निवासियों की मांगें
रखरखाव फंड का CA सर्टिफाइड ऑडिट कराया जाए
सभी खर्चों का पूर्ण ब्रेकअप दिया जाए
पारदर्शिता सुनिश्चित होने तक आगे कोई अतिरिक्त चार्ज न लगाया जाए
एक निवासी (नाम गोपनीय) ने कहा, “हम भुगतान करने से इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह जानना हमारा अधिकार है कि हमारा पैसा कहाँ खर्च हो रहा है।”
डेवलपर का जवाब
बिरला वान्या के नेशनल सेल्स हेड अंकित अग्रवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निवासियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था, जिसे अब वापस ले लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि “शनिवार को सभी सदस्यों के साथ बैठक कर मुद्दे का समाधान किया जाएगा।”
आगे की कार्रवाई
निवासियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) का रुख करेंगे।
कानूनी पक्ष (RERA नियम)
बिल्डर को रखरखाव फंड का CA प्रमाणित स्टेटमेंट देना अनिवार्य है।
मेंटेनेंस फंड को बिल्डर के अन्य बिजनेस अकाउंट में नहीं मिलाया जा सकता।
सोसाइटी का गठन निर्धारित समयसीमा में करना जरूरी है।
यह घटना मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में बिल्डरों और होमबायर्स के बीच बढ़ते विवादों की एक और मिसाल है, जहाँ रखरखाव शुल्क, फंड के उपयोग और पारदर्शिता को लेकर अक्सर शिकायतें आती रहती हैं।
निवासियों के लिए सलाह (हाउसिंग सोसाइटी सॉल्यूशंस के नजरिए से):
हमेशा लिखित में शिकायत दर्ज करें, पुलिस को पूर्व सूचना दें (जैसा इन निवासियों ने किया), और RERA या सहकारी विभाग से मदद लें। सोसाइटी गठन के बाद मेंटेनेंस फंड का ऑडिट सालाना अनिवार्य रूप से करवाएं।
स्रोत: मिड-डे न्यूज (13 अप्रैल 2026)
टैग्स: कल्याण हाउसिंग सोसाइटी, रखरखाव शुल्क दुरुपयोग, बिरला वान्या कल्याण, RERA नियम, मेंटेनेंस ऑडिट

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