शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

Builder (बिल्डर) और Bank (बैंक) का साइलेंट स्कैम: Under construction (अंडर कंस्ट्रक्शन) फ्लैट पर EMI + किराया चुकाने का सच | HousingSocietySolutions

भारत में हजारों होम बायर्स एक बड़े साइलेंट स्कैम का शिकार हो रहे हैं। बिल्डर बड़े-बड़े वादे करके फ्लैट बुक कराते हैं, बैंक आसानी से लोन दे देते हैं, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी या बिल्डर के दिवालिया होने पर खरीदार फंस जाते हैं। वे न तो अपना घर पाते हैं और न ही किराए से छुटकारा। साथ ही हर महीने EMI भी चुकानी पड़ती है।

समस्या क्या है?

  • बिल्डर प्रोजेक्ट को जानबूझकर या लापरवाही से विलंबित करता है या दिवालिया घोषित कर देता है।
  • खरीदार अभी भी अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर होम लोन की EMI भर रहा होता है।
  • साथ ही किराए का घर भी चल रहा होता है। यानी डबल खर्च।
  • बैंक आमतौर पर बिल्डर के पक्ष में ही नजर आता है क्योंकि लोन पहले से मंजूर हो चुका होता है।

यह समस्या खासकर उन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में ज्यादा दिखती है जहां RERA रजिस्ट्रेशन के बावजूद समय पर डिलीवरी नहीं होती।

हाउसिंग सोसाइटी और बायर्स क्या करें?

1. खरीदने से पहले सावधानी

  • सिर्फ RERA रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट ही खरीदें।
  • बिल्डर का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड, पेंडिंग प्रोजेक्ट्स और कोर्ट केस चेक करें।
  • बैंक से लोन लेते समय “project approved” लिस्ट में है या नहीं, इसकी पुष्टि जरूर करें।

2. एग्रीमेंट में क्या देखें

  • क्लियर पॉजेशन डेट और देरी पर पेनल्टी का क्लॉज होना चाहिए।
  • फोर्स मेजर क्लॉज को ध्यान से पढ़ें।
  • एस्क्रो अकाउंट की व्यवस्था है या नहीं, यह पूछें।

3. अगर प्रोजेक्ट अटक गया है

  • RERA अथॉरिटी में शिकायत दर्ज कराएं।
  • कंज्यूमर कोर्ट या NCLT में भी विकल्प उपलब्ध हैं।
  • बैंक से बात करके लोन रीस्ट्रक्चरिंग या EMI हॉलिडे की मांग करें (सफलता सीमित है, लेकिन कोशिश जरूर करें)।
  • अन्य प्रभावित खरीदारों के साथ मिलकर सोसाइटी/एसोसिएशन बनाएं। सामूहिक आवाज ज्यादा असरदार होती है।

4. हाउसिंग सोसाइटी के लिए सुझाव
अगर आपका प्रोजेक्ट आंशिक रूप से तैयार है और सोसाइटी बन चुकी है, तो:

  • नियमित रूप से बिल्डर से स्टेटस रिपोर्ट मांगें।
  • मेंटेनेंस और अन्य चार्जेस को बिल्डर के खिलाफ दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करें।
  • लीगल फंड इकट्ठा करके सामूहिक मुकदमा चलाएं।

बचाव के कुछ व्यावहारिक उपाय

  • जितना हो सके, तैयार फ्लैट या लगभग तैयार प्रोजेक्ट ही खरीदें।
  • डाउन पेमेंट ज्यादा रखकर लोन की राशि कम रखें।
  • किराए और EMI का दोहरा बोझ उठाने की क्षमता का पहले आकलन कर लें।
  • लोन दस्तावेजों में “builder-buyer agreement” की कॉपी जरूर रखें।

यह समस्या नई नहीं है, लेकिन जागरूकता बढ़ने और RERA के सख्त होने से कुछ राहत जरूर मिली है। फिर भी खरीदारों को खुद सतर्क रहना होगा। बैंक और बिल्डर दोनों के हित जुड़े होते हैं, इसलिए अंतिम जिम्मेदारी खरीदार पर ही आती है।

अगर आप भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं या अपने हाउसिंग सोसाइटी में ऐसी स्थिति है, तो कमेंट में अपना अनुभव साझा करें। Housing Society Solutions आपके सवालों और सुझावों का इंतजार कर रहा है।


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