हाउसिंग सोसाइटी में रहना सिर्फ फ्लैट खरीदना नहीं, बल्कि नियम-कानूनों का पालन भी है। कई बार सोसाइटी मेंशोर, मेंटेनेंस न भरने या नियमों का उल्लंघन करने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। हाल ही में महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट के एक मामले ने इस मुद्दे पर स्पष्टता दी है। सवाल यह है कि अगर हाउसिंग सोसाइटी 3/4 बहुमत से किसी सदस्य को सदस्यता से निकाल दे, तो क्या वह व्यक्ति अपना फ्लैट खाली करने या बेचने के लिए बाध्य है?
सदस्यता और मालिकाना हक अलग-अलग चीजें हैं
कानून के अनुसार सदस्यता (मेम्बरशिप) और फ्लैट का मालिकाना हक दो अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं।
सदस्यता एक को-ऑपरेटिव स्टेटस है।
फ्लैट का स्वामित्व प्रॉपर्टी राइट है।
एक को खोने से दूसरा अपने आप खत्म नहीं होता। अगर सोसाइटी किसी को सदस्यता से निकाल भी दे, तो भी वह व्यक्ति अपने फ्लैट का मालिक बना रहता है। वह सिर्फ सोसाइटी के निर्णयों में भाग नहीं ले पाएगा, वोटिंग अधिकार खो सकता है, लेकिन फ्लैट पर उसका अधिकार बना रहता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सदस्यता समाप्त होने का मतलब संपत्ति से बेदखली नहीं है। निकाले गए सदस्य को भी सोसाइटी के बुनियादी नियमों का पालन करना पड़ता है, लेकिन सोसाइटी उसे जबरन फ्लैट खाली करने का आदेश नहीं दे सकती।
सोसाइटी सदस्य को कैसे निकाल सकती है?
महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट की धारा 35 और संबंधित नियमों के तहत प्रक्रिया सख्त है:
सदस्य को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाना चाहिए।
जनरल बॉडी मीटिंग में कम से कम तीन-चौथाई (3/4) बहुमत से प्रस्ताव पास होना चाहिए।
प्रस्ताव को रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज की मंजूरी मिलनी जरूरी है।
बिना इन प्रक्रियाओं के निकाला जाना अवैध माना जा सकता है।
क्या सोसाइटी रेजोल्यूशन पास करके फ्लैट खाली करवा सकती है?
नहीं। मैनेजिंग कमेटी या जनरल बॉडी सिर्फ रेजोल्यूशन पास करके किसी मालिक को अपना फ्लैट खाली करने या बेचने का आदेश नहीं दे सकती। यह को-ऑपरेटिव कानून के दायरे में नहीं आता। बेदखली (इविक्शन) संबंधित राज्य के रेंट एक्ट या अन्य संपत्ति कानूनों के अंतर्गत आती है, न कि को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के।
अगर सदस्य लगातार शोर, परेशानी पैदा कर रहा हो, मेंटेनेंस न भर रहा हो या नियमों का उल्लंघन कर रहा हो, तो सोसाइटी कुछ मजबूत कदम उठा सकती है जैसे:
जुर्माना लगाना
सुविधाओं पर प्रतिबंध
रजिस्ट्रार के पास शिकायत
सदस्यता से निकालने की प्रक्रिया शुरू करना
लेकिन सीधे फ्लैट खाली कराने का अधिकार सोसाइटी को नहीं है।
किरायेदारों के मामले में क्या स्थिति है?
अगर फ्लैट किराए पर दिया गया है और किरायेदार परेशानी पैदा कर रहा है, तो भी सोसाइटी खुद किरायेदार को नहीं निकाल सकती। सोसाइटी मालिक को सूचित कर सकती है और नियम लागू करने के लिए कह सकती है। किरायेदार को निकालने का अधिकार मुख्य रूप से मालिक और रेंट कंट्रोल कानूनों पर निर्भर करता है।
निवासी और सोसाइटी दोनों के लिए सबक
सोसाइटी को नियम सख्ती से लागू करने चाहिए, लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
सदस्य/मालिक को समझना चाहिए कि सदस्यता खत्म होने से फ्लैट का अधिकार नहीं जाता।
विवाद होने पर रजिस्ट्रार, को-ऑपरेटिव कोर्ट या संबंधित अदालत का रुख करना बेहतर विकल्प है।
हाउसिंग सोसाइटी में शांति बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। कानून दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करता है — सोसाइटी के नियम लागू करने के अधिकार की भी और व्यक्तिगत संपत्ति के अधिकार की भी।
अगर आपके सोसाइटी में ऐसा कोई विवाद चल रहा है, तो योग्य वकील से सलाह जरूर लें क्योंकि हर केस के तथ्य अलग हो सकते हैं।
(नोट: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है। कानूनी सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।)

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