होम लोन अप्रूवल का मतलब क्या प्रॉपर्टी का टाइटल पूरी तरह क्लियर है? कई होमबायर्स यही समझते हैं कि बैंक या NBFC ने लोन दे दिया तो कानूनी जांच पूरी हो चुकी होगी और प्रॉपर्टी में कोई विवाद नहीं होगा। लेकिन हकीकत इससे अलग है।
बैंक या लोन देने वाली संस्था की लीगल टीम जो जांच करती है, वह मुख्य रूप से अपनी सुरक्षा के लिए होती है। उनका फोकस यह देखने पर होता है कि अगर लोन नहीं चुकाया गया तो प्रॉपर्टी बेचकर पैसा वसूल किया जा सके, प्रॉपर्टी की वैल्यू सही है या नहीं, और बायर लोन की किस्तें भर पाएगा या नहीं। होमबायर के भविष्य के विवाद या टाइटल की पूरी सफाई उनकी प्राथमिकता नहीं होती।
बैंक की जांच और बायर की जरूरत में अंतर
एक्सपर्ट्स के अनुसार, बैंक का टाइटल वेरिफिकेशन सीमित होता है। वे प्रॉपर्टी पर अपना सिक्योर्ड इंटरेस्ट सुरक्षित रखना चाहते हैं। वहीं होमबायर को फ्लैट, उस बिल्डिंग की जमीन और पूरी बिल्डिंग के टाइटल, बकाया सरकारी बकाया (statutory dues), और सभी अप्रूवल्स की जांच करनी चाहिए। बैंक अक्सर इन पहलुओं को विस्तार से नहीं देखता।
भारत में “implied warranty” का कोई कानून नहीं है। यहां “Caveat Emptor” यानी “खरीदार सावधान रहे” का सिद्धांत लागू होता है। होम लोन एग्रीमेंट में भी बायर खुद टाइटल की जिम्मेदारी लेता है। अगर बाद में कोई विवाद निकलता है तो जिम्मेदारी बायर की होती है, बैंक की नहीं।
क्या करना चाहिए होमबायर्स को?
- स्वतंत्र कानूनी सलाह लें – बैंक के वकील पर निर्भर न रहें। अपनी तरफ से अनुभवी रियल एस्टेट वकील से टाइटल सर्च और ड्यू डिलिजेंस करवाएं।
- सभी दस्तावेज ध्यान से जांचें – सेल डीड, मदर डीड, अप्रूवल लेटर्स, एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट, टैक्स रसीदें और किसी भी तरह के बकाया की जांच जरूर करें।
- ‘As is where is’ आधार समझें – बैंक जब SARFAESI के तहत जब्त प्रॉपर्टी बेचता है तो अक्सर “जैसे है वैसे” बेचता है। इसमें छिपे विवाद हो सकते हैं।
- प्रोजेक्ट और बिल्डर की भी जांच करें – RERA रजिस्ट्रेशन, पिछले प्रोजेक्ट्स का रिकॉर्ड और बिल्डर की वित्तीय स्थिति देखें।
होम लोन सिर्फ फाइनेंसिंग का जरिया है, प्रॉपर्टी के क्लियर टाइटल की गारंटी नहीं। अपना पैसा लगाने से पहले स्वतंत्र जांच करवाएं। सही ड्यू डिलिजेंस से आप भविष्य के कानूनी झंझट और नुकसान से बच सकते हैं।
HousingSocietySolutions पर हम हमेशा सलाह देते हैं – प्रॉपर्टी खरीदते समय जल्दबाजी न करें। कानूनी सुरक्षा आपके निवेश की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले योग्य कानूनी सलाहकार से जरूर परामर्श लें।)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें