाइटी डीम्ड कन्वेयन्स के लिए आगे बढ़ सकते हैं।

MC सदस्यों और सोसाइटी सदस्यों की भूमिका

सदस्यों का अधिकार** — AGM में इस मुद्दे को उठाना और निर्णय लेना।

MC की जिम्मेदारी** — प्रोएक्टिव रहना, प्रोफेशनल कंसल्टेंट्स की मदद लेना, और समय पर आवेदन करना।

साल-दर-साल AGM में चर्चा करके मुद्दा टालना बंद करें। अब निर्णय का समय है!

खर्च पर ध्यान दें: इंटीरियर पर लाखों खर्च करने वाले सदस्य कन्वेयन्स के लिए प्रोफेशनल फीस पर हिचकिचाते हैं। याद रखें, यह निवेश है जो सोसाइटी को मजबूत बनाता है।

डीम्ड कन्वेयन्स की प्रक्रिया (संक्षेप में)

सोसाइटी रजिस्टर्ड होनी चाहिए।

बिल्डर/ओनर को नोटिस दें (यदि संभव हो)।

आवश्यक दस्तावेजों के साथ DDR को आवेदन।

सुनवाई के बाद DDR ऑर्डर पास करता है।

सब-रजिस्ट्रार के पास कन्वेयन्स रजिस्ट्रेशन।

सरकार ने प्रक्रिया को आसान बनाया है। प्रोफेशनल एडवोकेट या कंसल्टेंट की मदद लें।

आम सवाल (FAQs)

प्रश्न: क्या बिना बिल्डर के सहयोग से डीम्ड कन्वेयन्स संभव है?  

उत्तर: हाँ, यही इसका मुख्य उद्देश्य है।

प्रश्न: कितना समय लगता है?  

उत्तर: केस के आधार पर 6 महीने से 2 साल तक।

प्रश्न: खर्च कितना आता है?  

उत्तर: सोसाइटी के साइज पर निर्भर, लेकिन लंबे समय में फायदेमंद।

निष्कर्ष: अब इंतजार नहीं, एक्शन लें!

अपनी सोसाइटी की जमीन पर अपना हक हासिल करें। डीम्ड कन्वेयन्स से न सिर्फ स्वामित्व मिलता है बल्कि रिडेवलपमेंट, FSI और भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। 

अगली AGM में इस एजेंडे को प्राथमिकता दें। प्रोफेशनल मदद लें और अपनी सोसाइटी को सशक्त बनाएं।

HousingSocietySolutions पर ऐसे ही उपयोगी लेख पढ़ें और अपनी सोसाइटी को बेहतर बनाएं।

अपनी सोसाइटी में डीम्ड कन्वेयन्स की स्थिति क्या है? कमेंट में बताएं। शेयर करें ताकि दूसरे सदस्यों को भी फायदा हो।

नोट: यह जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है। कानूनी सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।


डीम्ड कन्वेयंस के 16 बड़े फायदे: हर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के सदस्य को जरूर जानना चाहिए

1-डीम्ड कन्वेयंस (Deemed Conveyance) क्या है? सोसायटी के अधिकार, MC सदस्यों की जिम्मेदारी और पूरी प्रक्रिया

2-डीम्ड कन्वेयंस क्यों है हर हाउसिंग सोसायटी के लिए जरूरी? जानें कानूनी अधिकार और फायदे

3-क्या आपकी हाउसिंग सोसायटी ने अभी तक डीम्ड कन्वेयंस नहीं कराया? जानिए बड़े नुकसान और समाधान

4-डीम्ड कन्वेयंस: फ्लैट मालिकों का कानूनी अधिकार, MC की जिम्मेदारी और रीडेवलपमेंट का आधार

5-डीम्ड कन्वेयंस के 16 बड़े फायदे: हर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के सदस्य को जरूर जानना चाहिए

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8-हाउसिंग सोसायटी में डीम्ड कन्वेयंस: 51% बिक्री के बाद बिल्डर की कानूनी जिम्मेदारी और सदस्यों के अधिकार




गुरुवार, 2 जुलाई 2026

महाराष्ट्र हाउसिंग सोसाइटी नियमों में बड़े बदलाव 2026: घट गई पेनाल्टी, साफ-साफ मेंटेनेंस चार्जेस, आसान सेल्फ रिडेवलपमेंट | HousingSocietySolutions

महाराष्ट्र सरकार ने कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी नियम 1961 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। जानिए कम हुई ब्याज दर, नई मेंटेनेंस चार्जेस व्यवस्था, पार्किंग नियम, नॉमिनी अधिकार और सेल्फ रिडेवलपमेंट में आसानी के बारे में। फ्लैट ओनर्स के लिए पूरी डिटेल।

महाराष्ट्र हाउसिंग सोसाइटी नियमों में ऐतिहासिक बदलाव: फ्लैट ओनर्स को मिली बड़ी राहतमुंबई: लाखों फ्लैट ओनर्स और हाउसिंग सोसाइटीज के लिए राहत भरी खबर है। महाराष्ट्र सरकार ने Maharashtra Co-operative Societies Rules, 1961 में व्यापक संशोधन अधिसूचित कर दिए हैं। इन बदलावों से मेंटेनेंस चार्जेस की गणना पारदर्शी होगी, डिफॉल्ट पर पेनाल्टी घटी है, पार्किंग विवादों में जनरल बॉडी को अंतिम अधिकार मिला है और सेल्फ रिडेवलपमेंट आसान हो गया है।

HousingSocietySolutions पर इस लेख में हम आपको इन सभी नए नियमों की विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

1. ब्याज दर में बड़ी कटौती – अब सिर्फ 12% सालाना पहले डिले मेंटेनेंस पर 21% सालाना ब्याज लगता था।

अब अधिकतम 12% प्रति वर्ष ही लिया जा सकेगा।

इससे अस्थायी आर्थिक परेशानी में फंसे सदस्यों पर बोझ काफी कम हो गया है।

2. मेंटेनेंस चार्जेस की नई स्पष्ट व्यवस्था

नए नियमों में चार्जेस की गणना को लेकर साफ दिशा-निर्देश दिए गए हैं:

सर्विस चार्जेस: सभी फ्लैट्स में समान रूप से बांटे जाएंगे 

(साइज चाहे जितना भी हो)।

वॉटर चार्जेस: फ्लैट में लगे नलों (taps) की संख्या के आधार पर।

नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्जेस: सर्विस चार्जेस का अधिकतम 10% ही लिया जा सकेगा (किराएदार वाले फ्लैट्स पर)।

सोसाइटी मनमाने ढंग से अतिरिक्त चार्जेस नहीं लगा सकती। अतिरिक्त चार्जेस केवल जनरल बॉडी की मंजूरी और कानूनी प्रावधानों के अधीन ही लगाए जा सकते हैं।

3. पार्किंग विवादों का समाधान

पार्किंग अब मैनेजिंग कमिटी के बजाय जनरल बॉडी के फैसले से तय होगी। यह सबसे आम विवादों में से एक को हल करने में मददगार साबित होगा।

4. सेल्फ रिडेवलपमेंट को बड़ा बूस्ट

सोसाइटी अब अपनी जमीन के मूल्य के 10 गुना तक ऋण ले सकती है (एम्पैनल्ड बैंक वेल्यूअर्स द्वारा मूल्यांकन के आधार पर)।

इससे डेवलपर पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत कम होगी।

रिडेवलपमेंट से संबंधित विशेष जनरल बॉडी मीटिंग अब वर्चुअल भी हो सकती है (क्वोरम पूरा होने पर)।

5. Sinking Fund और Repair Fund: अनिवार्यSinking Fund: निर्माण लागत का न्यूनतम 0.25% प्रति वर्ष।

Repair & Maintenance Fund: निर्माण लागत का न्यूनतम 0.75% प्रति वर्ष।

इससे भविष्य में बड़े रिपेयर के लिए फंड की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

6. नॉमिनी और उत्तराधिकार संबंधी महत्वपूर्ण प्रावधान

सदस्य की मृत्यु पर यदि नॉमिनी न हो या कोई आगे न आए तो दो स्थानीय समाचार पत्रों में पब्लिक नोटिस जारी करना अनिवार्य।

नॉमिनी को प्रोविजनल मेंबरशिप और वोटिंग अधिकार मिल सकेंगे (इंडेम्निटी बॉन्ड जमा करने पर)।

7. अन्य महत्वपूर्ण बदलाव:

प्रिमाइसेस सोसाइटीज को औपचारिक मान्यता (कमर्शियल यूनिट्स के लिए)।

सोसाइटी रजिस्ट्रेशन फीस ₹2,000 से बढ़कर ₹5,000।

सोसाइटी के साइज के अनुसार मेंटेनेंस खर्च की वार्षिक सीमा तय।

जनरल बॉडी को सोसाइटी का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला अंग पुनः पुष्ट किया गया।

फ्लैट ओनर्स के लिए क्या मतलब है?

कम बोझ और ज्यादा पारदर्शिता

विवादों में कमी और तेज समाधान

रिडेवलपमेंट में ज्यादा विकल्प और फाइनेंशियल सुविधा

मजबूत उत्तराधिकार सुरक्षा

HousingSocietySolutions की सलाह: 

सभी सोसाइटीज अपने मैनेजिंग कमिटी और सदस्यों को इन नए नियमों की कॉपी उपलब्ध कराएं और आगामी जनरल बॉडी मीटिंग में इन्हें चर्चा में लाएं।

नोट: ये नियम पूरे महाराष्ट्र में लागू होंगे। किसी भी विशिष्ट मामले में अपने सोसाइटी के रजिस्ट्रार या कानूनी सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।



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