दुबई के होमब्यूयर को मुंबई के 2 फ्लैट पर बिल्डर से पूरा रिफंड और ₹1.33 करोड़ ब्याज मिला। जानें MahaREAT का पूरा फैसला और होमब्यूयर्स के अधिकार।
अगर आप प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं या पहले से बुक कर चुके हैं, तो यह केस आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। दुबई में रहने वाले एक भारतीय होमब्यूयर ने मुंबई में दो फ्लैट बुक किए थे। लंबे विलंब के बाद उन्होंने बुकिंग रद्द कर दी। बिल्डर ने रिफंड में देरी की और कटौती करने की कोशिश की। लेकिन महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलीय ट्रिब्यूनल (MahaREAT) ने होमब्यूयर के पक्ष में फैसला सुनाया।
क्या था पूरा मामला?
2015 में श्री रघुवंशी (नाम बदला जा सकता है) ने मुंबई स्थित एक बिल्डर के दो फ्लैट बुक किए। उस समय वे दुबई के बिजनेस बे इलाके में रह रहे थे। बिल्डर के दुबई ऑफिस (शेख जायद रोड) से सारा कागजी काम हुआ।
फ्लैट की कीमतें: लगभग ₹2.35 करोड़ और ₹3.17 करोड़
उन्होंने करीब 20% राशि चुकाई – ₹48.73 लाख और ₹66.56 लाख (कुल करीब ₹1.15 करोड़)
एलॉटमेंट लेटर पर कब्जा देने की वादाशुदा तारीख: अप्रैल 2017 से पहले
लेकिन ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मई 2018 में मिला। यानी लगभग एक साल की देरी हो गई। साथ ही ड्राफ्ट सेल एग्रीमेंट में भी कई विसंगतियां नजर आईं, जो एलॉटमेंट लेटर से मेल नहीं खाती थीं।
इस वजह से होमब्यूयर ने बुकिंग रद्द कर दी और रिफंड मांगा।
बिल्डर ने क्या कहा?
बिल्डर ने कहा कि रिफंड तभी मिलेगा जब नए खरीदार मिल जाएंगे। साथ ही एलॉटमेंट लेटर के क्लॉज-12 का हवाला दिया। इस क्लॉज के अनुसार:
10% राशि लिक्विडेटेड डैमेज के रूप में जब्त की जा सकती है
1.5% प्रति माह (18% सालाना) ब्याज काटा जा सकता है
रिफंड नई बिक्री पर निर्भर करता है
यह शर्तें एकतरफा और होमब्यूयर के खिलाफ थीं।
MahaREAT का फैसला (1 जुलाई 2026)
होमब्यूयर ने रेरए ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज की। MahaREAT (जस्टिस एस.एस. शिंदे और डॉ. राजगोपाल देवर) ने फैसला सुनाया:
बिल्डर को दोनों फ्लैटों की पूरी राशि (₹48.73 लाख + ₹66.56 लाख) वापस करनी होगी
SBI के उच्चतम MCLR + 2% की दर से ब्याज देना होगा (भुगतान की तारीख से लेकर अंतिम भुगतान तक)
₹25,000 लागत भी देनी होगी
अनुमानित ब्याज करीब ₹1.33 करोड़ बैठता है। यानी होमब्यूयर को कुल काफी बड़ी राहत मिली।
फैसला क्यों होमब्यूयर के पक्ष में गया?
एकतरफा क्लॉज अवैध – क्लॉज-12 बिल्डर के पक्ष में बहुत ज्यादा झुका हुआ था। MahaREAT ने इसे मनमाना, अनुचित और गैर-कानूनी करार दिया। RERA के तहत होमब्यूयर के अधिकारों को ऐसे क्लॉज से खत्म नहीं किया जा सकता।
MOFA का उल्लंघन – महाराष्ट्र ओनरशिप ऑफ फ्लैट्स एक्ट, 1963 की धारा 4(1) के अनुसार, एडवांस लेने से पहले रजिस्टर्ड सेल एग्रीमेंट होना जरूरी है। बिल्डर ने 20% राशि ले ली लेकिन एग्रीमेंट नहीं कराया।
RERA की धारा 18 – अगर बिल्डर वादाशुदा समय पर कब्जा नहीं देता, तो होमब्यूयर रिफंड और ब्याज का हकदार होता है।
मॉडल एलॉटमेंट लेटर – 2024 में MahaRERA ने मॉडल एलॉटमेंट लेटर जारी किया है। इसमें कैंसलेशन पर अधिकतम 2% तक कटौती की अनुमति है। बाकी राशि 45 दिनों में लौटानी होती है, नहीं तो ब्याज लगेगा।
होमब्यूयर्स के लिए सीख
यह केस साफ बताता है कि:
एकतरफा शर्तों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
विलंब होने पर RERA और MahaREAT आपके मजबूत सहयोगी हैं।
हमेशा रजिस्टर्ड एग्रीमेंट पर जोर दें।
एलॉटमेंट लेटर की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ें।
अगर आपके फ्लैट की डिलीवरी में देरी हो रही है या बिल्डर रिफंड में आनाकानी कर रहा है, तो तुरंत कानूनी सलाह लें। RERA आपके अधिकारों की रक्षा करता है।
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क्या आपके साथ भी ऐसा कोई अनुभव रहा है? कमेंट में बताएं।
(Ctsy: Economic Times)

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