महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट ने साफ कहा कि कॉमन मेंटेनेंस चार्ज फ्लैट या दुकान के साइज के आधार पर ज्यादा नहीं लिया जा सकता। जानें पूरा फैसला, क्या लागू होता है और क्या नहीं। Housing Society Solutions पर पढ़ें।
हाउसिंग सोसाइटी बड़े फ्लैट और दुकानों से एरिया के आधार पर ज्यादा मेंटेनेंस नहीं ले सकती: महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव कोर्ट का फैसला
मुंबई के वर्ली स्थित एक हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले कुछ सदस्यों ने मेंटेनेंस चार्ज को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका आरोप था कि सोसाइटी बड़े फ्लैट और दुकानों से साइज के आधार पर ज्यादा मेंटेनेंस वसूल रही है। दुकानों से तो रेसिडेंशियल फ्लैट्स के मुकाबले दोगुना चार्ज लिया जा रहा था।
महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट के जस्टिस वी. आर. कुलकर्णी ने 10 अगस्त 2026 को इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाउसिंग सोसाइटी कॉमन मेंटेनेंस और सर्विस चार्ज को फ्लैट या दुकान के क्षेत्रफल (एरिया) के आधार पर ज्यादा नहीं ले सकती। जब तक कोई ठोस कानूनी कारण या अतिरिक्त सुविधा का सबूत न हो, तब तक साइज या कमर्शियल यूज के आधार पर अलग-अलग रेट लगाना अवैध है।
केस की पृष्ठभूमि
श्री शानभाग, डॉ. वारके और अन्य सदस्यों ने शिकायत की कि सोसाइटी कॉमन मेंटेनेंस को सभी सदस्यों में बराबर बांटने के बजाय फ्लैट/दुकान के साइज के हिसाब से वसूल रही है। उन्होंने पानी के कनेक्शन और मेजर रिपेयर कॉन्ट्रैक्ट्स के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए थे।
सोसाइटी ने जवाब में कहा कि शिकायतकर्ता मेंटेनेंस बकाया में डिफॉल्टर हैं। दुकानों के लिए अलग नियम लागू होते हैं, जिन्हें अलॉटियों ने स्वीकार किया था। पानी के चार्ज और प्रबंधन संबंधी आरोपों से सोसाइटी ने इनकार किया।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने फैसले Venus Co-operative Housing Society Ltd. बनाम डॉ. जे. वाई. डेटवानी (2002) का हवाला दिया। उस फैसले में कहा गया था कि जब सोसाइटी की सेवाएं और सुविधाएं सभी सदस्यों को समान रूप से उपलब्ध होती हैं, तो सिर्फ इसलिए कि किसी का फ्लैट बड़ा है या दुकान है, उस पर ज्यादा कॉमन मेंटेनेंस नहीं लगाया जा सकता।
कोर्ट ने पाया कि:
- सोसाइटी ने यह साबित नहीं किया कि दुकान नंबर 8 को कोई अतिरिक्त कॉमन सुविधा मिल रही है या कमर्शियल यूज से सोसाइटी का खर्च बढ़ रहा है।
- अलग नियमों का दावा भी गवाह या सबूत के बिना खारिज कर दिया गया।
- मेंटेनेंस बिलों में भी एकसमान प्रति वर्ग फुट फॉर्मूला नहीं दिख रहा था।
इसके आधार पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि सोसाइटी कॉमन मेंटेनेंस और सर्विस चार्ज को समान आधार पर दोबारा कैलकुलेट करे और पहले से वसूली गई रकम का एडजस्टमेंट करे।
किन चीजों पर यह फैसला लागू नहीं होता?
कोर्ट ने साफ किया कि यह राहत सिर्फ कॉमन मेंटेनेंस और सर्विस चार्ज तक सीमित है। निम्नलिखित पर एरिया के आधार पर चार्ज लिया जा सकता है, अगर बाई-लॉज या कानून अनुमति देते हों:
- प्रॉपर्टी टैक्स
- सिंकिंग फंड
- मेजर रिपेयर योगदान
- पार्किंग चार्ज
- अन्य वैध तरीके से तय किए गए चार्ज
पानी के चार्ज और प्रबंधन संबंधी अन्य शिकायतों पर पर्याप्त सबूत न होने के कारण कोर्ट ने सोसाइटी के पक्ष में फैसला सुनाया।
हाउसिंग सोसाइटी सदस्यों के लिए सबक
यह फैसला महाराष्ट्र की को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों के लिए महत्वपूर्ण है। कई सोसाइटियां अभी भी बड़े फ्लैट या दुकानों से ज्यादा मेंटेनेंस लेती हैं। अगर आपकी सोसाइटी भी ऐसा कर रही है और कॉमन सुविधाएं सबको समान मिल रही हैं, तो आप इस फैसले का हवाला देकर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।
याद रखें:
- कॉमन सर्विस चार्ज आमतौर पर प्रति यूनिट/फ्लैट बराबर होना चाहिए।
- बाई-लॉज और जनरल बॉडी रेजोल्यूशन का पालन जरूरी है।
- विवाद की स्थिति में को-ऑपरेटिव कोर्ट या अपीलेट कोर्ट जा सकते हैं।
Housing Society Solutions पर हम नियमित रूप से ऐसे कानूनी फैसलों, मेंटेनेंस नियमों और सोसाइटी मैनेजमेंट से जुड़े अपडेट्स शेयर करते हैं। अगर आपके सोसाइटी में मेंटेनेंस को लेकर कोई विवाद है या आप सही तरीके से चार्ज कैलकुलेशन समझना चाहते हैं, तो कमेंट में बताएं या हमसे संपर्क करें।
(नोट: यह आर्टिकल सूचनात्मक है। किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले योग्य वकील या को-ऑपरेटिव एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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