पार्किंग विवाद महंगा पड़ा: पड़ोसी ने दूसरी कार पार्क कर ली, कोर्ट में हारे होमबायर | Maharashtra Housing Society Rules क्या कहते हैं?
मुंबई के Santacruz हाउसिंग सोसाइटी में पार्किंग विवाद का केस। मूल मालिक से फ्लैट खरीदने वाले होमबायर कोर्ट में हार गए क्योंकि उन्होंने सोसाइटी से नया पार्किंग अलॉटमेंट नहीं लिया। जानिए Maharashtra Co-op Appellate Court का फैसला और अपने सोसाइटी में ऐसी गलती कैसे न करें।
हाउसिंग सोसाइटी में पार्किंग की समस्या आम है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी महंगी पड़ जाती है कि कोर्ट तक मामला पहुंच जाता है। मुंबई के संतacruz (वेस्ट) में एक ऐसे ही मामले में होमबायर दंपति कोर्ट से राहत नहीं मिली। पड़ोसी ने उनकी पार्किंग स्पॉट पर दूसरी कार पार्क कर दी और कोर्ट ने होमबायर की याचिका खारिज कर दी।
क्या था पूरा मामला?
2000 में बनी एक हाउसिंग सोसाइटी में फ्लैट नंबर 402 के मूल मालिक श्री कलरा को सोसाइटी की मैनेजिंग कमिटी ने 2002 में एक पार्किंग स्लॉट अलॉट किया था। 2007 में उन्होंने यह फ्लैट श्री और श्रीमती धोलकिया को रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए बेच दिया।
धोलकिया दंपति ने बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के उसी पार्किंग स्पॉट पर अपनी गाड़ी पार्क करना शुरू कर दिया। अक्टूबर 2021 में उनके पड़ोसी ने जानबूझकर अपनी दूसरी कार उसी स्पॉट पर पार्क कर दी। जब धोलकिया दंपति ने विरोध किया तो पड़ोसी ने मना कर दिया। सोसाइटी भी चुप रही। आखिरकार धोलकिया दंपति को कोर्ट जाना पड़ा।
10 जुलाई 2026 को Maharashtra Co-operative Appellate Court का फैसला
कोर्ट ने धोलकिया दंपति की याचिका खारिज कर दी। मुख्य वजहें निम्नलिखित थीं:
पार्किंग ट्रांसफर नहीं हो सकती
सोसाइटी के बायलॉ No. 78(b) के अनुसार, सदस्य को पार्किंग स्लॉट बेचने या ट्रांसफर करने का कोई अधिकार नहीं है। यह अलॉटमेंट मैनेजिंग कमिटी की जिम्मेदारी है। इसलिए मूल मालिक श्री कलरा इसे नए खरीदार को ट्रांसफर नहीं कर सकते थे।
नए मालिक को अलग से अप्लाई करना जरूरी
बायलॉ No. 82 के मुताबिक, किसी भी सदस्य को पार्किंग चाहिए तो उसे सोसाइटी के सेक्रेटरी को लिखित आवेदन देना होता है। धोलकिया दंपति ने फ्लैट खरीदने के बाद ऐसा कोई आवेदन नहीं किया और न ही सोसाइटी ने उनके नाम कोई नया रेजोल्यूशन पास किया।
बिना अलॉटमेंट के दावा नहीं किया जा सकता
कोर्ट ने साफ कहा कि बिना सोसाइटी से अलॉटमेंट लिए धोलकिया दंपति उस स्पॉट पर अपना अधिकार नहीं जता सकते। पड़ोसी द्वारा जबरन पार्किंग करने पर भी वे कुछ नहीं कह सकते क्योंकि स्पॉट उनके नाम अलॉट ही नहीं था।
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि धोलकिया दंपति अब भी सोसाइटी के सेक्रेटरी को आवेदन देकर पार्किंग की मांग कर सकते हैं।
हाउसिंग सोसाइटी मालिकों और होमबायर के लिए जरूरी सीखें
फ्लैट खरीदते समय पार्किंग अलॉटमेंट को केवल सेल डीड में लिख लेना काफी नहीं है। सोसाइटी से लिखित रूप में नया अलॉटमेंट जरूर करवाएं।
सोसाइटी के बायलॉ (खासकर पार्किंग से संबंधित) को अच्छे से पढ़ें और समझें।
फ्लैट खरीदने के बाद सोसाइटी में नाम ट्रांसफर के साथ-साथ पार्किंग अलॉटमेंट का भी फॉर्मल रिक्वेस्ट करें।
अगर सोसाइटी में पार्किंग की कमी नहीं है, तो भी बिना अलॉटमेंट के स्पॉट इस्तेमाल करना जोखिम भरा है।
RERA* और *Co-operative Society Act** के तहत भी पार्किंग को आम सुविधा माना जाता है, लेकिन सोसाइटी के बायलॉ का पालन जरूरी है।
हर होमबायर को फ्लैट बुकिंग या खरीदते समय डेवलपर/बिल्डर से मिलने वाली पार्किंग डिटेल्स को सोसाइटी के रिकॉर्ड में दर्ज करवाना चाहिए। पुरानी सोसाइटियों में खरीदारी करते समय लीगल चेक के साथ बायलॉ चेक भी अनिवार्य है।अगर आपकी सोसाइटी में भी पार्किंग को लेकर विवाद चल रहा है तो पहले सोसाइटी के बायलॉ और Model Bye-laws 2014 (Maharashtra) को ध्यान से देखें। जरूरत पड़ने पर लीगल सलाह लें।
क्या आपकी सोसाइटी में पार्किंग नियम साफ हैं?
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नोट: यह लेख Economic Times में प्रकाशित खबर पर आधारित मूल विश्लेषण है। कानूनी सलाह के लिए किसी वकील से संपर्क करें।

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