खराब टेरेस रिपेयर से दो फ्लैट्स में पानी लीकेज: महाराष्ट्र को-ऑप अपीलेट कोर्ट ने सीनियर सिटीजन को ₹3.96 लाख मुआवजा दिया
हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले कई फ्लैट ओनर्स को टेरेस या कॉमन एरिया की खराब मरम्मत से होने वाले नुकसान का सामना करना पड़ता है। हाल ही में महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो हाउसिंग सोसायटी और फ्लैट ओनर्स दोनों के लिए सबक है।
केस की कहानी
अंधेरी (ईस्ट), मुंबई के एक हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले सीनियर सिटीजन श्री शाह के पास टॉप फ्लोर के दो जुड़े हुए फ्लैट (नंबर 603 और 604) थे। 2006 में सोसायटी ने लगभग 30 साल पुरानी बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल रिपेयर का काम शुरू किया। सभी 28 फ्लैट्स से कुल लगभग ₹33.58 लाख वसूले गए। श्री शाह का हिस्सा दोनों फ्लैट्स के लिए ₹1.52 लाख था। इसके अलावा उन्होंने अपने फ्लैट की अतिरिक्त मरम्मत पर ₹2.66 लाख खर्च किए।
सोसायटी ने ठेकेदार को ₹27.44 लाख का कॉन्ट्रैक्ट दिया। टेरेस वाटरप्रूफिंग का काम मई 2007 में पूरा हुआ और इसमें 10 साल की गारंटी थी। लेकिन श्री शाह का आरोप था कि ठेकेदार के काम के दौरान आरसीसी स्लैब को नुकसान पहुंचा, जिससे उनके दोनों फ्लैट्स में भारी पानी का लीकेज शुरू हो गया। इससे सीलिंग, इलेक्ट्रिकल फिटिंग्स, पेंट, फर्नीचर और अन्य सामान खराब हो गए।
2009 से 2011 तक उन्होंने सोसायटी को बार-बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन समस्या हल नहीं हुई। 2012 में उन्होंने महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव कोर्ट में केस दायर किया। सोसायटी ने सुझाव दिया कि श्री शाह खुद ठेकेदार रखकर मरम्मत करवाएं और सोसायटी 50% खर्च देगी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उनका तर्क था कि टेरेस उनकी प्रॉपर्टी नहीं है और खराब काम सोसायटी के ठेकेदार का है, जिस पर 10 साल की गारंटी थी।
कोर्ट का फैसला (4 जुलाई 2026)
लगभग 14 साल की लड़ाई के बाद महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट ने श्री शाह के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि:
- टेरेस लीकेज ठीक करना सोसायटी की जिम्मेदारी है (बाय-लॉज के अनुसार)।
- श्री शाह ने पर्याप्त सबूत पेश किए – लिखित शिकायतें, नोटिस आदि।
- सोसायटी अपनी डिफेंस साबित नहीं कर पाई।
- हालांकि श्री शाह नुकसान की सटीक राशि (फर्नीचर आदि के बिल) साबित नहीं कर सके, फिर भी पानी लीकेज से शारीरिक-मानसिक परेशानी और कुछ वित्तीय नुकसान होना स्वाभाविक है।
कोर्ट ने ₹2 लाख मुआवजा + 7% सालाना सिंपल इंटरेस्ट (डिस्प्यूट फाइल करने की तारीख से भुगतान तक) देने का आदेश दिया। लगभग 14 साल का ब्याज जोड़कर कुल राशि लगभग ₹3.96 लाख बनती है। ब्याज भुगतान तक जारी रहेगा।
इस केस से क्या सीख लें? (Housing Society Solutions के टिप्स)
- हर शिकायत लिखित में करें – ईमेल, रजिस्टर्ड लेटर या acknowledgement लेकर। फोटो, वीडियो और डेटेड सबूत रखें।
- टेरेस और बाहरी दीवारें आमतौर पर कॉमन एरिया होती हैं। सोसायटी की बाय-लॉज चेक करें।
- ठेकेदार के कॉन्ट्रैक्ट में गारंटी और स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट जरूर मांगें।
- नुकसान के बिल, रसीदें और इंजीनियर की रिपोर्ट सुरक्षित रखें।
- समय पर कार्रवाई न करने पर सोसायटी को मुआवजा देना पड़ सकता है।
यह फैसला याद दिलाता है कि हाउसिंग सोसायटी कॉमन एरिया की सही मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदार है। अगर आप भी इसी तरह की समस्या से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लिखित शिकायत दर्ज करें और जरूरी सबूत इकट्ठा करें।
HousingSocietySolutions पर हम नियमित रूप से ऐसे केस स्टडीज, कानूनी अपडेट्स और प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस शेयर करते हैं। अपने सोसायटी के मुद्दों को हल करने के लिए जुड़े रहें!
(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। कानूनी सलाह के लिए योग्य वकील से संपर्क करें।)

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