शुक्रवार, 26 जून 2026

होमबायर्स के अधिकारों की जीत..होमबायर को 3 साल की देरी पर पूरा रिफंड + ₹1.57 करोड़ ब्याज: महारेराट का बड़ा फैसला | MHADA-MCGM विवाद बहाना नहीं चला

महारेराट ने बिल्डर को 3 साल की पजेशन देरी पर ₹1.43 करोड़ का पूरा रिफंड + ₹1.57 करोड़ ब्याज देने का आदेश दिया। MHADA-MCGM विवाद को बहाना मानने से इनकार। होमबायर्स के अधिकारों की जीतHousingSocietySolutions पर पूरी डिटेल पढ़ें।

होमबायर को 3 साल की देरी पर पूरा रिफंड + ₹1.57 करोड़ ब्याज: महारेराट का बिल्डर-विरोधी बड़ा फैसला

मुंबई। रियल एस्टेट में पजेशन की देरी अब बिल्डरों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल (MahaREAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में होमबायर के पक्ष में फैसला सुनाया है। बिल्डर द्वारा MHADA और MCGM के बीच विवाद का हवाला देकर 3 साल से ज्यादा देरी करने पर कोर्ट ने पूरे पैसे का रिफंड के साथ ₹1.57 करोड़ ब्याज देने का आदेश दिया है।यह फैसला उन हजारों होमबायर्स के लिए राहत भरा संदेश है जो बिल्डरों के वादों पर भरोसा करके फ्लैट बुक करते हैं और सालों-साल इंतजार करते रहते हैं।

केस की पूरी डिटेल्स

बुकिंग की तारीख: 22 मार्च 2015

प्रॉमिस्ड पजेशन डेट: 22 सितंबर 2017 (30 महीने बाद)

फ्लैट की कीमत: ₹1.5875 करोड़

होमबायर द्वारा भुगतान: ₹1.4313 करोड़

पूर्ण ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट: अप्रैल 2021 (लगभग 3.5 साल की देरी)

बिल्डर ने मार्च 2018 में सिर्फ "फिट-आउट पजेशन" ऑफर किया, जिसमें ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं था। 14वीं मंजिल का फ्लैट होने के कारण होमबायर ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और MahaRERA में शिकायत की।

बिल्डर का बचाव और ट्रिब्यूनल का जवाब

बिल्डर ने MHADA और MCGM के बीच प्लानिंग अथॉरिटी विवाद को मुख्य वजह बताया। लेकिन MahaREAT ने साफ कहा:विवाद पजेशन डेट (सितंबर 2017) से पहले से मौजूद था।

बिल्डर को सरकारी विभागों के बीच कोऑर्डिनेशन की समस्या अपने जोखिम पर सुलझानी चाहिए।

RERA एक्ट की धारा 18 के तहत पजेशन डेट पार होने पर होमबायर को ब्याज का वैधानिक अधिकार है।

फोर्स मेज्योर (Clause 30) का हवाला नहीं चलेगा क्योंकि सरकारी अनुमतियों में देरी प्राकृतिक आपदा नहीं है।

ट्रिब्यूनल ने बिल्डर को ₹1.4313 करोड़ का पूरा रिफंड + SBI के सबसे ऊंचे MCLR + 2% ब्याज (भुगतान की तारीख से) देने का आदेश दिया। अनुमानित ब्याज ₹1.57 करोड़ है। साथ ही कैंसिलेशन डीड 2 महीने में एक्जीक्यूट करने को कहा गया, ताकि होमबायर स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन आदि सरकारी टैक्स वापस ले सके।

होमबायर्स के लिए महत्वपूर्ण सीखें (HousingSocietySolutions सलाह)

पजेशन डेट sacrosanct है — बिल्डर प्रोजेक्ट की पूरी होने की तारीख बढ़ा ले तो भी आपकी एग्रीमेंट वाली डेट नहीं बदलती, जब तक आप लिखित सहमति न दें।

सरकारी विवाद बहाना नहीं — MHADA, MCGM, BMC या अन्य अथॉरिटी के बीच का विवाद बिल्डर का रिस्क है।

ब्याज की गणना — पैसे जमा करने की तारीख से ब्याज मिलता है, न कि केवल पजेशन ड्यू डेट से।

रिफंड + स्टैट्यूटरी पेमेंट्स — RERA में रद्द करने पर पूरा पैसा + ब्याज मिलना चाहिए।

निष्कर्ष:

यह फैसला RERA को और मजबूत बनाता है। अगर आपका बिल्डर पजेशन नहीं दे रहा है या MHADA/BMC/MCGM विवाद का हवाला दे रहा है, तो तुरंत MahaRERA में शिकायत करें। देरी जितनी लंबी, मुआवजा उतना बड़ा।

HousingSocietySolutions हमेशा सदस्यों को सलाह देता है कि एग्रीमेंट फॉर सेल को ध्यान से पढ़ें, पजेशन डेट और पेनाल्टी क्लॉज चेक करें, और समय पर कानूनी कदम उठाएं।



 


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