लखनऊ Experion Capital प्रोजेक्ट में बिना Occupancy Certificate फ्लैट देने पर NCDRC ने बिल्डर को 21 लाख एक्स्ट्रा चार्ज रिफंड करने, 6% ब्याज और पजेशन देने का आदेश दिया। घर खरीदारों के अधिकार और RERA vs Consumer Court पर पूरी जानकारी।
लखनऊ में बिल्डर को बड़ा झटका:
बिना OC फ्लैट देने पर NCDRC ने Experion Developers को 21 लाख रिफंड + ब्याज चुकाने का आदेश दियाघर खरीदने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला आया है। नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रेड्रेसल कमीशन (NCDRC) ने लखनऊ के Experion Developers पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि बिना Occupancy Certificate (OC) के सिर्फ पजेशन ऑफर करने से बिल्डर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।क्या है पूरा मामला?प्रभावित घर खरीदार प्रीति यादव और पुष्पेंद्र कुमार यादव ने दिसंबर 2017 में Experion Capital (Gomti Nagar, Lucknow) प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया था। जनवरी 2018 में फ्लैट नंबर 703 (Tower-2) अलॉट हो गया। जुलाई 2018 में फॉर्मल एग्रीमेंट हुआ, जिसमें कुल कीमत ₹1.13 करोड़ तय हुई थी और 30 नवंबर 2022 तक OC सहित पजेशन देने का वादा किया गया था।
खरीदारों ने बताया कि उन्होंने कुल ₹1.34 करोड़ से ज्यादा पेमेंट कर दिया, यानी तय राशि से ₹21.29 लाख एक्स्ट्रा चार्ज वसूला गया। अप्रैल 2022 में पजेशन ऑफर तो कर दिया गया, लेकिन प्रोजेक्ट में जरूरी सुविधाएं अधूरी थीं और Occupancy Certificate नहीं था।
इसके बाद बिल्डर ने सितंबर 2022 में अलॉटमेंट कैंसल कर दिया और लगभग ₹29.5 लाख जब्त कर लिए।NCDRC का महत्वपूर्ण फैसला (12 मई 2026)NCDRC बेंच (AVM J Rajendra (Retd) और Justice Anoop Kumar Mendiratta) ने UP State Consumer Commission के जून 2024 के आदेश को आंशिक रूप से बरकरार रखा और संशोधित किया:फ्लैट का पजेशन OC और Completion Certificate के साथ 30 दिनों के अंदर देना होगा।
₹21.29 लाख अतिरिक्त वसूली गई राशि 9% ब्याज सहित वापस करनी होगी।
तय मूल्य ₹1.13 करोड़ पर 6% प्रति वर्ष ब्याज (देर से पजेशन की तारीख से)।
मुकदमेबाजी खर्च ₹50,000।
अलग से ₹10 लाख मानसिक प्रताड़ना मुआवजे को घटा दिया (क्योंकि ब्याज पहले ही दिया जा रहा है)।
कोर्ट ने बिल्डर के इन तर्कों को खारिज कियासिर्फ पजेशन ऑफर करने भर से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, OC जरूरी है।
RERA होने से Consumer Court में केस नहीं लड़ सकते — यह गलत है। Consumer Protection Act के अधिकार RERA के अतिरिक्त हैं।ख
रीदार इन्वेस्टर थे — कोर्ट ने कहा कोई सबूत नहीं, इसलिए वे कंज्यूमर ही हैं।
कोर्ट का साफ संदेश:
बिल्डर मनमाने तरीके से अलॉटमेंट कैंसल नहीं कर सकता, खासकर जब खरीदार ने बड़ी रकम चुकाई हो।
घर खरीदारों के लिए सीख (Homebuyers के अधिकार)
Occupancy Certificate अनिवार्य है — इसके बिना पजेशन ऑफर अमान्य माना जा सकता है।
एग्रीमेंट में तय समय पर पजेशन न मिलने पर ब्याज और मुआवजे का हक।
अतिरिक्त चार्ज वसूली पर रिफंड + ब्याज मिल सकता है।
Consumer Court RERA के साथ-साथ उपलब्ध है — दोनों जगह लड़ सकते हैं।
पेमेंट प्लान, एग्रीमेंट और सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें।
HousingSocietySolutions की सलाह:
फ्लैट बुकिंग से पहले RERA रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट चेक करें, Promoter की पिछले प्रोजेक्ट्स की हिस्ट्री देखें और कानूनी सलाह लें।निष्कर्षयह फैसला उन हजारों होमबायर्स के लिए राहत भरा है जो बिल्डरों की देरी और मनमानी का शिकार हो रहे हैं। NCDRC ने एक बार फिर साफ कर दिया कि ग्राहक का पैसा और समय दोनों की सुरक्षा जरूरी है।अगर आप भी किसी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में फंस गए हैं या नई प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहे हैं, तो कमेंट में अपनी समस्या बताएं। हमारी टीम आपकी मदद करेगी।

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