शनिवार, 27 जून 2026

होमबायर्स के लिए बड़ी राहत!बिल्डर ने 9 साल तक सोसाइटी गठन में देरी की, होमबायर्स ने खुद संभाला काम; बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिए होमबायर्स को बड़ा समर्थन |HousingSocietySolutions

महाराष्ट्र में होमबायर्स के लिए बड़ी राहत! जब बिल्डर 9 साल तक हाउसिंग सोसाइटी नहीं बना पाया तो खरीदारों ने खुद सिंगल सोसाइटी रजिस्टर कर ली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिल्डर की अपील खारिज कर दी। जानें पूरी कहानी और कानूनी पहलू।

बिल्डर ने 9 साल तक सोसाइटी गठन में लगाई देरी, होमबायर्स ने खुद बनाई सिंगल सोसाइटी; बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला 

पुणे के बावधन खुर्द में एक बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट के होमबायर्स के लिए 9 साल की इंतजारी के बाद राहत की खबर आई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने होमबायर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए साफ कहा कि बिल्डर अनिश्चितकाल तक सोसाइटी गठन में देरी नहीं कर सकता। खरीदारों को खुद सोसाइटी बनाने का अधिकार है, खासकर जब प्रोजेक्ट में शेयर्ड एमेनिटीज़ हों। 

क्या था पूरा मामला?

बिल्डर ने पुणे के बावधन खुर्द क्षेत्र में लगभग 5 हेक्टेयर 20 आर भूमि पर मल्टी-टावर और विला वाला प्रोजेक्ट विकसित किया। इसमें टावर-1 (MOFA), टावर-2 और 3 (RERA) तथा 35 बंगले शामिल थे। बिल्डर ने फ्लैट्स की पजेशन दी, लेकिन 9 साल तक हाउसिंग सोसाइटी का गठन नहीं किया।टावर 1, 2 और 3 के होमबायर्स ने इंतजार के बाद जनवरी 2023 में बिल्डर को नोटिस दिया और फरवरी 2023 में डिप्टी रजिस्ट्रार के पास सिंगल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी बनाने का आवेदन दायर किया। अक्टूबर 2023 में इस सिंगल सोसाइटी को रजिस्ट्रेशन भी मिल गया।बिल्डर ने अलग-अलग टावर्स के लिए अलग-अलग सोसाइटी बनाने की योजना बताई और कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को बिल्डर की अपील खारिज कर दी और होमबायर्स द्वारा बनाई गई सिंगल सोसाइटी को वैध माना। 

हाईकोर्ट ने क्यों दिया होमबायर्स को समर्थन?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:

समय-सीमा का पालन जरूरी: MOFA एक्ट की धारा 10 और RERA नियम 9 के तहत बिल्डर को पर्याप्त फ्लैट्स बेचने के 3 महीने के अंदर सोसाइटी गठन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। सिर्फ ईमेल भेजना या कागजात तैयार रखना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि “तैयार और इच्छुक होना” कानूनी अनुपालन नहीं है।

सिंगल सोसाइटी की अनुमति: जब प्रोजेक्ट एक इंटीग्रेटेड लेआउट हो, शेयर्ड एमेनिटीज़, कॉमन एरिया और इंफ्रास्ट्रक्चर साझा हों, तो सिंगल सोसाइटी बनाई जा सकती है। हर टावर के लिए अलग सोसाइटी अनिवार्य नहीं है।

होमबायर्स का अधिकार: अगर बिल्डर समय पर कार्रवाई नहीं करता तो खरीदारों को खुद सोसाइटी बनाने का अधिकार है। खरीदार पैसे लगाकर पजेशन ले चुके हैं, उन्हें कॉमन एरिया का प्रबंधन और रखरखाव के लिए संगठन चाहिए।

एडवोकेट चंद्रकांत चौधरी के अनुसार, यह फैसला महाराष्ट्र के होमबायर्स के लिए मील का पत्थर है। इससे बिल्डर्स को साफ संदेश जाता है कि सोसाइटी गठन को अपनी सुविधा के अनुसार टालना अब संभव नहीं रहेगा। 

HousingSocietySolutions से सीख

यह केस हाउसिंग सोसाइटी मैनेजमेंट और कानूनी अधिकारों की अहमियत को रेखांकित करता है:

समय पर कार्रवाई करें — अगर बिल्डर 3-6 महीने में सोसाइटी नहीं बना रहा तो नोटिस भेजें और रजिस्ट्रार के पास आवेदन करें।

मेजोरिटी का फैसला — अधिकांश फ्लैट ओनर्स की सहमति से सिंगल सोसाइटी बनाना संभव है, खासकर शेयर्ड सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स में।

कानूनी सहायता लें — MOFA, RERA और महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के प्रावधानों का सही उपयोग करें।

दस्तावेज सुरक्षित रखें — एग्रीमेंट, पजेशन लेटर, पेमेंट रसीदें आदि।

निष्कर्ष:

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला उन हजारों होमबायर्स के लिए उम्मीद की किरण है जो बिल्डर की देरी से परेशान हैं। अब सोसाइटी गठन बिल्डर की मर्जी पर नहीं, बल्कि कानून और खरीदारों के सामूहिक हित पर निर्भर करेगा।अगर आपकी सोसाइटी भी इसी समस्या का सामना कर रही है तो कमेंट में बताएं। HousingSocietySolutions पर हम ऐसी कानूनी खबरों, गाइड और सलाह के साथ आपकी मदद करते रहेंगे।




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