सोमवार, 22 जून 2026

मुंबई बिल्डर ने खरीदार का फ्लैट किसी और को बेचा, उपभोक्ता आयोग ने दिलाया ₹1.05 करोड़ रिफंड

मुंबई में एक बिल्डर द्वारा खरीदार को आवंटित फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति को बेचने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने ₹1.05 करोड़ रिफंड और ब्याज देने का आदेश दिया। जानिए पूरा मामला और घर खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण सबक।


मुंबई में बिल्डर की बड़ी लापरवाही: खरीदार का फ्लैट किसी और को बेचने पर ₹1.05 करोड़ लौटाने का आदेश

रियल एस्टेट सेक्टर में घर खरीदारों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मुंबई डेवलपर को दंपति को ₹1.05 करोड़ की राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। मामला उस समय सामने आया जब खरीदारों को वर्षों तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिला और बाद में पता चला कि वही फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया था। 

 क्या था पूरा मामला?

रायगढ़ जिले के एक दंपति ने वर्ष 2013 में दक्षिण मुंबई के एक आवासीय प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया था। बिल्डर ने निर्माण शुरू करने और निर्धारित समय में कब्जा देने का आश्वासन दिया था। खरीदारों ने अपनी जमा पूंजी और अन्य संसाधनों से भुगतान भी कर दिया।

हालांकि, परियोजना समय पर पूरी नहीं हुई। बाद में डेवलपर ने खरीदारों को दूसरे प्रोजेक्ट में फ्लैट देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन वहां भी उन्हें कब्जा नहीं मिला। कई वर्षों तक इंतजार और लगातार आश्वासनों के बाद दंपति को पता चला कि जिस फ्लैट के लिए उन्होंने भुगतान किया था, उसे किसी तीसरे पक्ष को बेच दिया गया है। 

 उपभोक्ता आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने माना कि डेवलपर का व्यवहार केवल सेवा में कमी (Deficiency in Service) नहीं बल्कि एक गंभीर अनुचित व्यापारिक प्रथा (Unfair Trade Practice) है। आयोग ने कहा कि खरीदारों से पूरी राशि लेने, वैधानिक समझौता दर्ज न कराने, फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति को बेचने और बाद में रिफंड के लिए दिए गए चेक बाउंस होने जैसी घटनाएं डेवलपर की गंभीर जिम्मेदारी को दर्शाती हैं। 

 आयोग का आदेश

आयोग ने डेवलपर और संबंधित पक्षों को संयुक्त रूप से निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया—

* ₹1.05 करोड़ की मूल राशि वापस करना।

* निर्धारित अवधि से ब्याज का भुगतान करना।

* मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक परेशानी के लिए अतिरिक्त मुआवजा देना।

* मुकदमेबाजी का खर्च भी वहन करना।

यदि आदेश का पालन तय समय सीमा में नहीं किया जाता है तो ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है। 

घर खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण सबक

1. बिक्री समझौता (Agreement for Sale) तुरंत रजिस्टर कराएं

सिर्फ अलॉटमेंट लेटर पर निर्भर न रहें। कानूनी रूप से पंजीकृत समझौता खरीदार के अधिकारों को मजबूत बनाता है।

 2. सभी भुगतान का रिकॉर्ड रखें

बैंक ट्रांजैक्शन, रसीदें, ईमेल और अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखें। विवाद की स्थिति में यही सबसे मजबूत साक्ष्य बनते हैं।

3. परियोजना की कानूनी स्थिति जांचें

बुकिंग से पहले प्रोजेक्ट की स्वीकृतियां, भूमि स्वामित्व और RERA पंजीकरण की जांच करना आवश्यक है।

4. देरी होने पर कानूनी अधिकारों का उपयोग करें

यदि बिल्डर कब्जा देने में असफल रहता है तो खरीदार उपभोक्ता आयोग, RERA अथॉरिटी या अन्य कानूनी मंचों का सहारा ले सकते हैं।

 निष्कर्ष

यह फैसला उन हजारों घर खरीदारों के लिए राहत की मिसाल है जो वर्षों से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे हैं। उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिल्डर खरीदारों के पैसे लेकर अनिश्चितकाल तक उन्हें इंतजार नहीं करा सकते और न ही आवंटित संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को बेच सकते हैं। ऐसे मामलों में कानून खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करता है और उचित मुआवजा दिलाने की व्यवस्था भी करता है। 





कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मुंबई बिल्डर ने खरीदार का फ्लैट किसी और को बेचा, उपभोक्ता आयोग ने दिलाया ₹1.05 करोड़ रिफंड

मुंबई में एक बिल्डर द्वारा खरीदार को आवंटित फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति को बेचने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने ₹1.05 करोड़ रिफंड और ब्याज देने क...