सोमवार, 20 जुलाई 2026

मुंबई में 4 करोड़ का फ्लैट खरीदा, फिर भी हाउसिंग सोसाइटी बालकनी में कपड़े सुखाने से रोक सकती है? कानूनी सच्चाई जानें |HousingSocietySolutions

मुंबई के लग्जरी हाउसिंग सोसाइटी में बालकनी पर कपड़े सुखाना प्रतिबंधित? क्या सोसाइटी यह नियम लगा सकती है? कानूनी प्रावधान, बाय-लॉ और समाधान के बारे में विस्तार से पढ़ें।

मुंबई में 4 करोड़ का फ्लैट खरीदा, फिर भी हाउसिंग सोसाइटी बालकनी में कपड़े सुखाने से रोक सकती है? कानूनी सच्चाई और समाधान

मुंबई जैसे महंगे शहर में करोड़ों रुपये का फ्लैट खरीदने के बाद भी कई रेसिडेंट्स को बालकनी पर कपड़े सुखाने की आजादी नहीं मिलती। वर्ली, बांद्रा, पवई, लोअर परेल जैसे एरिया की प्रीमियम हाउसिंग सोसाइटीज में यह नियम आम होता जा रहा है। क्या आपकी सोसाइटी आपको अपने बालकनी का इस्तेमाल इस तरह रोक सकती है? आइए विस्तार से समझते हैं।

क्यों लगाते हैं सोसाइटीज ऐसे नियम?

प्रीमियम सोसाइटीज का मुख्य मकसद बिल्डिंग की सुंदरता (aesthetic) बनाए रखना, प्रॉपर्टी वैल्यू प्रोटेक्ट करना और यूनिफॉर्म लुक देना होता है। कपड़े सुखाने से:

बिल्डिंग की aesthetic खराब दिखती है

नीचे वाले फ्लैट पर पानी टपकने की शिकायतें आती हैं

सेफ्टी रिस्क (ड्राईंग रैक गिरने का खतरा)

मॉनसून में फंगस और बदबू की समस्या

इसीलिए कई सोसाइटीज बाय-लॉ में साफ-साफ लिखती हैं कि बालकनी या विंडो से बाहर कुछ भी नहीं लटकाना है।

कानून क्या कहता है? (महाराष्ट्र में)

कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटीज**: महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट 1960 और रजिस्टर्ड बाय-लॉज के तहत सोसाइटीज नियम बना सकती हैं। अगर यह नियम बाय-लॉ का हिस्सा है तो ज्यादातर मामलों में लागू होता है।

कंडोमिनियम (Apartment Ownership)**: महाराष्ट्र अपार्टमेंट ओनरशिप रूल्स 1972 के Rule 44 के तहत विंडो, बालकनी या बिल्डिंग की बाहरी दीवार पर कपड़े, गलीचे आदि लटकाना प्रतिबंधित है।

मुंबई में कोई सामान्य म्यूनिसिपल कानून बालकनी पर कपड़े सुखाने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाता, लेकिन सोसाइटी के रजिस्टर्ड नियम बाइंडिंग हो सकते हैं।

नोट: नियम बनाने का अधिकार सोसाइटी को है, लेकिन अनुचित या मनमाना नियम को चैलेंज किया जा सकता है।

क्या फाइन लग सकता है?

अगर बाय-लॉ में सजा का प्रावधान है तो सोसाइटी नोटिस दे सकती है और फाइन लगा सकती है। लेकिन अगर सिर्फ अनौपचारिक हाउस रूल है और बाय-लॉ में नहीं लिखा, तो फाइन को लेकर विवाद हो सकता है। कई मामलों में मैनेजमेंट पहले वार्निंग देता है।


व्यावहारिक समाधान – HousingSocietySolutions की सलाह

यूटिलिटी बालकनी / ड्राई बालकनी का इस्तेमाल करें (अगर उपलब्ध हो)।

सीलिंग माउंटेड ड्राईंग रैक लगवाएं – ये अंदर से लगते हैं और बाहर से नहीं दिखते।

इनडोर क्लॉथ्स ड्रायर या वॉशिंग मशीन के ड्रायर फंक्शन का उपयोग करें।

सोसाइटी मीटिंग में चर्चा करें – कुछ सोसाइटीज डिजाइनेटेड ड्राइंग एरिया बना रही हैं।

बाय-लॉ चेक करें – फ्लैट खरीदते समय या अब रजिस्टर्ड बाय-लॉ की कॉपी मांगें।

अगर नियम बहुत सख्त लगे तो लीगल नोटिस या MahaRERA/कॉपरेटिव डिपार्टमेंट से सलाह लें।


निष्कर्ष

4 करोड़ या उससे ज्यादा का फ्लैट खरीदने के बाद भी आपकी निजी संपत्ति पर सोसाइटी के कुछ सामूहिक नियम लागू हो सकते हैं। लेकिन अच्छी सोसाइटी में बैलेंस रहता है – रेसिडेंट्स की सुविधा और बिल्डिंग की इमेज दोनों का ध्यान रखा जाता है।

HousingSocietySolutions की सलाह: 

फ्लैट खरीदने से पहले बाय-लॉ अच्छे से पढ़ें, ड्राइंग स्पेस के बारे में डेवलपर से पूछें और बोर्ड में शामिल होकर नियमों को रीजनेबल बनाने में मदद करें।


आपकी सोसाइटी में ऐसा नियम है? कमेंट में अपना अनुभव शेयर करें।


शनिवार, 18 जुलाई 2026

हाउसिंग सोसाइटी के लिए महत्वपूर्ण खबर...बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अपार्टमेंट में बालकनी-टेरेस एनक्लोजर और फ्लैट रेनोवेशन पर महाराष्ट्र सरकार को गाइडलाइंस बनाने का आदेश | HousingSocietySolutions

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को अपार्टमेंट फ्लैट्स में बालकनी/टेरेस बंद करने, ग्रिल लगाने और आंतरिक बदलावों के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया। हाउसिंग सोसाइटी में रेनोवेशन नियम, NOC और कानूनी सलाह जानें।

बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्देश: अपार्टमेंट बालकनी-टेरेस एनक्लोजर और फ्लैट रेनोवेशन पर गाइडलाइंस जरूरी

नमस्ते हाउसिंग सोसाइटी सदस्यों और फ्लैट ओनर्स! 

अगर आपकी सोसाइटी में बालकनी को बंद करने, ग्रिल लगाने, शेड बनाने या फ्लैट के अंदर दीवारें हटाने-जोड़ने जैसे काम आम हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 17 जुलाई 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को अपार्टमेंट फ्लैट्स में बालकनी, टेरेस एनक्लोजर और आंतरिक बदलावों (internal alterations) के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने क्यों दिया यह आदेश?

फ्लैट ओनर्स अक्सर अपनी सुविधा के लिए:

बालकनी या टेरेस पर ग्रिल/शेड लगाते हैं

पार्टिशन वॉल्स बदलते या हटाते हैं

अन्य संरचनात्मक बदलाव करते हैं

ये बदलाव बिना किसी स्पष्ट नियम के हो रहे थे, जिससे सुरक्षा, बिल्डिंग स्ट्रक्चर और सोसाइटी के कॉमन एरिया पर असर पड़ता है। कोर्ट ने इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को परमिसिबल अल्टरेशन्स (स्वीकार्य बदलाव) के लिए गाइडलाइंस तैयार करने को कहा। जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने यह फैसला सुनाया।

हाउसिंग सोसाइटी के लिए क्या मायने रखता है?

बालकनी/टेरेस एनक्लोजर: कई लोग बालकनी को लिविंग रूम में शामिल करने या शेड लगाने के लिए करते हैं। अब स्पष्ट नियम आने के बाद बिना अनुमति के ऐसे काम रुक सकते हैं।

आंतरिक रेनोवेशन: लोड बेयरिंग वॉल हटाना, बाथरूम शिफ्ट करना या एक्सटर्नल वॉल बदलना आमतौर पर BMC/स्थानीय अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता।

सोसाइटी की भूमिका: सोसाइटी मैनेजमेंट को अब इन बदलावों के लिए लिखित NOC देना या रोकना आसान हो जाएगा।

नोट: छोटे-मोटे रिपेयर (जैसे टाइल्स बदलना, पेंटिंग, फॉल्स सीलिंग) आमतौर पर बिना मेजर परमिशन के हो सकते हैं, लेकिन स्ट्रक्चरल बदलावों के लिए हमेशा अनुमति लें।

फ्लैट ओनर्स को क्या करना चाहिए?

वर्तमान में**: कोई रेनोवेशन प्लान है तो पहले अपनी हाउसिंग सोसाइटी से लिखित अनुमति लें। जरूरत पड़ने पर BMC या स्थानीय नगरपालिका से अप्रूवल लें।

सुरक्षा का ध्यान**: बालकनी ग्रिल लगाते समय बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। ग्लास रेलिंग वाले मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतें।

कानूनी सलाह**: बड़े बदलावों से पहले आर्किटेक्ट/सिविल इंजीनियर और लीगल एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें ताकि बाद में डिस्प्यूट न हो।

सरकार की गाइडलाइंस का इंतजार**: कोर्ट के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार जल्द ही विस्तृत गाइडलाइंस जारी करेगी, जो पूरे राज्य के अपार्टमेंट्स पर लागू होंगी।

क्यों जरूरी हैं ये गाइडलाइंस?

बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल सेफ्टी बनी रहे

फायर सेफ्टी और वेंटिलेशन प्रभावित न हो

सोसाइटी में एक सदस्य के बदलाव से दूसरे को परेशानी न हो

अनधिकृत निर्माण पर अंकुश लगे

HousingSocietySolutions की सलाह: हर बदलाव से पहले सोसाइटी bye-laws, Model Bye-laws और स्थानीय डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशंस (DCR) चेक करें। पारदर्शिता रखें ताकि सोसाइटी का माहौल अच्छा रहे।

आपकी सोसाइटी में बालकनी या टेरेस रेनोवेशन से जुड़ी कोई समस्या है? कमेंट में बताएं। हम और ज्यादा उपयोगी जानकारी लेकर आएंगे।

अपडेट रहें – हम महाराष्ट्र सरकार की नई गाइडलाइंस आने पर तुरंत डिटेल्स शेयर करेंगे।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। कानूनी सलाह के लिए वकील या अथॉरिटी से संपर्क करें।


DDA ने आसान किए फ्लैट में बदलाव के नियम: EV चार्जर, सोलर पैनल, लॉफ्ट बिना परमिशन, जानें नई पॉलिसी के फायदे | HousingSocietySolutions

DDA फ्लैट अल्टरेशन नियम 2026: आसान अप्रूवल, क्या-क्या कर सकते हैं बिना अनुमति  

दिल्ली DDA हाउसिंग में बदलाव अब आसान, नई पॉलिसी से मिलेंगे बड़े फायदे  

DDA Eases Norms for Additions & Alterations: Rooftop Solar, EV Charging Points Allowed

DDA ने आसान किए फ्लैट में बदलाव के नियम: EV चार्जर, सोलर पैनल और कई सुविधाएं बिना परमिशन, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली: दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने अपने फ्लैटों में एडिशन और अल्टरेशन (Additions & Alterations) के नियमों को काफी सरल बना दिया है। नई पॉलिसी के तहत अब रेसिडेंट्स EV चार्जिंग पॉइंट, रूफटॉप सोलर पैनल, लॉफ्ट, एक्सेसिबिलिटी रैंप जैसी कई जरूरी सुविधाएं आसानी से लगा सकते हैं। यह बदलाव DDA हाउसिंग सोसाइटी के रेसिडेंट्स के लिए बड़ी राहत है।

नई नीति पहले से लागू हो चुकी है। DDA ने तीन श्रेणियों में कामों को बांटा है – बिना अनुमति वाले, इंटिमेशन वाले और अप्रूवल वाले। इससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो गई है।

बिना अनुमति के कर सकते हैं ये काम

DDA की नई पॉलिसी के अनुसार निम्नलिखित बदलाव बिना किसी पूर्व अनुमति के किए जा सकते हैं:


पार्किंग एरिया में EV चार्जिंग पॉइंट लगाना (केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार)

लॉफ्ट बनाना

अतिरिक्त PVC वॉटर टैंक लगाना

एक्सेसिबिलिटी रैंप (विकलांगों के लिए) बनाना

रूफटॉप वॉटर स्टोरेज को बदलना या बढ़ाना

विंडो को क्यूपबोर्ड में बदलना (निर्धारित शर्तों के साथ)

एग्जॉस्ट फैन या विंडो AC के लिए ओपनिंग बनाना

इंटिमेशन प्रक्रिया से किए जाने वाले काम

हल्के वजन वाले मटेरियल से टेम्पररी स्लोपिंग टेरेस कवर और ग्लेजिंग

अप्रूवल के साथ किए जा सकने वाले बड़े बदलाव

किचन, बाथरूम और टॉयलेट की लोकेशन बदलना

कॉमन स्टेयरकेस को टेरेस लेवल तक एक्सटेंड करना (मम्टी सहित)

कुछ सिंगल-स्टोरी और डुप्लेक्स फ्लैटों का रीकंस्ट्रक्शन

कोर्टयार्ड को फर्स्ट फ्लोर तक कवर करना

रियर कोर्टयार्ड में बाथरूम/टॉयलेट बनाना

रूफटॉप सोलर पैनल** लगाना (घरेलू उपयोग के लिए, MNRE गाइडलाइंस के अनुसार)

नोट: इन कामों के लिए रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से सर्टिफिकेशन जरूरी है।

पहले से किए गए अवैध बदलावों को रेगुलराइज करने का मौका

DDA ने पुराने अनऑथराइज्ड बदलावों को भी रेगुलराइज करने का प्रावधान रखा है, बशर्ते वे नई पॉलिसी की सीमा के अंदर हों। इससे कई रेसिडेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी।

सुरक्षा और समयबद्ध प्रक्रिया

30 दिनों के अंदर अप्रूवल या अस्वीकृति का फैसला आना चाहिए।

काम पूरा होने के बाद अथॉरिटी को इंटिमेट करना अनिवार्य।

3 साल में कंप्लीशन रिपोर्ट न देने पर परमिशन खत्म हो जाएगी।

पुरानी इमारतों (21 मार्च 2001 से पहले) में स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी हो सकता है।

DDA अधिकारी के अनुसार, नई पॉलिसी सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए रेसिडेंट्स को ज्यादा सुविधा देती है। EV चार्जिंग और सोलर पैनल जैसी आधुनिक जरूरतों को भी इसमें शामिल किया गया है।

HousingSocietySolutions सलाह:  

DDA फ्लैट ओनर्स को सलाह दी जाती है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले RWA से चर्चा करें और जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। संरचनात्मक सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें ताकि भविष्य में कोई समस्या न आए।



गुरुवार, 16 जुलाई 2026

महावितरण ने जारी किया हाउसिंग सोसाइटी कमेटी को नोटिस: बिजली मीटर की ऊंचाई बढ़ाएं, जानें नियम, समयसीमा और खर्च

महावितरण ने हाउसिंग सोसायटी में बिजली मीटर की ऊंचाई बढ़ाने के लिए नोटिस जारी किए हैं। पूरी जानकारी, नियम, अनुपालन की प्रक्रिया, जुर्माना और सोसाइटी के लिए टिप्स। HousingSocietySolutions पर पढ़ें।

महावितरण ने हाउसिंग सोसाइटी कमेटी को जारी किया नोटिस: बिजली मीटर की ऊंचाई क्यों बढ़ानी होगी?

महाराष्ट्र के लाखों हाउसिंग सोसायटी निवासियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट। महावितरण (MSEDCL) ने कई हाउसिंग सोसायटी कमेटियों को नोटिस जारी कर बिजली मीटर की ऊंचाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। यह कदम मीटर रीडिंग की आसानी, सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुपालन के लिए उठाया गया है।

महावितरण नोटिस का मुख्य कारण क्या है?

महावितरण के अनुसार, कई सोसायटियों में बिजली मीटर बहुत नीचे या ऊंचाई पर लगे हैं, जिससे:

मीटर रीडर को नियमित रीडिंग लेने में दिक्कत होती है।

बाढ़ या पानी भराव की स्थिति में मीटर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

विद्युत दुर्घटनाओं (जैसे शॉर्ट सर्किट या बच्चों द्वारा छेड़छाड़) का जोखिम रहता है।

MERC (महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग) के विद्युत पुरवठा संहिता नियमों का पालन सुनिश्चित करना।

मानक ऊंचाई: आमतौर पर मीटर का केंद्र भूमि से 4 फीट से 6 फीट (लगभग 1.2 से 1.8 मीटर) की ऊंचाई पर होना चाहिए। यह ऊंचाई मीटर रीडिंग, रखरखाव और सुरक्षा के लिए आदर्श मानी जाती है।

सोसाइटी कमेटी को क्या करना चाहिए?

नोटिस प्राप्त होते ही बैठक बुलाएं — सभी सदस्यों को सूचित करें।

मीटर की वर्तमान स्थिति जांचें — मीटर रूम या कॉमन एरिया में सभी मीटरों की ऊंचाई नोट करें।

अधिकृत इलेक्ट्रीशियन या महावितरण अधिकृत ठेकेदार से अनुमान प्राप्त करें।

समयसीमा का पालन करें — नोटिस में दी गई अवधि (आमतौर पर 15-30 दिन) में काम पूरा करें, अन्यथा जुर्माना या कनेक्शन संबंधी समस्या हो सकती है।

महावितरण कार्यालय में लिखित आवेदन दें और स्वीकृति लें।

खर्च कौन वहन करेगा?

सोसाइटी का सामान्य फंड** से खर्च किया जा सकता है, क्योंकि यह कॉमन सुविधा से संबंधित है।

व्यक्तिगत मीटर शिफ्टिंग के मामले में संबंधित फ्लैट ओनर से शेयरिंग हो सकती है।

महावितरण की तरफ से कोई सब्सिडी नहीं मिलती, लेकिन काम प्रमाणित एजेंसी से करवाने पर अतिरिक्त शुल्क बच सकता है।

अनुमानित खर्च: मीटर शिफ्टिंग, केबल एक्सटेंशन, ब्रैकेट/बॉक्स बदलाव आदि पर प्रति मीटर ₹2,000 से ₹5,000 तक लग सकता है (स्थान और जटिलता पर निर्भर)।

फायदे क्यों हैं?

सटीक बिलिंग और कम औसत बिल की समस्या।

मीटर की लंबी उम्र और कम खराबी।

सुरक्षा बढ़ना — बच्चों और पालतू जानवरों से बचाव।

भविष्य में स्मार्ट मीटर लगाने में आसानी।

सोसाइटी के लिए व्यावहारिक टिप्स (HousingSocietySolutions विशेष)

मीटर रूम को अपग्रेड करें** — अच्छी लाइटिंग, वेंटिलेशन और वॉटरप्रूफिंग करवाएं।

एक साथ सभी मीटर शिफ्ट करें** — अलग-अलग करने से अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।

दस्तावेज तैयार रखें** — नोटिस कॉपी, पुरानी बिल, सोसाइटी रजिस्ट्रेशन आदि।

रेजिडेंट्स को सूचित करें** — पारदर्शिता बनाए रखें ताकि कोई विवाद न हो।

महावितरण हेल्पलाइन 1912 या ऐप के जरिए स्टेटस चेक करें।

यह बदलाव एक बार की प्रक्रिया है जो लंबे समय तक सुविधा देगी। अगर आपकी सोसायटी को भी नोटिस मिला है तो तुरंत कार्रवाई करें।

क्या आपकी सोसायटी में भी मीटर ऊंचाई का मुद्दा है? कमेंट में बताएं अपना अनुभव। HousingSocietySolutions पर ऐसे ही उपयोगी आर्टिकल्स के लिए सब्सक्राइब करें और शेयर करें।

नोट: नियमों में बदलाव के लिए अपने क्षेत्रीय महावितरण कार्यालय से पुष्टि अवश्य करें। 


बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: हाउसिंग सोसाइटी को फ्लैट नीलामी खरीदार से पुराने मालिक का मेंटेनेंस बकाया वसूलने का अधिकार | 6 सप्ताह की मोहलत

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि हाउसिंग सोसाइटी नीलामी (ई-ऑक्शन) में फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति से पुराने मालिक का बकाया मेंटेनेंस वसूल सकती है। 6 सप्ताह में भुगतान न करने पर सदस्यता प्रभावित।HousingSocietySolutions पर पूरी डिटेल पढ़ें।


बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अब सोसाइटी पुराने मालिक का मेंटेनेंस बकाया फ्लैट नीलामी खरीदार से वसूल कर सकेगी

मुंबई। हाउसिंग सोसाइटियों के लिए राहत भरा फैसला आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ई-ऑक्शन (नीलामी) के जरिए फ्लैट खरीदने वाले नए खरीदार से पुराने मालिक का बकाया मेंटेनेंस चार्ज सोसाइटी वसूलने का हक रखती है।

Justice Sandeep Marne की एकल पीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नीलामी में फ्लैट खरीदने वाला व्यक्ति 6 सप्ताह के अंदर बिना ब्याज के पुराना बकाया मेंटेनेंस जमा कर देता है, तो उसे सोसाइटी की सदस्यता दी जा सकती है।

मामला क्या था?
खारघर स्थित एक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सोसाइटी ने पुराने फ्लैट मालिक के बकाया मेंटेनेंस की वसूली के लिए नीलामी खरीदार पर दावा किया।
कोर्ट ने पहले दिए गए कुछ आदेशों को रद्द करते हुए साफ किया कि सोसाइटी सदस्यता देते समय पुराने बकाये की वसूली का अधिकार सोसाइटी को है।

कोर्ट ने क्या कहा?

6 सप्ताह की मोहलत: नीलामी खरीदार को फ्लैट खरीदने की तारीख से 6 हफ्ते के अंदर पुराना बकाया (बिना ब्याज) जमा करना होगा।
बकाया न चुकाने पर: 6 सप्ताह बाद बकाया चुकाना पड़ेगा तो ब्याज सहित भुगतान करना होगा।
सदस्यता: बकाया क्लियर करने के बाद ही नए खरीदार को सोसाइटी की सदस्यता मिलेगी।
दोनों पक्षों की जानकारी: नीलामी के समय बैंक और खरीदार, दोनों को पुराने बकाये की जानकारी होनी चाहिए।

सोसाइटियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

कई सोसाइटियों में पुराने मालिक फ्लैट बेचकर या लोन डिफॉल्ट होने पर भाग जाते हैं और बकाया मेंटेनेंस सोसाइटी पर बोझ बन जाता है।
नीलामी प्रक्रिया में अब सोसाइटी अपना बकाया सुरक्षित कर सकती है।
यह फैसला Co-operative Housing Societies को मजबूत बनाता है और Maintenance Recovery की प्रक्रिया को आसान बनाएगा।

फ्लैट खरीदारों के लिए सलाह (HousingSocietySolutions Recommendation)

नीलामी से पहले** फ्लैट का पूरा मेंटेनेंस स्टेटस सोसाइटी से लिखित में जरूर लें।
नीलामी दस्तावेजों में बकाया राशि का स्पष्ट उल्लेख हो।
6 सप्ताह के अंदर बकाया क्लियर करें, अन्यथा ब्याज और कानूनी परेशानी बढ़ सकती है।
फ्लैट खरीदते समय No Dues Certificate और Society NOC लेना अनिवार्य है।

निष्कर्ष 
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला हाउसिंग सोसाइटियों को उनके हक की रक्षा करने में मजबूती देगा। साथ ही नए खरीदारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

आपकी सोसाइटी में भी मेंटेनेंस बकाया की समस्या है? कमेंट में बताएं या HousingSocietySolutions पर संपर्क करें। हम आपको कानूनी सलाह और रिकवरी प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं।


मंगलवार, 14 जुलाई 2026

वसई-विरार के घरों पर महंगाई का नया झटका, VVCMC ने दोगुना कर दिया पानी का टैक्स! सोसाइटीज क्या कर सकती हैं? HousingSocietySolutions

वसई विरार महानगरपालिका (VVCMC) ने 2026-27 बजट में पानी टैक्स दोगुना और प्रॉपर्टी टैक्स 15% बढ़ा दिया है। जानिए नई दरें, असर, कारण और सोसाइटीज के लिए क्या करें।

VVCMC ने दोगुना कर दिया पानी का टैक्स! वसई-विरार निवासियों पर महंगाई का नया बोझ

वसई-विरार शहर के लाखों निवासियों के लिए एक बुरी खबर आई है। वसई विरार सिटी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (VVCMC) ने अपने 2026-27 के बजट में पानी टैक्स को दोगुना कर दिया है। साथ ही प्रॉपर्टी टैक्स में भी 15% की बढ़ोतरी की गई है। यह फैसला राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए लिया गया है, लेकिन आम लोगों और हाउसिंग सोसाइटीज पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

क्यों बढ़ाया गया पानी का टैक्स?

VVCMC ने ₹4,208 करोड़ के बजट में इस बढ़ोतरी का ऐलान किया। मुख्य कारण:

बढ़ती आबादी और शहर के तेज विकास के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ना

पानी की सप्लाई, पाइपलाइन रखरखाव और नए प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत

राजस्व घाटे को पूरा करना

नगर निगम का कहना है कि बिना टैक्स बढ़ाए भी बजट तैयार किया गया था, लेकिन पानी टैक्स दोगुना करने से अतिरिक्त आय होगी।

निवासियों और सोसाइटीज पर क्या असर पड़ेगा?

मासिक पानी बिल** लगभग दोगुना हो सकता है, खासकर बड़े फ्लैट्स और हाई-राइज सोसाइटीज में।

प्रॉपर्टी टैक्स में 15% बढ़ोतरी से वार्षिक मेंटेनेंस चार्जेस भी प्रभावित होंगे।

वसई, विरार, नालासोपारा और आसपास के इलाकों में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों पर सबसे ज्यादा बोझ।

कई सोसाइटीज में पहले से ही पानी की समस्या है, अब महंगे बिल के साथ शिकायतें बढ़ने की आशंका।

निवासी इस फैसले से काफी नाराज हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग इसे "अनुचित और अत्यधिक" बता रहे हैं।

Housing Society Solutions: सोसाइटीज क्या कर सकती हैं?

पानी की बचत अभियान चलाएं – कम पानी वाले फिटिंग्स लगवाएं, लीकेज तुरंत ठीक करवाएं।

VVCMC से बातचीत – सोसाइटीज एसोसिएशन के जरिए प्रतिनिधिमंडल भेजकर राहत मांगें।

वाटर मीटर चेक करें – सही मीटरिंग से अनावश्यक बिलिंग रुक सकती है।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग और रिसाइक्लिंग सिस्टम अपनाएं – लंबे समय में बिल कम होंगे।

ऑनलाइन पेमेंट ट्रैक करें – VVCMC की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से बिल चेक करें और समय पर पेमेंट करके पेनाल्टी बचाएं।

कब से लागू होगी नई दरें?

बजट पास होने के बाद नई दरें जल्द ही लागू हो सकती हैं। सोसाइटीज को अपने रेजिडेंट्स को पहले से सूचित कर अतिरिक्त चार्जेस के लिए तैयार रहना चाहिए।

अंतिम सलाह

पानी एक जरूरी संसाधन है और इसका सही प्रबंधन जरूरी है, लेकिन बढ़ोतरी इतनी तेज होनी चाहिए कि आम आदमी पर बोझ न पड़े। VVCMC से अपील है कि बढ़े हुए टैक्स के बदले बेहतर पानी की सप्लाई और पारदर्शिता सुनिश्चित करें।

HousingSocietySolutions की टीम लगातार ऐसी खबरों पर नजर रखेगी जो हाउसिंग सोसाइटीज और निवासियों को प्रभावित करती हैं। अगर आपकी सोसाइटी में पानी टैक्स या प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी कोई समस्या है तो कमेंट में बताएं। 



शनिवार, 11 जुलाई 2026

MHADA 79A Amendment Passed: 13,000 पुरानी इमारतों का पुनर्विकास फिर शुरू, मुंबईवासियों को नई उम्मीद | HousingSocietySolutions

महाराष्ट्र विधानमंडल ने MHADA एक्ट में 79A संशोधन पास कर दिया। अब 13,000 से ज्यादा खतरनाक पुरानी इमारतों का पुनर्विकास तेज हो सकेगा। जानिए पूरी डिटेल, फायदे और आगे क्या होगा।

MHADA 79A Amendment Passed: मुंबई की 13,000 पुरानी इमारतों का पुनर्विकास फिर से पटरी पर, लाखों परिवारों को राहत

मुंबई की पुरानी और खस्ताहाल इमारतों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर आई है। महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद ने MHADA एक्ट में सेक्शन 79A के संशोधन वाले प्राइवेट मेंबर्स बिल को पास कर दिया है। यह संशोधन अब गवर्नर की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

इस संशोधन से बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को दूर करने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे 13,000 से ज्यादा पुरानी cess buildings का पुनर्विकास फिर शुरू हो सकेगा।

क्या है MHADA सेक्शन 79A?

2020 में लाए गए सेक्शन 79A और 79B का मकसद खतरनाक इमारतों का तेजी से पुनर्विकास सुनिश्चित करना था। अगर मालिक (landlord) पुरानी इमारत को redevelopment के लिए तैयार नहीं होते, तो 51% या उससे ज्यादा tenants की सहमति से MHADA खुद हस्तक्षेप कर redevelopment करवा सकता है।

यह प्रावधान 2017 के हुसैनी बिल्डिंग collapse (33 मौतें), 2019 के डोंगरी हादसे और 2020 के फोर्ट बिल्डिंग collapse जैसी घटनाओं के बाद लाया गया था।

समस्या क्या थी?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगभग एक साल पहले सेक्शन 79A के तहत जारी 935 नोटिसों पर रोक लगा दी थी।

कोर्ट ने "competent authority" को लेकर कानूनी खामी पाई थी।

नया संशोधन अब MHADA के अधिकृत अधिकारियों को सीधे पावर देने का प्रावधान करता है, जिससे यह कानूनी उलझन दूर हो जाएगी।

विधायक अजय चौधरी द्वारा पेश किया गया यह प्राइवेट मेंबर्स बिल अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं में राज्य सरकार की स्थिति मजबूत करेगा।

कितना बड़ा है मुद्दा?

मुंबई में 1940 से पहले बनी 13,000+ cess buildings हैं, जिनमें लाखों परिवार रहते हैं।

2021 से अगस्त 2025 तक 345 इमारतें पूरी या आंशिक रूप से ढह चुकी हैं (RTI डेटा)।

1970-2018 के बीच इमारत गिरने से 815 लोगों की जान गई।

एक्टिविस्ट जीतेंद्र Ghadge (The Young Whistleblowers Foundation) ने इसे "life-saving provision" बताया और कहा कि तकनीकी वजह से हजारों जिंदगियों को खतरे में नहीं डालना चाहिए।

आगे क्या होगा?

गवर्नर की मंजूरी के बाद कानून बनेगा।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद redevelopment प्रक्रिया तेज हो सकेगी।

tenants को 51% सहमति के साथ खुद redevelopment शुरू करने का अधिकार रहेगा।

यह संशोधन मुंबई के शहरी नवीनीकरण (urban renewal) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

HousingSocietySolutions की सलाह:  

सभी housing societies जो पुरानी इमारतों में हैं, अपने tenants और landlords के साथ चर्चा शुरू करें। MHADA के नए नियमों के बारे में अपडेट रहें। redevelopment से पहले structural audit जरूर करवाएं।

आपकी सोसाइटी भी पुरानी इमारत में है? कमेंट में बताएं।



Smart Meter Problem: महाराष्ट्र में बढ़े बिजली बिल: हीटवेव से बढ़ी खपत या स्मार्ट मीटर? देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान |HousingSocietySolutions

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि बिजली बिल बढ़ने की वजह स्मार्ट मीटर नहीं बल्कि भीषण गर्मी और बढ़ी हुई खपत है। हाउसिंग सोसाइटी निवासियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट।

महाराष्ट्र में बढ़े बिजली बिल: हीटवेव से बढ़ी खपत या स्मार्ट मीटर? देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान

पुणे/मुंबई: हजारों उपभोक्ताओं की शिकायतों के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में साफ कहा है कि स्मार्ट मीटर बिजली बिल बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में चली भीषण गर्मी (हीटवेव) की वजह से बिजली की खपत बढ़ी है, जिसके कारण बिल ज्यादा आए हैं।

सोसाइटी निवासियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले ज्यादातर परिवारों को इस समय भारी बिजली बिल का सामना करना पड़ रहा है। एसी, कूलर, फ्रिज और अन्य उपकरणों का लगातार इस्तेमाल बढ़ने से बिल दोगुना-तिगुना हो गया है। कई जगहों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उपभोक्ता इसे लेकर संदेह जता रहे थे।

सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया:  

“बढ़े हुए बिल की वजह बढ़ी हुई बिजली खपत है, न कि स्मार्ट मीटर।”

स्मार्ट मीटर पर विवाद क्यों?

कई सोसाइटियों में पुराने मीटर की जगह स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।

कुछ उपभोक्ताओं का दावा है कि मीटर बदलने के बाद बिल अचानक बहुत बढ़ गया।

वहीं सरकार का पक्ष है कि स्मार्ट मीटर ज्यादा सटीक माप करते हैं और चोरी रोकने में मदद करते हैं।

Housing Society Solutions: क्या करें निवासी?

बिल की जांच करें – अपने पिछले 6-12 महीनों के बिल और यूनिट खपत की तुलना करें। मौसम के अनुसार खपत बढ़ना स्वाभाविक है।

एनर्जी ऑडिट करवाएं – सोसाइटी स्तर पर बिजली बचत के उपाय अपनाएं (LED लाइट, इन्वर्टर AC, टाइमर आदि)।

स्मार्ट मीटर की शिकायत – अगर मीटर में गड़बड़ी लगे तो तुरंत बिजली कंपनी (MSEDCL) में शिकायत दर्ज करें।

सोसाइटी में सामूहिक चर्चा – मैनेजिंग कमिटी मीटिंग में इस मुद्दे को उठाएं और सामूहिक बचत के तरीके अपनाएं।

सरकारी योजनाओं का फायदा – सोलर पैनल, ऊर्जा संरक्षण योजनाओं के बारे में जानकारी लें।

निष्कर्ष:  

भीषण गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ना लाजमी है। स्मार्ट मीटर एक बेहतर टेक्नोलॉजी है, लेकिन सही उपयोग और जागरूकता के बिना बिल नियंत्रण में नहीं रहेंगे। हाउसिंग सोसाइटी के निवासियों को अब ऊर्जा संरक्षण पर खास ध्यान देना चाहिए।

अपनी सोसाइटी में बिजली बिल को लेकर क्या समस्या आ रही है? कमेंट में बताएं। HousingSocietySolutions आपके सभी सोसाइटी संबंधी मुद्दों का समाधान है।


गुरुवार, 9 जुलाई 2026

Housing Society Deemed Conveyance: हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों का अधिकार और MC की जिम्मेदारी | पूरी जानकारी

डीम्ड कन्वेयन्स: हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों का अधिकार और MC की जिम्मेदारी | पूरी जानकारी

आपकी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (CHS) सिर्फ फ्लैट्स की नहीं, बल्कि पूरी जमीन और बिल्डिंग की मालिक बन सकती है। डीम्ड कन्वेयन्स इसी का कानूनी तरीका है। कई सोसाइटियों में बिल्डर या लैंड ओनर कन्वेयन्स देने में देरी करते हैं, जिससे सदस्यों के अधिकार प्रभावित होते हैं। इस लेख में हम डीम्ड कन्वेयन्स क्या है, इसके फायदे, प्रक्रिया और सोसाइटी सदस्यों व मैनेजमेंट कमिटी (MC) की भूमिका विस्तार से जानेंगे।

डीम्ड कन्वेयन्स क्या है?

कन्वेयन्स वह दस्तावेज है जिसके जरिए लैंड और बिल्डिंग का स्वामित्व बिल्डर/लैंड ओनर से सोसाइटी के नाम ट्रांसफर होता है। जब बिल्डर या प्रमोटर MOFA एक्ट के तहत 4 महीने में कन्वेयन्स नहीं देते, तो सोसाइटी डीम्ड कन्वेयन्स के लिए DDR (District Deputy Registrar) के पास आवेदन कर सकती है। 

यह एकतरफा प्रक्रिया है जिसमें बिल्डर की सहमति की जरूरत नहीं पड़ती। DDR ऑर्डर पास करके सोसाइटी के नाम कन्वेयन्स रजिस्टर करवा सकता है।

मुख्य कानूनी आधार: Maharashtra Ownership Flats Act (MOFA) 1963 की धारा 11।

डीम्ड कन्वेयन्स क्यों जरूरी है? 10+ महत्वपूर्ण फायदे

जमीन और बिल्डिंग का कानूनी स्वामित्व — सोसाइटी का नाम 7/12 एक्सट्रैक्ट और प्रॉपर्टी कार्ड पर आ जाता है।

अतिरिक्त FSI का लाभ — डेवलपमेंट कंट्रोल रूल्स के अनुसार अतिरिक्त FSI सोसाइटी को मिलता है, बिल्डर को नहीं।

रिडेवलपमेंट आसान — बिना कन्वेयन्स के रिडेवलपमेंट संभव नहीं। सोसाइटी का नाम PR कार्ड पर होना जरूरी है।

सेल्फ रिडेवलपमेंट के लिए लोन — बैंक से आसानी से लोन मिल सकता है क्योंकि मॉर्टगेज की सुविधा होती है।

बिल्डर के साथ बेहतर नेगोशिएशन — कन्वेयन्स होने पर सोसाइटी की पोजीशन मजबूत होती है, ज्यादा कॉर्पस और एरिया मिल सकता है।

भविष्य की सुरक्षा — पुरानी बिल्डिंग में समस्या आने पर बिल्डर/ओनर मोटी रकम मांग सकते हैं (जैसे गीतांजलि या लक्ष्मी छाया केस)।

सदस्यों का सच्चा मालिकाना हक — आपने फ्लैट की कीमत में जमीन का बड़ा हिस्सा दिया है, इसलिए अधिकार मांगना आपका हक है।

अन्य लाभ — बैंक लोन, सरकारी योजनाओं का फायदा, और प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ना।

MOFA एक्ट के तहत बिल्डर की जिम्मेदारी

51% फ्लैट्स बिकने के बाद 4 महीने के अंदर सोसाइटी को कन्वेयन्स देना अनिवार्य है।

अगर नहीं देते तो सदस्य और सोसाइटी डीम्ड कन्वेयन्स के लिए आगे बढ़ सकते हैं।

MC सदस्यों और सोसाइटी सदस्यों की भूमिका

सदस्यों का अधिकार** — AGM में इस मुद्दे को उठाना और निर्णय लेना।

MC की जिम्मेदारी** — प्रोएक्टिव रहना, प्रोफेशनल कंसल्टेंट्स की मदद लेना, और समय पर आवेदन करना।

साल-दर-साल AGM में चर्चा करके मुद्दा टालना बंद करें। अब निर्णय का समय है!

खर्च पर ध्यान दें: इंटीरियर पर लाखों खर्च करने वाले सदस्य कन्वेयन्स के लिए प्रोफेशनल फीस पर हिचकिचाते हैं। याद रखें, यह निवेश है जो सोसाइटी को मजबूत बनाता है।

डीम्ड कन्वेयन्स की प्रक्रिया (संक्षेप में)

सोसाइटी रजिस्टर्ड होनी चाहिए।

बिल्डर/ओनर को नोटिस दें (यदि संभव हो)।

आवश्यक दस्तावेजों के साथ DDR को आवेदन।

सुनवाई के बाद DDR ऑर्डर पास करता है।

सब-रजिस्ट्रार के पास कन्वेयन्स रजिस्ट्रेशन।

सरकार ने प्रक्रिया को आसान बनाया है। प्रोफेशनल एडवोकेट या कंसल्टेंट की मदद लें।

आम सवाल (FAQs)

प्रश्न: क्या बिना बिल्डर के सहयोग से डीम्ड कन्वेयन्स संभव है?  

उत्तर: हाँ, यही इसका मुख्य उद्देश्य है।

प्रश्न: कितना समय लगता है?  

उत्तर: केस के आधार पर 6 महीने से 2 साल तक।

प्रश्न: खर्च कितना आता है?  

उत्तर: सोसाइटी के साइज पर निर्भर, लेकिन लंबे समय में फायदेमंद।

निष्कर्ष: अब इंतजार नहीं, एक्शन लें!

अपनी सोसाइटी की जमीन पर अपना हक हासिल करें। डीम्ड कन्वेयन्स से न सिर्फ स्वामित्व मिलता है बल्कि रिडेवलपमेंट, FSI और भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। 

अगली AGM में इस एजेंडे को प्राथमिकता दें। प्रोफेशनल मदद लें और अपनी सोसाइटी को सशक्त बनाएं।

HousingSocietySolutions पर ऐसे ही उपयोगी लेख पढ़ें और अपनी सोसाइटी को बेहतर बनाएं।

अपनी सोसाइटी में डीम्ड कन्वेयन्स की स्थिति क्या है? कमेंट में बताएं। शेयर करें ताकि दूसरे सदस्यों को भी फायदा हो।

नोट: यह जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है। कानूनी सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।


डीम्ड कन्वेयंस के 16 बड़े फायदे: हर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के सदस्य को जरूर जानना चाहिए

1-डीम्ड कन्वेयंस (Deemed Conveyance) क्या है? सोसायटी के अधिकार, MC सदस्यों की जिम्मेदारी और पूरी प्रक्रिया

2-डीम्ड कन्वेयंस क्यों है हर हाउसिंग सोसायटी के लिए जरूरी? जानें कानूनी अधिकार और फायदे

3-क्या आपकी हाउसिंग सोसायटी ने अभी तक डीम्ड कन्वेयंस नहीं कराया? जानिए बड़े नुकसान और समाधान

4-डीम्ड कन्वेयंस: फ्लैट मालिकों का कानूनी अधिकार, MC की जिम्मेदारी और रीडेवलपमेंट का आधार

5-डीम्ड कन्वेयंस के 16 बड़े फायदे: हर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के सदस्य को जरूर जानना चाहिए

6-रीडेवलपमेंट से पहले क्यों जरूरी है डीम्ड कन्वेयंस? जानें सोसायटी के लिए इसके कानूनी और आर्थिक लाभ

7-डीम्ड कन्वेयंस नहीं कराया तो हो सकता है करोड़ों का नुकसान! जानें सोसायटी और फ्लैट मालिकों के अधिकार

8-हाउसिंग सोसायटी में डीम्ड कन्वेयंस: 51% बिक्री के बाद बिल्डर की कानूनी जिम्मेदारी और सदस्यों के अधिकार




गुरुवार, 2 जुलाई 2026

महाराष्ट्र हाउसिंग सोसाइटी नियमों में बड़े बदलाव 2026: घट गई पेनाल्टी, साफ-साफ मेंटेनेंस चार्जेस, आसान सेल्फ रिडेवलपमेंट | HousingSocietySolutions

महाराष्ट्र सरकार ने कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी नियम 1961 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। जानिए कम हुई ब्याज दर, नई मेंटेनेंस चार्जेस व्यवस्था, पार्किंग नियम, नॉमिनी अधिकार और सेल्फ रिडेवलपमेंट में आसानी के बारे में। फ्लैट ओनर्स के लिए पूरी डिटेल।

महाराष्ट्र हाउसिंग सोसाइटी नियमों में ऐतिहासिक बदलाव: फ्लैट ओनर्स को मिली बड़ी राहतमुंबई: लाखों फ्लैट ओनर्स और हाउसिंग सोसाइटीज के लिए राहत भरी खबर है। महाराष्ट्र सरकार ने Maharashtra Co-operative Societies Rules, 1961 में व्यापक संशोधन अधिसूचित कर दिए हैं। इन बदलावों से मेंटेनेंस चार्जेस की गणना पारदर्शी होगी, डिफॉल्ट पर पेनाल्टी घटी है, पार्किंग विवादों में जनरल बॉडी को अंतिम अधिकार मिला है और सेल्फ रिडेवलपमेंट आसान हो गया है।

HousingSocietySolutions पर इस लेख में हम आपको इन सभी नए नियमों की विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

1. ब्याज दर में बड़ी कटौती – अब सिर्फ 12% सालाना पहले डिले मेंटेनेंस पर 21% सालाना ब्याज लगता था।

अब अधिकतम 12% प्रति वर्ष ही लिया जा सकेगा।

इससे अस्थायी आर्थिक परेशानी में फंसे सदस्यों पर बोझ काफी कम हो गया है।

2. मेंटेनेंस चार्जेस की नई स्पष्ट व्यवस्था

नए नियमों में चार्जेस की गणना को लेकर साफ दिशा-निर्देश दिए गए हैं:

सर्विस चार्जेस: सभी फ्लैट्स में समान रूप से बांटे जाएंगे 

(साइज चाहे जितना भी हो)।

वॉटर चार्जेस: फ्लैट में लगे नलों (taps) की संख्या के आधार पर।

नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्जेस: सर्विस चार्जेस का अधिकतम 10% ही लिया जा सकेगा (किराएदार वाले फ्लैट्स पर)।

सोसाइटी मनमाने ढंग से अतिरिक्त चार्जेस नहीं लगा सकती। अतिरिक्त चार्जेस केवल जनरल बॉडी की मंजूरी और कानूनी प्रावधानों के अधीन ही लगाए जा सकते हैं।

3. पार्किंग विवादों का समाधान

पार्किंग अब मैनेजिंग कमिटी के बजाय जनरल बॉडी के फैसले से तय होगी। यह सबसे आम विवादों में से एक को हल करने में मददगार साबित होगा।

4. सेल्फ रिडेवलपमेंट को बड़ा बूस्ट

सोसाइटी अब अपनी जमीन के मूल्य के 10 गुना तक ऋण ले सकती है (एम्पैनल्ड बैंक वेल्यूअर्स द्वारा मूल्यांकन के आधार पर)।

इससे डेवलपर पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत कम होगी।

रिडेवलपमेंट से संबंधित विशेष जनरल बॉडी मीटिंग अब वर्चुअल भी हो सकती है (क्वोरम पूरा होने पर)।

5. Sinking Fund और Repair Fund: अनिवार्यSinking Fund: निर्माण लागत का न्यूनतम 0.25% प्रति वर्ष।

Repair & Maintenance Fund: निर्माण लागत का न्यूनतम 0.75% प्रति वर्ष।

इससे भविष्य में बड़े रिपेयर के लिए फंड की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

6. नॉमिनी और उत्तराधिकार संबंधी महत्वपूर्ण प्रावधान

सदस्य की मृत्यु पर यदि नॉमिनी न हो या कोई आगे न आए तो दो स्थानीय समाचार पत्रों में पब्लिक नोटिस जारी करना अनिवार्य।

नॉमिनी को प्रोविजनल मेंबरशिप और वोटिंग अधिकार मिल सकेंगे (इंडेम्निटी बॉन्ड जमा करने पर)।

7. अन्य महत्वपूर्ण बदलाव:

प्रिमाइसेस सोसाइटीज को औपचारिक मान्यता (कमर्शियल यूनिट्स के लिए)।

सोसाइटी रजिस्ट्रेशन फीस ₹2,000 से बढ़कर ₹5,000।

सोसाइटी के साइज के अनुसार मेंटेनेंस खर्च की वार्षिक सीमा तय।

जनरल बॉडी को सोसाइटी का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला अंग पुनः पुष्ट किया गया।

फ्लैट ओनर्स के लिए क्या मतलब है?

कम बोझ और ज्यादा पारदर्शिता

विवादों में कमी और तेज समाधान

रिडेवलपमेंट में ज्यादा विकल्प और फाइनेंशियल सुविधा

मजबूत उत्तराधिकार सुरक्षा

HousingSocietySolutions की सलाह: 

सभी सोसाइटीज अपने मैनेजिंग कमिटी और सदस्यों को इन नए नियमों की कॉपी उपलब्ध कराएं और आगामी जनरल बॉडी मीटिंग में इन्हें चर्चा में लाएं।

नोट: ये नियम पूरे महाराष्ट्र में लागू होंगे। किसी भी विशिष्ट मामले में अपने सोसाइटी के रजिस्ट्रार या कानूनी सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।



शनिवार, 27 जून 2026

सऊदी अरब ने विदेशियों के लिए शुरू किया ऑनलाइन प्रॉपर्टी ओनरशिप पोर्टल | Saudi Properties से आसानी से खरीदें प्रॉपर्टी (2026 अपडेट)

सऊदी अरब ने विदेशी निवेशकों के लिए ‘Saudi Properties’ पोर्टल लॉन्च किया। अब NRIs और विदेशी कंपनियां ऑनलाइन आसानी से प्रॉपर्टी खरीद सकेंगी। Makkah-Madinah नियम, आवेदन प्रक्रिया और पूरी डिटेल्स जानें।सऊदी अरब ने विदेशियों के लिए प्रॉपर्टी ओनरशिप का ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया – निवेशकों के लिए बड़ी सुविधा

सऊदी अरब ने अपने रियल एस्टेट सेक्टर को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश ने “Saudi Properties” नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए विदेशी निवेशक, निवासी और कंपनियां आसानी से प्रॉपर्टी ओनरशिप के लिए आवेदन कर सकेंगी। 

यह पहल Foreign Real Estate Ownership Law के तहत जनवरी 2026 में लागू हुई है और अब पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया गया है।

Saudi Properties पोर्टल से क्या फायदा?

पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन – घर बैठे आवेदन, स्टेटस चेकिंग और अप्रूवल

पारदर्शिता बढ़ी और निवेशकों का अनुभव बेहतर हुआ

Real Estate General Authority (REGA) द्वारा संचालित आधिकारिक प्लेटफॉर्म

सऊदी अरब में नियंत्रित क्षेत्रों में विदेशी ओनरशिप की सुविधा

आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

सऊदी में रहने वाले विदेशी निवासी:

अपने residency number के जरिए सीधे पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। Eligibility चेक और अप्रूवल ऑनलाइन होगा।सऊदी के बाहर रहने वाले निवेशक: पहले Saudi missions abroad से Saudi Digital Identity प्राप्त करें

फिर Saudi Properties पोर्टल पर आवेदन दें

विदेशी कंपनियां: Invest Saudi प्लेटफॉर्म के जरिए Ministry of Investment में रजिस्ट्रेशन

National Unified Number प्राप्त करने के बाद प्रॉपर्टी ओनरशिप के लिए अप्लाई करें

Makkah और Madinah में विशेष नियम

पवित्र शहर मक्का और मदीना में प्रॉपर्टी ओनरशिप के नियम अभी भी सख्त हैं। यहां केवल:सऊदी कंपनियां मुस्लिम व्यक्ति (देश के अंदर या बाहर के) ही प्रॉपर्टी ओन कर सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्यों है यह मौका?

सऊदी अरब विजन 2030 के तहत रियल एस्टेट सेक्टर को खोल रहा है। नया पोर्टल पारदर्शी प्रक्रिया, तेज अप्रूवल और बेहतर रेगुलेटरी ओवरसाइट सुनिश्चित करेगा। NRIs और अन्य विदेशी निवेशकों के लिए यह डाइवर्सिफिकेशन और हाई-ग्रोथ मार्केट में निवेश का अच्छा अवसर हो सकता है।

सलाह: कोई भी निवेश करने से पहले लोकल रेगुलेशन्स, टैक्स इम्प्लिकेशन्स, प्रॉपर्टी लोकेशन और मार्केट ट्रेंड्स की अच्छी जांच कर लें। पेशेवर फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।




 



होमबायर्स के लिए बड़ी राहत!बिल्डर ने 9 साल तक सोसाइटी गठन में देरी की, होमबायर्स ने खुद संभाला काम; बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिए होमबायर्स को बड़ा समर्थन |HousingSocietySolutions

महाराष्ट्र में होमबायर्स के लिए बड़ी राहत! जब बिल्डर 9 साल तक हाउसिंग सोसाइटी नहीं बना पाया तो खरीदारों ने खुद सिंगल सोसाइटी रजिस्टर कर ली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिल्डर की अपील खारिज कर दी। जानें पूरी कहानी और कानूनी पहलू।

बिल्डर ने 9 साल तक सोसाइटी गठन में लगाई देरी, होमबायर्स ने खुद बनाई सिंगल सोसाइटी; बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला 

पुणे के बावधन खुर्द में एक बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट के होमबायर्स के लिए 9 साल की इंतजारी के बाद राहत की खबर आई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने होमबायर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए साफ कहा कि बिल्डर अनिश्चितकाल तक सोसाइटी गठन में देरी नहीं कर सकता। खरीदारों को खुद सोसाइटी बनाने का अधिकार है, खासकर जब प्रोजेक्ट में शेयर्ड एमेनिटीज़ हों। 

क्या था पूरा मामला?

बिल्डर ने पुणे के बावधन खुर्द क्षेत्र में लगभग 5 हेक्टेयर 20 आर भूमि पर मल्टी-टावर और विला वाला प्रोजेक्ट विकसित किया। इसमें टावर-1 (MOFA), टावर-2 और 3 (RERA) तथा 35 बंगले शामिल थे। बिल्डर ने फ्लैट्स की पजेशन दी, लेकिन 9 साल तक हाउसिंग सोसाइटी का गठन नहीं किया।टावर 1, 2 और 3 के होमबायर्स ने इंतजार के बाद जनवरी 2023 में बिल्डर को नोटिस दिया और फरवरी 2023 में डिप्टी रजिस्ट्रार के पास सिंगल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी बनाने का आवेदन दायर किया। अक्टूबर 2023 में इस सिंगल सोसाइटी को रजिस्ट्रेशन भी मिल गया।बिल्डर ने अलग-अलग टावर्स के लिए अलग-अलग सोसाइटी बनाने की योजना बताई और कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को बिल्डर की अपील खारिज कर दी और होमबायर्स द्वारा बनाई गई सिंगल सोसाइटी को वैध माना। 

हाईकोर्ट ने क्यों दिया होमबायर्स को समर्थन?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:

समय-सीमा का पालन जरूरी: MOFA एक्ट की धारा 10 और RERA नियम 9 के तहत बिल्डर को पर्याप्त फ्लैट्स बेचने के 3 महीने के अंदर सोसाइटी गठन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। सिर्फ ईमेल भेजना या कागजात तैयार रखना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि “तैयार और इच्छुक होना” कानूनी अनुपालन नहीं है।

सिंगल सोसाइटी की अनुमति: जब प्रोजेक्ट एक इंटीग्रेटेड लेआउट हो, शेयर्ड एमेनिटीज़, कॉमन एरिया और इंफ्रास्ट्रक्चर साझा हों, तो सिंगल सोसाइटी बनाई जा सकती है। हर टावर के लिए अलग सोसाइटी अनिवार्य नहीं है।

होमबायर्स का अधिकार: अगर बिल्डर समय पर कार्रवाई नहीं करता तो खरीदारों को खुद सोसाइटी बनाने का अधिकार है। खरीदार पैसे लगाकर पजेशन ले चुके हैं, उन्हें कॉमन एरिया का प्रबंधन और रखरखाव के लिए संगठन चाहिए।

एडवोकेट चंद्रकांत चौधरी के अनुसार, यह फैसला महाराष्ट्र के होमबायर्स के लिए मील का पत्थर है। इससे बिल्डर्स को साफ संदेश जाता है कि सोसाइटी गठन को अपनी सुविधा के अनुसार टालना अब संभव नहीं रहेगा। 

HousingSocietySolutions से सीख

यह केस हाउसिंग सोसाइटी मैनेजमेंट और कानूनी अधिकारों की अहमियत को रेखांकित करता है:

समय पर कार्रवाई करें — अगर बिल्डर 3-6 महीने में सोसाइटी नहीं बना रहा तो नोटिस भेजें और रजिस्ट्रार के पास आवेदन करें।

मेजोरिटी का फैसला — अधिकांश फ्लैट ओनर्स की सहमति से सिंगल सोसाइटी बनाना संभव है, खासकर शेयर्ड सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स में।

कानूनी सहायता लें — MOFA, RERA और महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के प्रावधानों का सही उपयोग करें।

दस्तावेज सुरक्षित रखें — एग्रीमेंट, पजेशन लेटर, पेमेंट रसीदें आदि।

निष्कर्ष:

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला उन हजारों होमबायर्स के लिए उम्मीद की किरण है जो बिल्डर की देरी से परेशान हैं। अब सोसाइटी गठन बिल्डर की मर्जी पर नहीं, बल्कि कानून और खरीदारों के सामूहिक हित पर निर्भर करेगा।अगर आपकी सोसाइटी भी इसी समस्या का सामना कर रही है तो कमेंट में बताएं। HousingSocietySolutions पर हम ऐसी कानूनी खबरों, गाइड और सलाह के साथ आपकी मदद करते रहेंगे।




शुक्रवार, 26 जून 2026

होमबायर्स के अधिकारों की जीत..होमबायर को 3 साल की देरी पर पूरा रिफंड + ₹1.57 करोड़ ब्याज: महारेराट का बड़ा फैसला | MHADA-MCGM विवाद बहाना नहीं चला

महारेराट ने बिल्डर को 3 साल की पजेशन देरी पर ₹1.43 करोड़ का पूरा रिफंड + ₹1.57 करोड़ ब्याज देने का आदेश दिया। MHADA-MCGM विवाद को बहाना मानने से इनकार। होमबायर्स के अधिकारों की जीतHousingSocietySolutions पर पूरी डिटेल पढ़ें।

होमबायर को 3 साल की देरी पर पूरा रिफंड + ₹1.57 करोड़ ब्याज: महारेराट का बिल्डर-विरोधी बड़ा फैसला

मुंबई। रियल एस्टेट में पजेशन की देरी अब बिल्डरों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल (MahaREAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में होमबायर के पक्ष में फैसला सुनाया है। बिल्डर द्वारा MHADA और MCGM के बीच विवाद का हवाला देकर 3 साल से ज्यादा देरी करने पर कोर्ट ने पूरे पैसे का रिफंड के साथ ₹1.57 करोड़ ब्याज देने का आदेश दिया है।यह फैसला उन हजारों होमबायर्स के लिए राहत भरा संदेश है जो बिल्डरों के वादों पर भरोसा करके फ्लैट बुक करते हैं और सालों-साल इंतजार करते रहते हैं।

केस की पूरी डिटेल्स

बुकिंग की तारीख: 22 मार्च 2015

प्रॉमिस्ड पजेशन डेट: 22 सितंबर 2017 (30 महीने बाद)

फ्लैट की कीमत: ₹1.5875 करोड़

होमबायर द्वारा भुगतान: ₹1.4313 करोड़

पूर्ण ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट: अप्रैल 2021 (लगभग 3.5 साल की देरी)

बिल्डर ने मार्च 2018 में सिर्फ "फिट-आउट पजेशन" ऑफर किया, जिसमें ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं था। 14वीं मंजिल का फ्लैट होने के कारण होमबायर ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और MahaRERA में शिकायत की।

बिल्डर का बचाव और ट्रिब्यूनल का जवाब

बिल्डर ने MHADA और MCGM के बीच प्लानिंग अथॉरिटी विवाद को मुख्य वजह बताया। लेकिन MahaREAT ने साफ कहा:विवाद पजेशन डेट (सितंबर 2017) से पहले से मौजूद था।

बिल्डर को सरकारी विभागों के बीच कोऑर्डिनेशन की समस्या अपने जोखिम पर सुलझानी चाहिए।

RERA एक्ट की धारा 18 के तहत पजेशन डेट पार होने पर होमबायर को ब्याज का वैधानिक अधिकार है।

फोर्स मेज्योर (Clause 30) का हवाला नहीं चलेगा क्योंकि सरकारी अनुमतियों में देरी प्राकृतिक आपदा नहीं है।

ट्रिब्यूनल ने बिल्डर को ₹1.4313 करोड़ का पूरा रिफंड + SBI के सबसे ऊंचे MCLR + 2% ब्याज (भुगतान की तारीख से) देने का आदेश दिया। अनुमानित ब्याज ₹1.57 करोड़ है। साथ ही कैंसिलेशन डीड 2 महीने में एक्जीक्यूट करने को कहा गया, ताकि होमबायर स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन आदि सरकारी टैक्स वापस ले सके।

होमबायर्स के लिए महत्वपूर्ण सीखें (HousingSocietySolutions सलाह)

पजेशन डेट sacrosanct है — बिल्डर प्रोजेक्ट की पूरी होने की तारीख बढ़ा ले तो भी आपकी एग्रीमेंट वाली डेट नहीं बदलती, जब तक आप लिखित सहमति न दें।

सरकारी विवाद बहाना नहीं — MHADA, MCGM, BMC या अन्य अथॉरिटी के बीच का विवाद बिल्डर का रिस्क है।

ब्याज की गणना — पैसे जमा करने की तारीख से ब्याज मिलता है, न कि केवल पजेशन ड्यू डेट से।

रिफंड + स्टैट्यूटरी पेमेंट्स — RERA में रद्द करने पर पूरा पैसा + ब्याज मिलना चाहिए।

निष्कर्ष:

यह फैसला RERA को और मजबूत बनाता है। अगर आपका बिल्डर पजेशन नहीं दे रहा है या MHADA/BMC/MCGM विवाद का हवाला दे रहा है, तो तुरंत MahaRERA में शिकायत करें। देरी जितनी लंबी, मुआवजा उतना बड़ा।

HousingSocietySolutions हमेशा सदस्यों को सलाह देता है कि एग्रीमेंट फॉर सेल को ध्यान से पढ़ें, पजेशन डेट और पेनाल्टी क्लॉज चेक करें, और समय पर कानूनी कदम उठाएं।



 


गुरुवार, 25 जून 2026

Housing Sales: टॉप 9 शहरों में Q2 2026 में हाउसिंग सेल्स 19% बढ़ी, सप्लाई में 43% उछाल; बेंगलुरु ने मारी बाजी | PropEquity रिपोर्ट

टॉप 9 शहरों में Q2 2026 में हाउसिंग सेल्स 19% बढ़ी, सप्लाई में 43% उछाल; बेंगलुरु ने मारी बाजी – PropEquity रिपोर्ट

भारतीय रेजिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर Q2 2026 (अप्रैल-जून) में मजबूत गति दिखा रहा है। PropEquity की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के टॉप 9 शहरों में हाउसिंग सेल्स साल-दर-साल 19% बढ़कर 1,12,458 यूनिट्स पहुंच गई, जबकि नई सप्लाई में 43% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 1,17,609 यूनिट्स हो गई।यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद खरीदारों का विश्वास बरकरार है और डेवलपर्स भी नई परियोजनाएं लॉन्च करने में आक्रामक रुख अपना रहे हैं।

दक्षिणी शहरों का जलवा, बेंगलुरु बना चैंपियन

दक्षिण भारत के शहरों ने इस क्वार्टर में शानदार प्रदर्शन किया। बेंगलुरु ने दोनों सेल्स और सप्लाई में टॉप पोजीशन बरकरार रखी। यहां हाउसिंग सेल्स 47% बढ़कर 21,516 यूनिट्स पहुंच गई। नई सप्लाई भी 71% बढ़कर 24,340 यूनिट्स हो गई।

हैदराबाद: सेल्स 22% ↑ (14,410 यूनिट्स), सप्लाई 75% ↑ (18,407 यूनिट्स)  

चेन्नई: सेल्स 18% ↑ (6,323 यूनिट्स)

पश्चिमी बाजार भी जोरदार:

वेस्टर्न रीजन में नवी मुंबई सबसे तेजी से बढ़ा। यहां सेल्स 61% बढ़कर 11,029 यूनिट्स पहुंच गई, जबकि नई लॉन्च 116% उछलकर 9,902 यूनिट्स हो गई।

मुंबई: सेल्स 32% ↑ (10,561 यूनिट्स)  

ठाणे: सेल्स 10% ↑ (16,386 यूनिट्स)  

पुणे: सेल्स 9% ↑ (18,737 यूनिट्स)

दिल्ली-NCR और कोलकाता में मंदी:

पूर्वी और उत्तरी बाजारों में स्थिति थोड़ी कमजोर रही। कोलकाता में सेल्स 23% घटी (3,414 यूनिट्स), जबकि दिल्ली-NCR में 14% की गिरावट (10,082 यूनिट्स) दर्ज की गई। इन शहरों में नई सप्लाई भी घटकर क्रमशः 2% और 6% रह गई।

PropEquity CEO का बयान

PropEquity के फाउंडर और CEO समीर जसुजा ने कहा, “कई तिमाहियों के बाद सप्लाई बढ़ने से अब्जॉर्प्शन भी मजबूत हुआ है। बुनियादी डिमांड स्वस्थ है। भारत की आर्थिक स्थिरता, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स की वजह से निवेशक मिडिल ईस्ट की बजाय भारत की ओर रुख कर रहे हैं।”

HousingSocietySolutions के नजरिए से सुझाव

होमबायर्स के लिए: दक्षिणी और पश्चिमी शहरों में अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं। बढ़ती सप्लाई से कीमतों पर दबाव कम रह सकता है, लेकिन लोकेशन और डेवलपर की विश्वसनीयता देखें।  

इन्वेस्टर्स के लिए: 

बेंगलुरु, हैदराबाद और नवी मुंबई जैसे शहर अभी भी हाई रिटर्न दे सकते हैं।  

हाउसिंग सोसाइटी मैनेजमेंट के लिए: नई सोसाइटीज में प्लानिंग करते समय बढ़ी हुई डिमांड को ध्यान में रखें – अच्छी अमेनिटीज और सस्टेनेबल फीचर्स अब खरीदारों की प्राथमिकता हैं।


निष्कर्ष: Q2 2026 के आंकड़े भारतीय रियल एस्टेट की लचीलता को साबित करते हैं। साउथ और वेस्ट के बाजार आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है, जबकि NCR और ईस्ट को रिकवरी के लिए नए स्ट्रैटजी की जरूरत है।


 



मंगलवार, 23 जून 2026

महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी मेंटेनेंस नियम 2026: कौन सा चार्ज सभी पर समान और कौन सा फ्लैट के आकार के अनुसार?

महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों में मेंटेनेंस चार्ज कैसे तय होता है? जानिए कौन-कौन से शुल्क सभी सदस्यों से समान लिए जाते हैं और कौन से फ्लैट के क्षेत्रफल के आधार पर वसूले जाते हैं।

महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी मेंटेनेंस नियम 2026: अब साफ हुआ कौन कितना देगा मेंटेनेंस

हाउसिंग सोसायटियों में मेंटेनेंस चार्ज को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलते हैं। छोटे फ्लैट के मालिकों का कहना होता है कि वे बड़े फ्लैट वालों जितना भुगतान क्यों करें, जबकि बड़े फ्लैट के मालिकों का तर्क होता है कि कुछ खर्च सभी के लिए समान होने चाहिए। इसी तरह की उलझनों को दूर करने के लिए महाराष्ट्र में सहकारी गृहनिर्माण सोसायटियों के नियमों और मॉडल बायलॉज के तहत मेंटेनेंस शुल्कों की श्रेणियां स्पष्ट की गई हैं।

मेंटेनेंस चार्ज एक जैसा क्यों नहीं होता?

सोसायटी द्वारा वसूला जाने वाला मेंटेनेंस केवल एक शुल्क नहीं होता, बल्कि यह कई अलग-अलग मदों का समूह होता है। इनमें सुरक्षा, सफाई, लिफ्ट, प्रशासनिक खर्च, भवन मरम्मत, सिंकिंग फंड, पानी और अन्य सुविधाओं का खर्च शामिल होता है।

इन्हीं खर्चों की प्रकृति के आधार पर तय किया जाता है कि उन्हें सभी सदस्यों में समान रूप से बांटा जाए या फ्लैट के आकार के अनुसार।

 कौन से चार्ज सभी फ्लैटों पर समान रूप से लागू होते हैं?

कुछ सुविधाएं ऐसी होती हैं जिनका लाभ हर निवासी को लगभग समान रूप से मिलता है। इसलिए इनका खर्च सभी सदस्यों में बराबर बांटा जाता है।

इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

* सुरक्षा गार्ड और स्टाफ का वेतन

* कॉमन एरिया की सफाई

* सोसायटी कार्यालय खर्च

* ऑडिट शुल्क

* कॉमन एरिया की बिजली

* लिफ्ट संचालन और सामान्य रखरखाव

यदि किसी सोसायटी में 100 फ्लैट हैं तो इन खर्चों को आमतौर पर 100 बराबर हिस्सों में विभाजित किया जाता है, चाहे फ्लैट का आकार कुछ भी हो।

 कौन से चार्ज फ्लैट के क्षेत्रफल के आधार पर लिए जाते हैं?

कुछ खर्च सीधे भवन और संपत्ति के आकार से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में बड़े फ्लैटों का योगदान अधिक रखा जाता है।

इनमें सामान्यतः शामिल हैं:

* रिपेयर एवं मेंटेनेंस फंड

* सिंकिंग फंड

* भवन बीमा से जुड़े कुछ खर्च

* संरचनात्मक मरम्मत के लिए आरक्षित निधि

उदाहरण के लिए यदि किसी सदस्य का फ्लैट 1,200 वर्ग फुट का है और दूसरे सदस्य का फ्लैट 600 वर्ग फुट का है, तो क्षेत्रफल आधारित मदों में पहले सदस्य का योगदान अधिक होगा।

पानी और पार्किंग शुल्क कैसे तय होते हैं?

पानी का शुल्क कई सोसायटियों में वास्तविक उपयोग, मीटर रीडिंग या उपलब्ध कनेक्शनों के आधार पर लिया जाता है। वहीं पार्किंग शुल्क केवल उन्हीं सदस्यों से लिया जाता है जो पार्किंग सुविधा का उपयोग करते हैं।

इसलिए इन दोनों मदों को उपयोग-आधारित शुल्क माना जाता है।

 किराए पर दिए गए फ्लैटों के लिए क्या अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है?

यदि कोई फ्लैट किराए पर दिया गया है तो सोसायटी गैर-अधिभोग (Non-Occupancy) शुल्क वसूल सकती है। हालांकि इसकी भी एक निर्धारित सीमा होती है और सोसायटी मनमाने तरीके से अतिरिक्त शुल्क नहीं लगा सकती।

 इन नियमों से सोसायटी सदस्यों को क्या लाभ होगा?

1. मेंटेनेंस बिल अधिक पारदर्शी होगा।

2. छोटे और बड़े फ्लैट मालिकों के बीच विवाद कम होंगे।

3. सोसायटी प्रबंधन पर जवाबदेही बढ़ेगी।

4. प्रत्येक सदस्य समझ सकेगा कि वह किस मद के लिए भुगतान कर रहा है।

5. वित्तीय योजना और बजट बनाना आसान होगा।

सदस्यों को क्या करना चाहिए?

हर फ्लैट मालिक को अपनी सोसायटी द्वारा जारी मेंटेनेंस बिल की मदवार जानकारी देखनी चाहिए। यदि किसी शुल्क की गणना नियमों के अनुरूप नहीं लगती है तो सदस्य AGM या General Body Meeting में स्पष्टीकरण मांग सकते हैं।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्कों को लेकर लंबे समय से भ्रम बना हुआ था। अब नियमों और मॉडल बायलॉज के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा रहा है कि कौन से खर्च सभी सदस्यों में बराबर बांटे जाएंगे और कौन से फ्लैट के क्षेत्रफल के आधार पर वसूले जाएंगे। यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी बल्कि सोसायटी प्रबंधन और सदस्यों के बीच विश्वास को भी मजबूत करेगी।

HousingSocietySolutions का मानना है कि स्पष्ट नियम, पारदर्शी बिलिंग और जागरूक सदस्य ही किसी भी हाउसिंग सोसायटी के सुचारू संचालन की सबसे बड़ी कुंजी है ।

यह रिपोर्ट महाराष्ट्र में हाल ही में स्पष्ट किए गए हाउसिंग सोसायटी मेंटेनेंस नियमों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लिखा गया है। नए नियमों का उद्देश्य मेंटेनेंस चार्ज की गणना को अधिक पारदर्शी बनाना और फ्लैट मालिकों के बीच होने वाले विवादों को कम करना है।


> अपनी हाउसिंग सोसायटी को लेकर कोई सवाल हो तो जरूर पूछें:

आपके मन में सोसायटी से जुड़ा कोई सवाल हो तो बिंदास होकर पूछिये, ये आपका हक है। आप बेहतर जिंदगी के लिए, बेहतर सुविधा के लिए मेनटेनेंस देते हैं, और मैनेजिंग कमिटी की ये जिम्मेदारी है कि वह अपनी सोसायटी के लोगों को ऐसी सुविधा बिना किसी देरी के, बिना किसी बहाने के मुहैया कराए। 

(को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में कुछ सदस्यों की राजनीति और मैनेजिंग कमिटी की लापरवाही किस तरह से वहां रहने वाले और उनकी फैमिली को खतरे में डालती है, इस किताब में आप पढ़ सकते हैं। किताब का नाम है- हाउसिंग सोसायटी में सियासत;    जान पर आफत!  - https://www.amazon.in/dp/B08X2RS7MB ) 

 

(तमाम विरोधों के बावजूद मैनेजिंग कमिटी में रहकर अपनी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी को ठीक से रखना चाहते हैं, तो, कैसे काम करना है, उसके लिए 'डेढ़ साल बेमिसाल' किताब को जरूर पढ़ें।)  

-Housing Society vs Housing society federation II हाउसिंग सोसायटी और हाउसिंग सोसायटी फेडरेशन II

-Housing Society में आपको परेशानी है, कहां और कैसे शिकायत करें II Registrar II Housing ByeLaws II MCA II Complaint II Managing Society II

>Housing Society के Redevelopment एग्रीमेंट से पहले ये चूक भारी पड़ेगी! II Redevelopment Of The Cooperative Housing Societies II CHS II Mumbai II TDR II FSI II

>Housing Society में Leakage पर लड़ाई, मैंने बहुत सारे Leakage कैसे ठीक कराई

> अपनी Housing Society को बारिश में 'बीमार' होने से कैसे बचाएं! Housing Society Solutions II Waterlogging II

-Housing Society Solutions: आपकी लापरवाही बिल्डिंग को आग के हवाले कर सकती है!

-रिपेयर के लिए कोटेशन 9 लाख 37 हजार, AGM में बजट पास कराया 11 लाख, करप्शन का 'बेशर्म खेल' Housing Society में!


-Housing Society: अपनी हाउसिंग सोसायटी को जानें; Know Your Housing Society

-Housing Society: Leakage, Seepage पर लापरवाही, बिल्डिंग में मचाएगी तबाही

-Housing Society के काम को लेकर कमिटी भी Confused, कॉन्ट्रैक्टर भी  Confused!

-Housing Society का Underground Drainage Pipe और Tiles बदलने से पहले सोचें   

-HousingSocietyGyan: सोसायटी का सेप्टिक टैंक OverFlow होने लगे, तो ये बेवकूफी मत करें 

-Dirty Water: जिस पानी को हाथ नहीं लगा सकते हैं, वो हम पीते हैं! ये रहा सबूत 

-अपनी हाउसिंग सोसायटी की AGM की तैयारी कैसे करें, ताकि अपमानित ना होना पड़े

-अपनी हाउसिंग सोसायटी की AGM की तैयारी आसानी से तीन स्टेप में करें, हर स्टेप की जानकारी 

-SwacchHousingSociety:अपनी ही हाउसिंग सोसायटी के गेट पर कचरा फेंकना यानी नुकसान अपना 

- हाउसिंग सोसायटी में खुलेआम "Communal खेल" और चेयरमैन और सेक्रेटरी की चुप्पी !

-हाउसिंग सोसायटी की AGM में Time Pass करने वाले मैनेजिंग कमिटी के मेंबर्स से बचके !

-हाउसिंग सोसायटी के हर मेंबर्स को AGM में ये 16 सवाल जरूर पूछने चाहिए

-हाउसिंग सोसायटी की AGM में भाग लेना कितना जरूरी है, आप शायद नहीं जानते!

-हाउसिंग सोसायटी के सेप्टिक टैंक की सफाई कब करवानी चाहिए

-हाउसिंग सोसायटी की जमीन अगर सरकारी गटर से नीचे हो जाए तो जलजमाव से कैसे बचें

-हाउसिंग सोसायटी में पानी की टंकी रहने पर भी पानी की समस्या और उसके समाधान 

-शेड के लिए छत पर कैसे चढ़ाते हैं सीमेंट शीट

-बिल्डिंग पर शेड लगाने से पहले आयरन मैटेरियल पर प्राइमर और कलर

-बिल्डिंग पर शेड लगाने के लिए आयरन मैटेरियल कैसे ले जाया जाता है

-बिल्डिंग की छत का समय समय पर जरूर मरम्मत कराएं, जानें कैसे और क्यों

-आपकी बिल्डिंग तंदुरुस्त रहेगी, तभी आपका फ्लैट, आपका परिवार भी सुरक्षित रहेगा 

-अंडरग्राउंड वॉटर टंकी की हालत देखिये, नियमित सफाई नहीं कराने पर ऐसी हुई हालत

-हाउसिंग सोसायटी को ज्यादा पानी स्टोरेज के लिए क्या करना चाहिए

-पानी की टंकी को लेकर लापरवाही सोसायटी और मकानमालिक के लिए खतरनाक है, जानें कैसे 

-आग से खुदको,फैमिली को, फ्लैट और बिल्डिंग को कैसे बचाएं

-बिल्डिंग को कलर करने से पहले कैसे होती है दीवारों की सफाई

-कैसे होता है बिल्डिंग रिपेयर का काम

-बिल्डिंग रिपेयर, क्रैक फिलिंग, कलर की पूरी प्रक्रिया जानें

-हाउसिंग सोसायटी की छत डिश एंटेना लगाने का सही तरीका, गलत तरीके से लगाएंगे तो बिल्डिंग को नुकसान पहुंचेगा  

कहीं आप हाउसिंग सोसायटी की छत पर डिश एंटेना लगाकर बिल्डिंग को तो नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं!

-फ्लैट की बालकनी में आपकी गार्डेनिंग कहीं बिल्डिंग तो खराब नहीं कर रही है!

- हाउसिंग सोसायटी की नाली को साफ-सुथरा, सुरक्षित और खूबसूरत कैसे बनाएं 

-हाउसिंग सोसायटी के फ्लैट के अंदर लीकेज की समस्या और उसका समाधान 

-अपनी हाउसिंग सोसायटी के पड़ोसी की आप से हो रही परेशानी समझें और उसे दूर करें 

-महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले AGM की ताकत को नजरअंदाज मत करें 

-बड़े अजीब होते हैं...को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के लोग 

- हाउसिंग सोसायटी और उसकी कमिटी के लोगों का 'Confusing Character'!

-किसी भी हाउसिंग सोसायटी की सरकार होती है उसकी मैनेजिंग कमिटी

-'हाउसिंग सोसायटी के हित में काम करना ही मैनेजिंग कमिटी की जिम्मेदारी होती है'

- अपनी हाउसिंग सोसायटी की समस्या सुलझाकर हंसिये, बेवजह विवाद बढ़ाने से बचिये

- हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले-क्या आप कानून जानते हैं?

-हाउसिंग सोसायटी के कानून जानने के हैं बहुत सारे फायदे

- हाउसिंग सोसायटी में कैसे होता है करप्शन का खेल!

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1-कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले हर लोगों के लिए जरूरी किताब।
2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा' - 
5-अमीर बनने की ख्वाहिश हममें से हर किसी की होती है, लेकिन इसके लिए लोगों को पैसे से पैसा बनाने की कला तो आनी चाहिए। कैसे आएगी ये कला, पढ़िये - 'आपका पैसा, आप संभालें' - 
6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -

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Housing Society Management Software Veerova : कैसे ₹20-25 हजार के खर्च से बचाएं लाखों का नुकसान और बढ़ाएं सोसाइटी की आय


जानें कैसे हाउसिंग सोसाइटी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर आपकी सोसाइटी को बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता, सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान कर सकता है। डिजिटल सिस्टम से बचाएं समय और बढ़ाएं वित्तीय मजबूती।

हाउसिंग सोसाइटी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर: क्यों हर सोसाइटी को चाहिए स्मार्ट डिजिटल सिस्टम?

आज के समय में हाउसिंग सोसाइटी का प्रबंधन केवल मेंटेनेंस शुल्क एकत्र करने या नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रह गया है। बढ़ती आबादी, सुरक्षा की जरूरत, पारदर्शिता की अपेक्षा और डिजिटल सुविधाओं की मांग ने सोसाइटी मैनेजमेंट को पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

कई सोसाइटियां आज भी पारंपरिक तरीकों से संचालन करती हैं, जिसके कारण रिकॉर्ड प्रबंधन, विजिटर ट्रैकिंग, बिलिंग, संचार और वित्तीय निगरानी में समस्याएं आती हैं। परिणामस्वरूप छोटी-छोटी गलतियां भविष्य में बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं।

 सोसाइटी प्रबंधन में आने वाली प्रमुख चुनौतियां

 1. अतिरिक्त आय के स्रोतों की कमी

अधिकांश हाउसिंग सोसाइटियां केवल मेंटेनेंस शुल्क पर निर्भर रहती हैं। इससे विकास कार्यों और सुविधाओं के उन्नयन के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं हो पाता।

 2. नोटिस और कम्युनिकेशन में परेशानी

कागजी नोटिस या अलग-अलग माध्यमों से सूचना साझा करने पर कई बार महत्वपूर्ण संदेश सभी निवासियों तक समय पर नहीं पहुंच पाते।

 3. मेंटेनेंस और सुविधा प्रबंधन की जटिलता

सुविधाओं की बुकिंग, शिकायत प्रबंधन, विजिटर एंट्री और दैनिक संचालन को मैनुअली संभालना समय लेने वाला और त्रुटिपूर्ण हो सकता है।

 4. रिकॉर्ड और दस्तावेज़ों का अव्यवस्थित प्रबंधन

पुराने रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन जाता है।

5. पारदर्शिता की कमी

निवासी अक्सर वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा रखते हैं।

 डिजिटल सोसाइटी मैनेजमेंट सिस्टम क्यों जरूरी है?

एक आधुनिक डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम सोसाइटी की दैनिक गतिविधियों को सुव्यवस्थित करता है और प्रशासनिक कार्यों को आसान बनाता है। इससे न केवल समय की बचत होती है बल्कि कार्यक्षमता और पारदर्शिता भी बढ़ती है।

डिजिटल सिस्टम के प्रमुख लाभ

 1. अतिरिक्त आय के अवसर

सोसाइटी परिसर में उपलब्ध विज्ञापन स्थानों का बेहतर उपयोग करके अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न किया जा सकता है। यह आय सोसाइटी के विकास कार्यों में उपयोगी साबित हो सकती है।

 2. केंद्रीकृत प्रबंधन

बिलिंग, नोटिस, विजिटर मैनेजमेंट, शिकायत निवारण और रिपोर्टिंग जैसी सभी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर संचालित किया जा सकता है।

 3. स्मार्ट मोबाइल ऐप

निवासी मोबाइल ऐप के माध्यम से भुगतान, शिकायत दर्ज करना, नोटिस देखना और अन्य सुविधाओं का लाभ आसानी से उठा सकते हैं।

 4. बेहतर सुरक्षा और डेटा संरक्षण

डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं और आवश्यक जानकारी किसी भी समय आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

 5. पूर्ण पारदर्शिता

सभी वित्तीय और प्रशासनिक गतिविधियों का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होने से विश्वास और जवाबदेही बढ़ती है।

 डिजिटल परिवर्तन से कैसे होगा आर्थिक लाभ?

कई सोसाइटियां सॉफ्टवेयर को केवल खर्च समझती हैं, जबकि वास्तव में यह एक निवेश है। एक प्रभावी डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम:

* प्रशासनिक लागत कम करता है।

* समय की बचत करता है।

* त्रुटियों को कम करता है।

* अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करता है।

* भविष्य के बड़े वित्तीय नुकसान से बचाता है।

यही कारण है कि आज हजारों आधुनिक हाउसिंग सोसाइटियां डिजिटल समाधान अपनाकर बेहतर प्रबंधन और वित्तीय मजबूती हासिल कर रही हैं।

 निष्कर्ष

यदि आपकी हाउसिंग सोसाइटी अभी भी मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भर है, तो अब डिजिटल परिवर्तन का समय है। एक स्मार्ट सोसाइटी मैनेजमेंट सिस्टम न केवल संचालन को आसान बनाता है, बल्कि पारदर्शिता, सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर भी प्रदान करता है।

भविष्य की स्मार्ट, सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत सोसाइटी बनाने के लिए डिजिटल मैनेजमेंट समाधान अपनाना एक महत्वपूर्ण कदम है।


> अपनी हाउसिंग सोसायटी को लेकर कोई सवाल हो तो जरूर पूछें:

आपके मन में सोसायटी से जुड़ा कोई सवाल हो तो बिंदास होकर पूछिये, ये आपका हक है। आप बेहतर जिंदगी के लिए, बेहतर सुविधा के लिए मेनटेनेंस देते हैं, और मैनेजिंग कमिटी की ये जिम्मेदारी है कि वह अपनी सोसायटी के लोगों को ऐसी सुविधा बिना किसी देरी के, बिना किसी बहाने के मुहैया कराए। 

(को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में कुछ सदस्यों की राजनीति और मैनेजिंग कमिटी की लापरवाही किस तरह से वहां रहने वाले और उनकी फैमिली को खतरे में डालती है, इस किताब में आप पढ़ सकते हैं। किताब का नाम है- हाउसिंग सोसायटी में सियासत;    जान पर आफत!  - https://www.amazon.in/dp/B08X2RS7MB ) 

 

(तमाम विरोधों के बावजूद मैनेजिंग कमिटी में रहकर अपनी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी को ठीक से रखना चाहते हैं, तो, कैसे काम करना है, उसके लिए 'डेढ़ साल बेमिसाल' किताब को जरूर पढ़ें।)  

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> अपनी Housing Society को बारिश में 'बीमार' होने से कैसे बचाएं! Housing Society Solutions II Waterlogging II

-Housing Society Solutions: आपकी लापरवाही बिल्डिंग को आग के हवाले कर सकती है!

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-Housing Society: अपनी हाउसिंग सोसायटी को जानें; Know Your Housing Society

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-HousingSocietyGyan: सोसायटी का सेप्टिक टैंक OverFlow होने लगे, तो ये बेवकूफी मत करें 

-Dirty Water: जिस पानी को हाथ नहीं लगा सकते हैं, वो हम पीते हैं! ये रहा सबूत 

-अपनी हाउसिंग सोसायटी की AGM की तैयारी कैसे करें, ताकि अपमानित ना होना पड़े

-अपनी हाउसिंग सोसायटी की AGM की तैयारी आसानी से तीन स्टेप में करें, हर स्टेप की जानकारी 

-SwacchHousingSociety:अपनी ही हाउसिंग सोसायटी के गेट पर कचरा फेंकना यानी नुकसान अपना 

- हाउसिंग सोसायटी में खुलेआम "Communal खेल" और चेयरमैन और सेक्रेटरी की चुप्पी !

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-हाउसिंग सोसायटी के सेप्टिक टैंक की सफाई कब करवानी चाहिए

-हाउसिंग सोसायटी की जमीन अगर सरकारी गटर से नीचे हो जाए तो जलजमाव से कैसे बचें

-हाउसिंग सोसायटी में पानी की टंकी रहने पर भी पानी की समस्या और उसके समाधान 

-शेड के लिए छत पर कैसे चढ़ाते हैं सीमेंट शीट

-बिल्डिंग पर शेड लगाने से पहले आयरन मैटेरियल पर प्राइमर और कलर

-बिल्डिंग पर शेड लगाने के लिए आयरन मैटेरियल कैसे ले जाया जाता है

-बिल्डिंग की छत का समय समय पर जरूर मरम्मत कराएं, जानें कैसे और क्यों

-आपकी बिल्डिंग तंदुरुस्त रहेगी, तभी आपका फ्लैट, आपका परिवार भी सुरक्षित रहेगा 

-अंडरग्राउंड वॉटर टंकी की हालत देखिये, नियमित सफाई नहीं कराने पर ऐसी हुई हालत

-हाउसिंग सोसायटी को ज्यादा पानी स्टोरेज के लिए क्या करना चाहिए

-पानी की टंकी को लेकर लापरवाही सोसायटी और मकानमालिक के लिए खतरनाक है, जानें कैसे 

-आग से खुदको,फैमिली को, फ्लैट और बिल्डिंग को कैसे बचाएं

-बिल्डिंग को कलर करने से पहले कैसे होती है दीवारों की सफाई

-कैसे होता है बिल्डिंग रिपेयर का काम

-बिल्डिंग रिपेयर, क्रैक फिलिंग, कलर की पूरी प्रक्रिया जानें

-हाउसिंग सोसायटी की छत डिश एंटेना लगाने का सही तरीका, गलत तरीके से लगाएंगे तो बिल्डिंग को नुकसान पहुंचेगा  

कहीं आप हाउसिंग सोसायटी की छत पर डिश एंटेना लगाकर बिल्डिंग को तो नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं!

-फ्लैट की बालकनी में आपकी गार्डेनिंग कहीं बिल्डिंग तो खराब नहीं कर रही है!

- हाउसिंग सोसायटी की नाली को साफ-सुथरा, सुरक्षित और खूबसूरत कैसे बनाएं 

-हाउसिंग सोसायटी के फ्लैट के अंदर लीकेज की समस्या और उसका समाधान 

-अपनी हाउसिंग सोसायटी के पड़ोसी की आप से हो रही परेशानी समझें और उसे दूर करें 

-महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले AGM की ताकत को नजरअंदाज मत करें 

-बड़े अजीब होते हैं...को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के लोग 

- हाउसिंग सोसायटी और उसकी कमिटी के लोगों का 'Confusing Character'!

-किसी भी हाउसिंग सोसायटी की सरकार होती है उसकी मैनेजिंग कमिटी

-'हाउसिंग सोसायटी के हित में काम करना ही मैनेजिंग कमिटी की जिम्मेदारी होती है'

- अपनी हाउसिंग सोसायटी की समस्या सुलझाकर हंसिये, बेवजह विवाद बढ़ाने से बचिये

- हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले-क्या आप कानून जानते हैं?

-हाउसिंग सोसायटी के कानून जानने के हैं बहुत सारे फायदे

- हाउसिंग सोसायटी में कैसे होता है करप्शन का खेल!

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1-कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले हर लोगों के लिए जरूरी किताब।
2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा' - 
5-अमीर बनने की ख्वाहिश हममें से हर किसी की होती है, लेकिन इसके लिए लोगों को पैसे से पैसा बनाने की कला तो आनी चाहिए। कैसे आएगी ये कला, पढ़िये - 'आपका पैसा, आप संभालें' - 
6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -

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मुंबई में 4 करोड़ का फ्लैट खरीदा, फिर भी हाउसिंग सोसाइटी बालकनी में कपड़े सुखाने से रोक सकती है? कानूनी सच्चाई जानें |HousingSocietySolutions

मुंबई के लग्जरी हाउसिंग सोसाइटी में बालकनी पर कपड़े सुखाना प्रतिबंधित? क्या सोसाइटी यह नियम लगा सकती है? कानूनी प्रावधान, बाय-लॉ और समाधान क...