यह केस उन सभी फ्लैट मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो हाउसिंग सोसाइटी पार्किंग विवाद, पार्किंग स्लॉट की असुविधा या अनुचित जुर्माने से जूझ रहे हैं।
क्या था पूरा मामला?
श्रीमती दीपाली दिलीप भुबे ने 2011 में नैगांव, दादर में एक फ्लैट खरीदा। बिल्डर ने उन्हें P1-19 लेवल पर कार पार्किंग स्लॉट आवंटित किया। शुरुआत में ही वे इस स्लॉट से संतुष्ट नहीं थीं। बिल्डर ने आश्वासन दिया कि यह अस्थायी है और सोसाइटी से बात करने को कहा।
2014 से स्थिति और बिगड़ गई। उनका पार्किंग स्लॉट दो अन्य स्लॉट्स के बीच फंस गया (sandwiched)। कार पार्क करने के लिए उन्हें आगे-पीछे की गाड़ियां हटवानी पड़ती थीं। उन्होंने बार-बार सोसाइटी से शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। अंत में उन्होंने कॉम्प्लेक्स के खुले स्थान पर गाड़ी पार्क करना शुरू कर दिया।
सोसाइटी ने इसके लिए प्रतिदिन 200 रुपये का जुर्माना लगाना शुरू कर दिया। 28 जनवरी 2025 को सोसाइटी ने पत्र भेजकर 9 दिनों का कुल 1,800 रुपये जुर्माना मांगा।
इससे परेशान होकर श्रीमती भुबे ने कोर्ट का रुख किया। उन्होंने अंतरिम राहत मांगी कि जुर्माना रोका जाए और सुविधाजनक पार्किंग दी जाए।
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
को-ऑपरेटिव कोर्ट ने अंतरिम आदेश में सोसाइटी को जुर्माना बंद करने और 15 दिनों के अंदर सुविधाजनक पार्किंग स्लॉट देने को कहा। सोसाइटी ने इसके खिलाफ महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट, मुंबई में अपील की।
18 जुलाई 2026 को जस्टिस डॉ. सृष्टि नीलकंठ ने श्रीमती भुबे के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटीजन रोजाना पार्किंग की कठिनाई, मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ झेल रही हैं। अगर राहत नहीं दी गई तो उन्हें अपूरणीय नुकसान होगा। वहीं सोसाइटी को एक सुविधाजनक स्लॉट देने से कोई नुकसान नहीं होगा।
सोसाइटी क्यों हारी? कानूनी आधार
वकील साधव मिश्रा (सीनियर पार्टनर, SNG & पार्टनर्स) के अनुसार मुख्य कारण ये रहे:
- मॉडल बाय-लॉ 165(a) का उल्लंघनको-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी बाय-लॉज के अनुसार किसी सदस्य पर एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 5,000 रुपये का ही जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके लिए पहले नोटिस देना और जनरल बॉडी मीटिंग में प्रस्ताव पास करना जरूरी है। सोसाइटी ने बिना किसी नोटिस या प्रस्ताव के प्रतिदिन 200 रुपये का जुर्माना लगा दिया। कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया का कोई सबूत रिकॉर्ड में नहीं है।
- पार्किंग स्लॉट असुविधाजनक साबित हुआश्रीमती भुबे ने आर्किटेक्ट की रिपोर्ट पेश की, जिसमें साफ दिखाया गया कि उनका स्लॉट अनधिकृत बदलावों के कारण फंस गया और इस्तेमाल लायक नहीं रहा। सोसाइटी का कर्तव्य है कि आवंटित सुविधाएं इस्तेमाल योग्य हों।
- सोसाइटी का “हम नहीं जानते थे” वाला तर्क खारिजसोसाइटी ने कहा कि फरवरी 2025 से एडमिनिस्ट्रेटर प्रबंधन संभाल रहे थे, इसलिए उन्हें मुकदमे की जानकारी नहीं थी। लेकिन कोर्ट रिकॉर्ड (रोज़नामा) से पता चला कि सोसाइटी के वकील और प्रतिनिधि कई तारीखों (20 अगस्त, 22 अगस्त और 16 सितंबर 2025) को कोर्ट में मौजूद रहे और वकालतनामा दाखिल किया। कोर्ट ने साफ कहा कि आंतरिक प्रशासनिक लापरवाही सदस्य के अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकती।
इस फैसले से क्या सीख मिलती है?
- हाउसिंग सोसाइटी बिना सही प्रक्रिया (नोटिस + जनरल बॉडी प्रस्ताव) के मनमाना जुर्माना नहीं लगा सकती। सालाना सीमा 5,000 रुपये है।
- पार्किंग स्लॉट अगर व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल न हो सके, तो सदस्य कानूनी राहत मांग सकते हैं।
- सीनियर सिटीजन और अन्य सदस्यों को अपनी शिकायतों का लिखित रिकॉर्ड रखना चाहिए। आर्किटेक्ट रिपोर्ट जैसे सबूत बहुत मजबूत होते हैं।
- सोसाइटी के आंतरिक बदलाव (एडमिनिस्ट्रेटर आदि) सदस्यों के अधिकारों को खत्म नहीं करते।
पार्किंग विवाद से कैसे बचें या निपटें?
अगर आपके हाउसिंग सोसाइटी में पार्किंग समस्या है तो:
- लिखित शिकायत दर्ज करें और पावती रखें।
- मॉडल बाय-लॉज की कॉपी मांगें।
- जरूरत पड़ने पर को-ऑपरेटिव कोर्ट का रुख करें।
- मेंटेनेंस और जुर्माने से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें।
यह फैसला न सिर्फ पार्किंग विवाद बल्कि सोसाइटी के मनमाने फैसले के खिलाफ सदस्यों के अधिकारों को मजबूत करता है।
(यह लेख मूल स्रोत पर आधारित स्वतंत्र विश्लेषण है। कानूनी सलाह के लिए योग्य वकील से संपर्क करें।)

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