सोमवार, 10 अगस्त 2026

माता-पिता ने बेटे को गिफ्ट किया फ्लैट वापस जीता, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेटे को खाली करने का आदेश दिया | सीनियर सिटीजन एक्ट

माता-पिता ने बेटे को अपना फ्लैट गिफ्ट किया था इस शर्त पर कि वह उनकी बुढ़ापे में देखभाल करेगा। लेकिन जब बेटा अपना वादा निभाने में विफल रहा, तो माता-पिता ने अदालत का रुख किया और फ्लैट वापस पा लिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

मुंबई के लोअर परेल में रहने वाले 68 वर्षीय रमेश बचाउलाल सोनी और उनकी पत्नी ने 8 मई 2023 को दो गिफ्ट डीड्स के जरिए अपने बेटे को लोअर परेल वाला फ्लैट पूरी तरह और बायकुल्ला वाले फ्लैट का आधा हिस्सा ट्रांसफर कर दिया। गिफ्ट डीड में साफ लिखा था कि बेटा और उसकी पत्नी माता-पिता की हर तरह से देखभाल करेंगे। फ्लैट की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च भी माता-पिता ने ही उठाया था।

कुछ समय बाद परिवारिक रिश्ते खराब हो गए। माता-पिता को अपना ही घर छोड़ना पड़ा। बायकुल्ला का फ्लैट अभी निर्माणाधीन था और बिल्डर ने ट्रांसफर के बाद माता-पिता को कब्जा नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि बुजुर्ग दंपति बेघर हो गए।

उन्होंने सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में केस दायर किया। 13 अप्रैल 2026 को ट्रिब्यूनल ने लोअर परेल फ्लैट की गिफ्ट डीड रद्द कर दी और बेटे को 60 दिनों के अंदर फ्लैट खाली करके माता-पिता को सौंपने का आदेश दिया।

बेटा बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। उसने दलील दी कि फ्लैट असल में उसने ही खरीदा था, पिता आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उनके पास और प्रॉपर्टीज भी हैं, और यह केस शायद बहनों की साजिश है।

लेकिन 7 जुलाई 2026 को एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अंखड़ की बेंच ने बेटे की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि गिफ्ट डीड में स्पष्ट शर्त थी कि बेटा माता-पिता की देखभाल करेगा। Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 की धारा 23 के तहत अगर ऐसी शर्त पर प्रॉपर्टी ट्रांसफर की गई हो और ट्रांसफरी अपनी जिम्मेदारी न निभाए, तो ट्रांसफर को धोखाधड़ी या दबाव माना जा सकता है और रद्द किया जा सकता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि माता-पिता की आर्थिक स्थिति इस कानून के लागू होने में कोई बाधा नहीं है। बेटे का बाद में देखभाल का ऑफर भी स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि कानून के तहत ट्रांसफर पहले ही प्रभावित हो चुका था।

यह फैसला सीनियर सिटीजन्स के अधिकारों की रक्षा करने वाला महत्वपूर्ण उदाहरण है। हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले बुजुर्ग माता-पिता अगर ऐसी स्थिति में फंसें तो उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जानना चाहिए। गिफ्ट डीड में शर्त लिखवाना और जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल का रुख करना उनके हित में हो सकता है।

HousingSocietySolutions ब्लॉग पर हम नियमित रूप से ऐसे कानूनी मामलों और हाउसिंग सोसाइटी से जुड़े मुद्दों पर जानकारी देते रहते हैं। अपने अधिकारों को जानें और सुरक्षित रहें।

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