सोमवार, 21 सितंबर 2026

बिल्डर-हाउसिंग सोसाइटी पार्किंग विवाद में होमबायर को राहत: महाराष्ट्र कोर्ट ने पार्किंग अधिकार सुरक्षित रखे l होमबायर्स के लिए सबक l HousingSocietySolutions


होमबायर बिल्डर और हाउसिंग सोसाइटी के पार्किंग विवाद में फंसे, महाराष्ट्र कोर्ट ने दी राहत

महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम फैसले में दो होमबायर्स के पार्किंग अधिकारों की रक्षा की है। बोरीवली (वेस्ट) के मिस्टर और मिसेज माहेय को उनके हाउसिंग सोसाइटी द्वारा पार्किंग स्पेस छीनने की कोशिश के बावजूद अस्थायी सुरक्षा मिल गई है।

मामला क्या था?

मिस्टर और मिसेज माहेय ने 2009 में बिल्डर से सीधे फेज-1 प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदा था। बिल्डर ने उन्हें पार्किंग नंबर GO/26 आवंटित किया था। सोसाइटी बनने के बाद पार्किंग एरिया पूरी तरह भरे होने के कारण सोसाइटी ने बाईलॉ नंबर 78(a) और (b) के तहत “फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व्ड” पार्किंग पॉलिसी लागू करने का फैसला किया।

सोसाइटी ने सभी सदस्यों से पार्किंग आवंटन पत्र मांगे। कुछ होमबायर्स (जिनमें माहेय दंपति भी शामिल थे) ने अपने पार्किंग स्पेस पर नंबर पेंट कर दिया, जिसके बाद सोसाइटी ने स्पष्टीकरण मांगा। ट्रायल कोर्ट ने पहले ही अंतरिम सुरक्षा आदेश दे दिया था।

विवाद और जटिल क्यों बना?

फेज-1 सोसाइटी का दावा था कि वह पार्किंग स्पेस उनका है। बिल्डर का कहना था कि वह जगह खुली जगह (रिक्रिएशन ग्राउंड) का हिस्सा है जहां वे ग्राउंड बनाना चाहते हैं। वहीं फेज-2 सोसाइटी ने दावा किया कि ये 18 पार्किंग स्लॉट्स उनके हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से नोट किया कि फेज-1 सोसाइटी, फेज-2 सोसाइटी और बिल्डर के बीच 18 पार्किंग स्लॉट्स तथा रिक्रिएशन/ओपन एरिया को लेकर विवाद है।

कोर्ट का फैसला

3 सितंबर 2026 के अंतरिम निर्णय में महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट ने फेज-1 सोसाइटी की अपील खारिज कर दी और मिस्टर-मिसेज माहेय के पार्किंग अधिकारों की सुरक्षा जारी रखी। कोर्ट ने सोसाइटी को आदेश दिया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा इस विवादित पार्किंग/रिक्रिएशन एरिया के मालिकाना हक का फैसला होने तक वे माहेय दंपति के GO/26 पार्किंग स्पेस में कोई हस्तक्षेप न करें।

कोर्ट ने पाया कि:

होमबायर्स के पास 14 मई 2008 का पार्किंग आवंटन पत्र था, जिसे सोसाइटी ने भी मान्यता दी थी।

सोसाइटी के खुद के प्लान और जनरल बॉडी मीटिंग मिनट्स से साफ था कि विवादित स्पेस फेज-2 से जुड़ा हो सकता है।

प्राइमा फेसी (prima facie) केस होमबायर्स के पक्ष में था और बैलेंस ऑफ कन्वीनिएंस भी उनके हक में था। सुरक्षा न देने से उन्हें अपूरणीय नुकसान हो सकता था।

यह फैसला केवल अंतरिम सुरक्षा है। पार्किंग स्पेस के अंतिम मालिकाना हक का फैसला अभी ट्रायल कोर्ट में लंबित है।

होमबायर्स के लिए सबक l 

यह मामला हाउसिंग सोसाइटीज में पार्किंग विवादों की जटिलता को उजागर करता है। बिल्डर द्वारा आवंटित पार्किंग, सोसाइटी की नई पॉलिसी और कई फेजेस के बीच विवाद अक्सर होमबायर्स को मुश्किल में डाल देते हैं। महाराष्ट्र कोर्ट का यह रुख साफ करता है कि जब तक मालिकाना हक स्पष्ट न हो, सोसाइटी एकतरफा कार्रवाई नहीं कर सकती।

HousingSocietySolutions ब्लॉग पर हम नियमित रूप से ऐसे कानूनी अपडेट्स और सोसाइटी संबंधी समाधान साझा करते हैं। पार्किंग, मेंटेनेंस या अन्य विवादों में फंसे हैं तो सही जानकारी से खुद को सुरक्षित रखें।

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